चांडिल के सिंहभूम कॉलेज से होम साइंस और सोशियोलॉजी विभाग बंद, छात्रों ने सौंपा ज्ञापन

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 16 May 2026 4:30 PM

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सरायकेला-खरसावां के चांडिल में ज्ञापन सौंपते सिंहभूम कॉलेज के छात्र. फोटो: प्रभात खबर

Seraikela News: सिंहभूम कॉलेज चांडिल में होम साइंस और सोशियोलॉजी विभाग बंद करने के फैसले के विरोध में छात्रों ने ज्ञापन सौंपा. एआईडीएसओ ने नई शिक्षा नीति के तहत लिए गए निर्णय को छात्र हितों के खिलाफ बताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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चांडिल से हिमांशु गोप की रिपोर्ट

Seraikela News: सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल स्थित सिंहभूम कॉलेज में गृह विज्ञान और समाजशास्त्र विभाग बंद करने के फैसले का छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया है. ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (एआईडीएसओ) के नेतृत्व में बुधवार को छात्रों ने कॉलेज प्राचार्य के माध्यम से कुलपति के नाम ज्ञापन सौंपा. छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से विभागों को बंद करने और वाणिज्य विभाग में शिक्षक के एक पद को समाप्त करने का निर्णय वापस लेने की मांग की.

सैकड़ों हस्ताक्षरों के साथ सौंपा ज्ञापन

एआईडीएसओ की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के हस्ताक्षर शामिल थे. छात्रों ने कहा कि कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के हितों को नजरअंदाज कर विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह निर्णय लिया है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द फैसला वापस नहीं लिया गया, तो छात्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे. छात्र नेताओं ने कहा कि कॉलेज में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा. संगठन का कहना है कि कॉलेज में पहले से ही संसाधनों और शिक्षकों की कमी है, ऐसे में विभागों को बंद करना शिक्षा व्यवस्था को और कमजोर करेगा.

क्षेत्र का एकमात्र अंगीभूत डिग्री कॉलेज

कॉलेज कमेटी के सचिव राजा प्रमाणिक ने कहा कि सिंहभूम कॉलेज चांडिल अनुमंडल क्षेत्र का एकमात्र अंगीभूत डिग्री कॉलेज है. यहां चांडिल सहित आसपास के ग्रामीण और दूरदराज इलाकों से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पढ़ने आते हैं. उन्होंने कहा कि कई विद्यार्थी आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों के बावजूद उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. ऐसे में कॉलेज से महत्वपूर्ण विषयों को हटाना विद्यार्थियों के भविष्य पर सीधा असर डालेगा. उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की.

नई शिक्षा नीति के तहत लिया गया फैसला

राजा प्रमाणिक ने बताया कि नई शिक्षा नीति 2020 के तहत लागू क्लस्टर व्यवस्था में कॉलेज से गृह विज्ञान और समाजशास्त्र विषय की पढ़ाई बंद करने का निर्देश जारी किया गया है. इसके साथ ही वाणिज्य विभाग में शिक्षक के एक पद को भी समाप्त करने का निर्णय लिया गया है. उन्होंने कहा कि यह फैसला विद्यार्थियों के हित में नहीं है. कॉलेज में गृह विज्ञान विषय में लगभग 1000 से 1500 विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं. वहीं वाणिज्य विषय में स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई संचालित होती है. इसके बावजूद शिक्षक पद समाप्त करना शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करेगा.

संथाली विषय में अब तक नहीं बना पद

छात्र नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कॉलेज में संथाली विषय पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या अधिक है, लेकिन अब तक इस विषय के लिए शिक्षक का पद सृजित नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में आदिवासी समुदाय की बड़ी आबादी होने के कारण संथाली भाषा और साहित्य की पढ़ाई की मांग लगातार बढ़ रही है. इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन इस दिशा में गंभीर नहीं दिख रहा है. छात्रों ने मांग की कि संथाली विषय के लिए जल्द शिक्षक पद सृजित किया जाए और नियमित शिक्षकों की नियुक्ति की जाए.

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आंदोलन की चेतावनी

एआईडीएसओ के नेताओं ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने विभाग बंद करने और पद समाप्त करने का निर्णय वापस नहीं लिया, तो छात्र व्यापक आंदोलन करेंगे. उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. ज्ञापन सौंपने के दौरान एआईडीएसओ के जिला सचिव युधिष्ठिर प्रमाणिक, अनीता, अफ्सा परवीन, अमित, अजय गोप, बादल सहित कई छात्र-छात्राएं मौजूद थे. संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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