रेंजर वेतन मामला: झारखंड हाईकोर्ट ने वन सचिव को दिया 7 दिनों का अल्टीमेटम

Published by : Sameer Oraon Updated At : 16 May 2026 5:03 PM

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झारखंड हाईकोर्ट

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए वन विभाग को एक सप्ताह के भीतर सेवानिवृत्त रेंजर आनंद कुमार के बकाया वेतन का भुगतान डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से करने का सख्त आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि यह ड्राफ्ट समर वेकेशन के दौरान भी प्रार्थी को मिल सकेगा. पूरी विस्तृत रिपोर्ट यहां पढ़ें.

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Jharkhand High Court, रांची (मनोज कुमार सिंह की रिपोर्ट): झारखंड उच्च न्यायालय ने एक अवमानना मामले पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए राज्य के वन विभाग को बेहद सख्त निर्देश जारी किया है. अदालत ने विभाग को आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता आनंद कुमार के वेतन के कुल बकाए का भुगतान एक सप्ताह के भीतर हर हाल में सुनिश्चित किया जाए. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह भुगतान नकद या बैंक ट्रांसफर के बजाय डिमांड ड्राफ्ट (DD) के माध्यम से किया जाएगा, जिसे झारखंड हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय में जमा कराना अनिवार्य होगा.

वन सचिव अबू बक्कर सिद्दीख कोर्ट में हुए पेश

यह आदेश न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की अदालत ने अवमानना याचिका संख्या 72/2025 पर सुनवाई करते हुए दिया. इससे पूर्व, अदालत द्वारा जारी किए गए पिछले आदेशों का अनुपालन करते हुए वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव अबू बक्कर सिद्दीख अदालत में व्यक्तिगत रूप से (सशरीर) उपस्थित हुए. उनके साथ ही याचिकाकर्ता आनंद कुमार भी कोर्ट में स्वयं मौजूद थे. सुनवाई के दौरान वन सचिव ने अदालत को भरोसा दिलाया कि याचिकाकर्ता के वेतन का बकाया जल्द ही जारी कर दिया जाएगा. इस सकारात्मक आश्वासन के बाद अदालत ने फिलहाल वन सचिव को व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी है. आपको बता दें कि आनंद कुमार वन विभाग में रेंजर के पद पर कार्यरत थे.

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश और एलपीए (LPA) का पेंच

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अतिरिक्त महाधिवक्ता सचिन कुमार ने अदालत को आश्वस्त किया कि विभाग याचिकाकर्ता के बकाए का भुगतान करने के लिए पूरी तरह तैयार है. हालांकि, उन्होंने यह बिंदु भी सामने रखा कि यह भुगतान एलपीए (LPA) संख्या 216/2025 के आने वाले अंतिम फैसले के अधीन माना जाएगा. इस मामले का एक पहलू यह भी है कि इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने वन विभाग को निर्देश दिया था कि वह रेंजर आनंद कुमार की पेंशन निर्धारित करे और छह सप्ताह के भीतर उनकी ग्रेच्युटी की राशि जारी करे. राज्य सरकार ने इस फैसले को स्वीकार न करते हुए देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस साल 13 फरवरी को आदेश जारी कर हाईकोर्ट के उस पेंशन और ग्रेच्युटी वाले फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है. लेकिन वर्तमान में चल रहा मामला केवल वेतन के बकाए भुगतान से संबंधित है.

समर वेकेशन (गर्मी की छुट्टियों) में भी मिल सकेगा ड्राफ्ट

हाईकोर्ट ने इस मामले में याचिकाकर्ता के मानवीय हितों और वित्तीय संकट का विशेष ध्यान रखा है. अदालत ने रजिस्ट्रार जनरल को यह विशेष निर्देश दिया है कि जैसे ही वन विभाग द्वारा आनंद कुमार के नाम पर डिमांड ड्राफ्ट जमा कराया जाता है, उसे अत्यंत सुरक्षित अभिरक्षा में रखा जाए. चूंकि राज्य में गर्मी की छुट्टियां (समर वैकेशन) शुरू होने वाली हैं, इसलिए कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता छुट्टियों के दौरान भी इस ड्राफ्ट को प्राप्त करने के लिए रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय में आवेदन देते हैं, तो रजिस्ट्रार जनरल बिना किसी प्रशासनिक देरी के तुरंत वह डिमांड ड्राफ्ट उन्हें सौंप दें. अदालत ने इस अवमानना मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 जून की तारीख मुकर्रर की है.

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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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