समर कैंप के समापन के मौके पर गुरुद्वारा जगत सुधार में विभिन्न कार्यक्रम
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Jun 2019 12:35 AM
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दुर्गापुर/रानीगंज : बंगाल, झारखंड सहित आसपास के इलाके के 18 गुरुद्वारे में बीते एक हफ्ते से चल रहे समर कैंप का रविवार को समापन हो गया. समापन पर शहर स्थित गुरुद्वारा जगत सुधार में गुरु गोविंद सिंह स्टडी सर्कल, शिरोमणि गुरद्वारा प्रबंधन कमेटी (अमृतसर) और सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (बंगाल) की और से विभिन्न कार्यक्र्म […]
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दुर्गापुर/रानीगंज : बंगाल, झारखंड सहित आसपास के इलाके के 18 गुरुद्वारे में बीते एक हफ्ते से चल रहे समर कैंप का रविवार को समापन हो गया. समापन पर शहर स्थित गुरुद्वारा जगत सुधार में गुरु गोविंद सिंह स्टडी सर्कल, शिरोमणि गुरद्वारा प्रबंधन कमेटी (अमृतसर) और सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (बंगाल) की और से विभिन्न कार्यक्र्म का आयोजन किया गया.
इस मौके पर गुरु गोविंद सिंह स्टडी सर्कल के अध्यक्ष बीबी हरशरण कौर, सचिव गुलबिंदर सिंह, शिरोमणि गुरद्वारा प्रबंधन कमेटी (अमृतसर) से प्रचारक बलजीत सिंह, परविंदर सिंह और सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (बंगाल) तेजेन्द्र सिंह बल, सचिव तरसेम सिंह मुख्य रूप से उपस्थित थे.
कमेटी की ओर से बताया गया कि हर वर्ष गर्मियों की छुट्टियों में समर कैंप का आयोजन कर बच्चों को जहां पंजाबी भाषा लिखने व पढ़ने की ट्रेनिंग के साथ ही सभी गुरूओं व उनके उपदेश की जानकारी भी दी जाती है. कैंप में बच्चों को पंजाबी भाषा का ज्ञान, पगड़ी बांधना, ड्राइंग-पेंटिंग, पॉट्री, स्पोर्ट्स, मार्शल आर्ट्स और संगीत गायन, वादन व अन्य विषयों में प्रशिक्षण दिया गया. समापन के मौके पर बच्चो के बीच पगड़ी बाधना, कविता पढ़ना और पटका बांधने की प्रतियोगिता हुई.
बच्चों ने गुरुद्वारा साहिब के सभी नियमित कार्यों जैसे सोदर रहिरास साहिब पाठ, कीर्तन, कविता, वार्तालाप, कवीशरी, अरदास, हुकुमनामा अरदास और गुरु ग्रंथ साहिब सुखासन की सेवा, प्रसाद बांटने की सेवा समेत अन्य कार्य किए. कार्यक्रम का उद्देश्य अगली पीढ़ी को गुरबाणी व इतिहास से रूबरू कराना था. करीब 100 बच्चो को पुरस्कृत भी किया गया. कार्यक्र्म को सफल बनाने मे दुर्गापुर सेवा खालसा दल के अध्यक्ष दलविंदर सिंह, उपाध्यक्ष अवतार सिंह वीर, राजा सिंह सहित अन्य लोगो का विशेष योगदान रहा.
इसके अलावा समर कैंप में 35 सिखों को अमृत संचार कराया गया. इसमें अमृत संचार कराते हुए गुरु के बताए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया. इस मौके पर सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के सचिव तरसेम सिंह ने कहा कि अमृत संचार करना हर सिख का फर्ज है.ज्ञात हो की अमृत संचार(अथ्वा खण्डे दी पौहल) सिख धर्म का बपतिस्मा समारोह हैं.
यह रीत की शुरुआत् श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी ने खालसा स्थापना के दौरान सन 1699 में की थी. एक सिख जब इस रीत से गुज़रता है, वह खालसा बन जाता है और हर नर का आखिरी नाम सिहं और हर नारी का आखिरी नाम कौर स्थापित हो जाता हैं.
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