सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की प्रणाली को लेकर की बैठक

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 05 Jun 2018 12:44 AM

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दुर्गापुर : सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट किसी भी क्षेत्र में समुचित साफ़-सफाई एवं स्वस्थ पर्यावरण बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण पहलू है. इसलिए नगर प्रशासन अपने क्षेत्र में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रणाली की पूर्ति करने के लिए उत्तरदायी है. इससे उनके निर्धारित क्षेत्र में प्रदूषण एवं अन्य बीमारियों का नियंत्रण अथवा रोकथाम हो पाए. सॉलिड वेस्ट […]

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दुर्गापुर : सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट किसी भी क्षेत्र में समुचित साफ़-सफाई एवं स्वस्थ पर्यावरण बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण पहलू है. इसलिए नगर प्रशासन अपने क्षेत्र में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रणाली की पूर्ति करने के लिए उत्तरदायी है. इससे उनके निर्धारित क्षेत्र में प्रदूषण एवं अन्य बीमारियों का नियंत्रण अथवा रोकथाम हो पाए.
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की प्रणाली में मूल रूप से उन ठोस सामग्रियों को एकत्रित कर के, उपचार करने के बाद हटा दिया जाता है जो अब उपयोगी नहीं हैं. यदि नगर निगम के ठोस अपशिष्ट का निपटारा सम्मुचित ढंग से नहीं किया जाये तो यह उस क्षेत्र में प्रदूषण अथवा कई खतरनाक रोगों को फैला सकता है. समुचित ढंग से ठोस अपशिष्ट के निपटारे के लिए दुर्गापुर नगर निगम ने भी अब अपनी कमर कस ली है.
इसके तहत ठोस अपशिष्ट के निपटारे के लिए सोमबार को नगर निगम के दो नंबर बोरो कार्यालय में एक बैठक का आयोजन किया गया. इस बैठक में दो नम्बर बोरो चेयरमैन रमा प्रसाद हालदार,मेयर परिषद के सदस्य रुमा पाडियल, पार्षद मधुसुदन मंडल, असीमा चक्रवर्ती के आलावा दुर्गापुर चेम्बर ऑफ़ कॉमर्स के सचिव भोला भगत,अनिरुद्ध श्याम सहित व्यवसाई कमेटी के लोग उपस्थित थे.
इस बैठक में शहर के बेनाचिटी इलाके में जल्द सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की प्रणाली बैठाने पर चर्चा हुई. मौके पर उपस्थित बोरो चेयरमैन रमा प्रसाद हालदार ने व चेम्बर के सचिव भोला भगत ने जानकारी देते हुए बताया कि जनसंख्या वृद्धि और प्रचंड उपभोक्तावाद के कारण प्राकृतिक संसाधनों का दोहन चरम पर है.
और हमारे सामने पर्यावरण को बचाए रखने का महत्वपूर्ण दायित्व है. जब पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज के मुद्दे पर एकजुट हो रही हो, तब एक मनुष्य और समाज के रूप में हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी प्रकृति के साथ तारतम्यता बनाकर जीना है और उसी के मुताबिक अपनी जीनशैली को ढालना है.कचरा प्रबंधन इस दिशा में उठाया गया बेहतरीन कदम साबित हो रहा है. कचरा निस्तारण, रीसायक्लिंग, कचरे से ऊर्जा उत्पादन इन सभी को कचरा प्रबंधन या वेस्ट मैनेजमेंट कहा जाता है.
रीसायक्लिंग से कई उपभोक्ता वस्तुएं बाजार में दोबारा उपलब्ध हो जाती है जो कि प्राकृतिक संसाधनों के दोहन में कमी ला रही है. कागज को रीसायकल कर कम से कम उतने और पेड़ों को तो कटने से रोका जा सकता है. वहीं कचरा निस्तारण में घरों से निकले आर्गेनिक कचरे को बायो कंपोस्ट और मीथेन गैस में बदल कर लोगों द्वारा उपयोग किए गए खाद्य पदार्थों का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा. उन्होंने बताया की बेनाचिटी के जलखावर और निशान हाट इलाके को इसके लिए चिन्हित किया गया है.तक़रीबन 30 से 35 लाख की लागत से इसका निर्माण किया जायगा. जिसमे तक़रीबन तीस लाख ननि वहन करेगा.वहीं व्यवसाई समिति की और से भी एक लाख का योगदान दिया जायगा.
क्या है ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का संबंध अपशिष्ट पदार्थों के निकास से लेकर उसके उत्पादन व पुनः चक्रण द्वारा निपटान करने की देखरेख से है. ठोस अपशिष्ट के उत्पादन का व्यवस्थित नियंत्रण, संग्रह, भंडारण, ढुलाई, निकास पृथ्थ्करण, प्रसंस्करण, उपचार, पुनः प्राप्ति और उसका निपटान है. नगरनिगम अपशिष्ट पदार्थ शब्द का प्रायः इस्तेमाल शहर, गाँव या कस्बे के कचरे के लिए किया जाता है जिसमे रोज़ के कचरे को इकठ्ठा कर व उसे ढुलाई के द्वारा निपटान क्षेत्र तक पहुंचाने का काम होता है.
नगरपालिका अपशिष्ट पदार्थ के स्त्रोतों में निजी घर, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और संस्थाओं के साथ साथ औद्योगिक सुविधाएं भी आती हैं. हालांकि औद्योगिक प्रक्रियाओं से निकले कचरे, निर्माण और विध्वंस के मलबे, मल के कीचड़, खनन अपशिष्ट पदार्थों या कृषि संबंधी कचरे को अपने में शामिल नहीं करता है .नगर निगम में अपशिष्ट पदार्थों में विविध प्रकार की सामग्री आती है.
इसमे खाद्य अपशिष्ट जैसे सब्जियाँ या बचा हुआ मांस, बचा हुआ खाना, अंडे के छिलके आदि ,जिसे गीला कचरा कहा जाता है ,और साथ ही साथ कागज़, प्लास्टिक, टेट्रापेक्स,प्लास्टिक के डिब्बे, अखबार, काँच की बोतलें, गत्ते के डिब्बे, एल्युमिनियम की पत्तियाँ, धातु की चीज़ें, लकड़ी के टुकड़े इत्यादि ,जिसे सूखा कचरा कहा जाता है ,जैसे अपशिष्ट पदार्थ आते हैं.
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