पश्चिमी सिंहभूम में राजाबुरु माइंस बंद कर 18 गांव के मुंडा-मानकी का प्रदर्शन, स्थानीय लोगों ने की रोजगार की मांग

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :09 May 2026 4:01 PM (IST)
विज्ञापन
West Singhbhum News

राजाबुरु माइंस में प्रदर्शन करते 18 गांवों के मुंडा-मानकी. फोटो: प्रभात खबर

West Singhbhum News: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम के गुवा क्षेत्र में सारंडा विकास समिति के नेतृत्व में 18 गांवों के मुंडा-मानकी और ग्रामीणों ने स्थानीय रोजगार की मांग को लेकर रांजाबुरु माइंस बंद कर प्रदर्शन किया. ग्रामीणों ने सेल प्रबंधन पर समझौते के उल्लंघन और बाहरी लोगों को काम देने का आरोप लगाया. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

विज्ञापन

गुवा से संदीप गुप्ता की रिपोर्ट

West Singhbhum News: सारंडा विकास समिति के बैनर तले शनिवार को 18 गांवों के मुंडा-मानकी और ग्रामीणों ने सेल के राजाबुरु माइंस को बंद कर जोरदार प्रदर्शन किया. स्थानीय रोजगार की मांग को लेकर ग्रामीण सुबह से ही माइंस क्षेत्र में जुट गये और कामकाज पूरी तरह ठप कर दिया. आंदोलन के कारण खनन कार्य प्रभावित रहा, वहीं माइंस क्षेत्र में वाहनों का परिचालन भी बाधित हुआ. बड़ी संख्या में ग्रामीण माइंस परिसर के बाहर धरने पर बैठे रहे और स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग करते रहे.

समझौते के उल्लंघन का लगाया आरोप

प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पूर्व में 13 दिनों तक चले आंदोलन के बाद सेल प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच जो समझौता हुआ था, उसका पालन नहीं किया जा रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि वार्ता के दौरान स्पष्ट रूप से यह तय किया गया था कि रांजाबुरु माइंस में कार्यरत मजदूरों और कर्मियों की बहाली गुवा और आसपास के स्थानीय गांवों से की जाएगी. ग्रामीणों ने कहा कि समझौते के बावजूद स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं दिया जा रहा है, जिससे लोगों में भारी नाराजगी है. आंदोलनकारियों ने इसे ग्रामीणों के साथ धोखा और समझौते का खुला उल्लंघन बताया.

बाहरी लोगों को काम देने का विरोध

ग्रामीणों ने संबंधित ठेकेदार मां सरला पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि माइंस में ड्राइवर, खलासी, झंडा दिखाने वाले कर्मी और अन्य मजदूरों को बाहरी क्षेत्रों से लाकर काम कराया जा रहा है. इससे क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सारंडा और आसपास के गांवों के युवक लंबे समय से रोजगार की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है. ग्रामीणों ने कहा कि जब क्षेत्र की जमीन और संसाधनों का उपयोग यहां की खनन परियोजनाओं के लिए किया जा रहा है, तो रोजगार में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए.

प्रशासन और ग्रामीणों के बीच हुई वार्ता

आंदोलन की सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारियों से बातचीत की. अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याओं को सुना और मामले के समाधान का आश्वासन दिया. वहीं झारखंड के परिवहन मंत्री के पीए ने भी ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी मांगों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने की बात कही. काफी देर तक चली वार्ता के बाद ग्रामीणों ने फिलहाल आंदोलन को कुछ समय के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया. हालांकि उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि जल्द ही स्थानीय लोगों को रोजगार देने की दिशा में ठोस पहल नहीं की गयी, तो आंदोलन को और उग्र रूप में दोबारा शुरू किया जाएगा.

इसे भी पढ़ें: सरायकेला में राष्ट्रीय लोक अदालत में 7730 मामलों का निष्पादन, 1.14 करोड़ के राजस्व की वसूली

क्षेत्र में बढ़ रहा युवाओं का आक्रोश

रांजाबुरु माइंस को लेकर स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों में लगातार नाराजगी बढ़ रही है. ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है. इससे लोगों का भरोसा टूटता जा रहा है. ग्रामीणों ने कहा कि रोजगार उनका अधिकार है और इसके लिए वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखेंगे. क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होने की संभावना जतायी जा रही है.

इसे भी पढ़ें: ललपनिया के ‘लाल’ का भारतीय वन सेवा में चयन, ऑल इंडिया में 22वां रैंक

विज्ञापन
KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola