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हेलीकॉप्टर हादसे में शहीद जवान कुलदीप राव के परिजनों को 1 करोड़ देगी राजस्थान सरकार, सीएम गहलोत ने किया ऐलान

Updated at : 14 Dec 2021 2:05 PM (IST)
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हेलीकॉप्टर हादसे में शहीद जवान कुलदीप राव के परिजनों को 1 करोड़ देगी राजस्थान सरकार, सीएम गहलोत ने किया ऐलान

तमिलनाडु के कुन्नूर में बीते 8 दिसंबर को हुए हेलीकॉप्टर हादसे के दौरान सीडीएस बिपिन रावत के साथ चल रहे वायु सेना के स्क्वाड्रन लीडर कुलदीप राव राजस्थान के झुंझुनूं जिले के घडराना गांव के रहने वाले थे.

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जयपुर : तमिलनाडु के कुन्नूर में बीते 8 दिसंबर को हुए हेलीकॉप्टर हादसे में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) बिपिन रावत के साथ शहीद हुए राजस्थान के वीर जवान स्क्वाड्रन लीडर कुलदीप राव के परिजनों को राजस्थान सरकार एक करोड़ रुपये देगी. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस बाबत ऐलान किया है. भारतीय वायु सेना के स्क्वाड्रन लीडर कुलदीप राव चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ को ले जा रहे रूसी हेलीकॉप्टर में को-पायलट के तौर पर तैनात थे.

दरअसल, तमिलनाडु के कुन्नूर में बीते 8 दिसंबर को हुए हेलीकॉप्टर हादसे के दौरान सीडीएस बिपिन रावत के साथ चल रहे वायु सेना के स्क्वाड्रन लीडर कुलदीप राव राजस्थान के झुंझुनूं जिले के घडराना गांव के रहने वाले थे. हेलीकॉप्टर हादसे के बाद रविवार को शहीद कुलदीप का उनके पैतृक गांव में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. शहीद कुलदीप राव अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे. कुलदीप के पिता रणधीर सिंह भी नौसेना से रिटायर हैं.

मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, बीते 8 दिसंबर को सीडीएस बिपिन रावत के हेलीकॉप्टर को वायु सेना के ग्रुप कैप्टन पीएस चौहान और को-पायलट स्क्वाड्रन लीडर कुलदीप राव उड़ा रहे थे. कुलदीप की शादी करीब दो साल पहले ही हुई थी. कुलदीप राव वायु सेना के एक कुशल पायलट थे. कुलदीव राव का पार्थिव शरीर को रविवार को एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर के जरिए दिल्ली से झुंझुनूं लाया गया था. वहां एयरफोर्स की ओर से शहीद कुलदीप राव को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. बाद में उन्हें श्रद्धाजंलि दी गई.

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके बाद शहीद की पार्थिव देह को उनके पैतृक गांव घरडाना खुर्द ले जाया गया. इस दौरान झुंझुनूं से लेकर उनके गांव तक 40 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली गई. इस दौरान शहीद कुलदीप की वीरांगना यश्वनी और बहन साथ रही. तिरंगा यात्रा के दौरान कुलदीप की पत्नी यश्वनी ने पूरे समय सब्र बनाये रखा था. लेकिन जब उन्होंने अपने पति को मुखाग्नि दी तो उनके सब्र का बांध टूट पड़ा.

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