चक्रधरपुर में बस-बाइक की टक्कर में तीन युवकों की मौत, मुआवजे की मांग पर सड़क जाम

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 16 May 2026 4:05 PM

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चक्रधरपुर में मुआवजे की मांग को लेकर सड़क पर बैठे ग्रामीण. फोटो: प्रभात खबर

West Singhbhum News: चक्रधरपुर-सोनुवा मार्ग पर बस और बाइक की टक्कर में तीन युवकों की मौत के बाद ग्रामीणों ने मुआवजे की मांग को लेकर एनएच-75 (ई) जाम कर दिया. परिजनों ने बस मालिक से 20-20 लाख रुपये मुआवजे की मांग की है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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चक्रधरपुर से रविशंकर मोहंती की रिपोर्ट

West Singhbhum News: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम स्थित चक्रधरपुर-सोनुवा मुख्य मार्ग पर हुए भीषण सड़क हादसे में तीन युवकों की दर्दनाक मौत हो गई. इसके बाद शनिवार को परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा. मुआवजे की मांग को लेकर ग्रामीणों ने पहले सोनुवा रोड और बाद में चक्रधरपुर-रांची मुख्य मार्ग एनएच-75 (ई) स्थित चेकनाका चौक को जाम कर दिया. करीब डेढ़ घंटे तक सड़क जाम रहने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. बताया गया कि बस और बाइक की सीधी टक्कर में चेलाबेड़ा गांव निवासी कृष्णा नायक तथा सोनुवा क्षेत्र के तयरा गांव निवासी गणेश नायक और श्यामलाल गोप की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी. हादसे के बाद से परिजन सदमे में हैं.

पुलिस की संतोषजनक पहल नहीं होने पर सड़क जाम

शनिवार को मुआवजे की मांग को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन पहले चक्रधरपुर थाना पहुंचे. वहां से संतोषजनक पहल नहीं होने पर उन्होंने सोनुवा रोड जाम कर दिया. बाद में आक्रोशित ग्रामीणों ने एनएच-75 (ई) के चेकनाका चौक पर सड़क जाम कर दिया. तेज धूप के बीच महिलाएं, बुजुर्ग और ग्रामीण सड़क पर बैठे रहे. इस दौरान एंबुलेंस को छोड़कर सभी छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन पूरी तरह बाधित रहा. सड़क जाम की सूचना मिलते ही अंचलाधिकारी सुरेश कुमार सिन्हा और थाना प्रभारी अवधेश कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने परिजनों और ग्रामीणों से वार्ता की, जिसके बाद जाम समाप्त कराया गया और आवागमन सामान्य हो सका.

बस मालिक से 5-5 लाख मुआवजे की मांग

मृतकों के परिजनों ने बस मालिक से प्रत्येक परिवार को 5-5 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की. हालांकि तत्काल राहत के रूप में प्रशासन की ओर से अंतिम संस्कार के लिए 10-10 हजार रुपये उपलब्ध कराए गए. इससे ग्रामीणों में नाराजगी भी देखी गई.

लिखित आवेदन मिलने पर बस का परमिट होगा रद्द

थाना प्रभारी अवधेश कुमार ने कहा कि घटना बेहद दुखद और दर्दनाक है. सरकार की ओर से मिलने वाली सभी सहायता मृतकों के परिजनों तक पहुंचाई जाएगी. उन्होंने कहा कि यदि परिजन लिखित आवेदन देते हैं तो संबंधित बस का परमिट रद्द करने की कार्रवाई भी की जाएगी.

मुआवजे की मांग पर अड़े रहे ग्रामीण

चक्रधरपुर- सोनुवा मुख्य मार्ग पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे में मृत तीनों युवकों के शव पोस्टमार्टम के बाद देर शाम परिजनों को सौंप दिए गए. पुलिस ने चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में तीनों शवों का पोस्टमार्टम कराया. जानकारी के अनुसार सुबह ही पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होनी थी, लेकिन मुआवजे की मांग को लेकर आक्रोशित परिजन और ग्रामीण सड़क जाम कर प्रदर्शन करते रहे, जिसके कारण पोस्टमार्टम में विलंब हुआ. हादसे में चेलाबेड़ा गांव निवासी कृष्णा नायक तथा सोनुवा क्षेत्र के गणेश नायक और श्यामलाल गोप की मौत हो गई थी. घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल बना हुआ है.

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प्रत्येक परिवार को 20-20 लाख मुआवजा दे बस मालिक

मृतक कृष्णा नायक के पिता मोनो नायक ने प्रशासन और बस मालिक से उचित मुआवजा देने की मांग की. उन्होंने कहा कि हादसे में तीन परिवारों का सहारा छिन गया है, इसलिए बस मालिक प्रत्येक परिवार को 20-20 लाख रुपये मुआवजा दे, ताकि परिजनों का जीविका उपार्जन हो सके. उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि अभी तक केवल 10-10 हजार रुपये अंतिम संस्कार के लिए दिए गए हैं, जो पर्याप्त नहीं है. मोनो नायक ने कहा कि इंसान की जिंदगी की कोई कीमत नहीं होती, लेकिन पीड़ित परिवारों को न्याय और आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए. उन्होंने प्रशासन से बस मालिक के माध्यम से उचित मुआवजा दिलाने की मांग की.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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