मधु कोड़ा की अगुवाई में गुवा सेल खदान में अनिश्चितकालीन चक्का जाम, उत्पादन पूरी तरह ठप

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :11 May 2026 7:21 PM (IST)
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West Singhbhum News

गुवा के सेल खदान में प्रदर्शन करते लोग. फोटो: प्रभात खबर

West Singhbhum News: पश्चिमी सिंहभूम के गुवा सेल खदान में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के नेतृत्व में स्थानीय बेरोजगारों की बहाली को लेकर अनिश्चितकालीन चक्का जाम शुरू हो गया है. आंदोलनकारियों ने खदान उत्पादन और डिस्पैच कार्य ठप कर दिया. प्रशासन और सीआईएसएफ के जवान मौके पर तैनात हैं, जबकि ग्रामीण रोजगार की मांग पर अड़े हुए हैं. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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गुवा से संदीप गुप्ता की रिपोर्ट

West Singhbhum News: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले स्थित गुवा सेल खदान में स्थानीय बेरोजगारों की बहाली की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन शुरू हो गया है. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के नेतृत्व में 12 गांव के मुंडा-मानकी संघ ने अनिश्चितकालीन चक्का जाम शुरू कर दिया है. आंदोलन के कारण गुवा सेल खदान का उत्पादन पूरी तरह प्रभावित हो गया है. आंदोलनकारियों की मांग है कि खदान क्षेत्र में स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया जाए. उनका कहना है कि लंबे समय से क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं की अनदेखी की जा रही है, जबकि खदान से सबसे अधिक प्रभावित स्थानीय लोग ही हैं.

खदान क्षेत्र का उत्पादन हुआ प्रभावित

आंदोलन के चलते गुवा सेल खदान में खनन कार्य पूरी तरह ठप पड़ गया है. प्रदर्शनकारियों ने साइज स्क्रीन और पहाड़ के ऊपर स्थित क्रॉसिंग प्लांट को बंद करा दिया है. इसके कारण खदान से जुड़ी उत्पादन प्रक्रिया बाधित हो गई है. इतना ही नहीं, सेल रेलवे बंकर स्थित डिस्पैच कार्य को भी रोक दिया गया है. इससे लौह अयस्क की ढुलाई और सप्लाई प्रभावित हो रही है. अधिकारियों के अनुसार, यदि आंदोलन लंबे समय तक जारी रहा तो उत्पादन और राजस्व पर बड़ा असर पड़ सकता है.

कर्मचारियों की बसों को भी रोका गया

आंदोलन का असर सोमवार सुबह से ही देखने को मिला. सुबह चार बजे प्रथम पाली में खदान क्षेत्र जाने वाली बसों को आंदोलनकारियों ने रोक दिया. इसके कारण बड़ी संख्या में सेल कर्मी अपने कार्यस्थल तक नहीं पहुंच सके. बसों के रुकने से खदान के अंदर नियमित कामकाज भी प्रभावित हुआ. आंदोलनकारियों ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक किसी भी गतिविधि को सामान्य रूप से चलने नहीं दिया जाएगा.

आंदोलन स्थल पर प्रशासन और सीआईएसएफ तैनात

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गुवा प्रशासन और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी सीआईएसएफ के जवानों को आंदोलन स्थल पर तैनात किया गया है. प्रशासन लगातार पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो. पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी आंदोलनकारियों से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि फिलहाल आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं.

बड़ी संख्या में ग्रामीण हुए शामिल

इस आंदोलन में सारंडा पीढ़ मानकी सुरेश चाम्पिया, मुंडा सोंगा सुरीन सहित विभिन्न गांवों के मुंडा-मानकी और ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हैं. आंदोलनकारियों का कहना है कि क्षेत्र के युवाओं को रोजगार देना कंपनी और प्रशासन की जिम्मेदारी है. ग्रामीणों का आरोप है कि बाहरी लोगों को रोजगार दिया जा रहा है, जबकि स्थानीय बेरोजगारों को नजरअंदाज किया जा रहा है. इसी कारण अब उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है.

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मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक 500 स्थानीय बेरोजगारों की बहाली नहीं की जाती, तब तक चक्का जाम और आंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि यह लड़ाई स्थानीय अधिकार और रोजगार के लिए है. पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने भी आंदोलनकारियों का समर्थन करते हुए कहा कि स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता मिलनी चाहिए. फिलहाल पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है और प्रशासन लगातार हालात पर नजर रखे हुए है.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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