बड़ा जामदा फुटबॉल मैदान में जमीन विवाद को लेकर तनाव, मामला पहुंचा थाना

जमीन विवाद पर पंचायत. फोटो: प्रभात खबर
West Singhbhum News: पश्चिमी सिंहभूम के बड़ा जामदा फुटबॉल मैदान के पास जमीन विवाद को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए. हो आदिवासी समाज ने जमीन को श्मशान घाट बताया, जबकि दूसरे पक्ष ने उसे पुश्तैनी संपत्ति होने का दावा किया. मामला थाना पहुंचने के बाद पुलिस ने शांति बनाए रखने की अपील की. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
गुवा से संदीप गुप्ता की रिपोर्ट
West Singhbhum News: पश्चिमी सिंहभूम जिले के बड़ा जामदा फुटबॉल मैदान के समीप जमीन विवाद को लेकर शुक्रवार को तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई. विवाद बढ़ने के बाद दोनों पक्ष अपनी शिकायत लेकर बड़ाजामदा थाना पहुंचे. मामले को लेकर इलाके में काफी देर तक चर्चा और हलचल बनी रही. घटना के संबंध में एक पक्ष की ओर से हो आदिवासी समाज के लोगों ने दावा किया कि विवादित जमीन का उपयोग पिछले चार पीढ़ियों से श्मशान घाट के रूप में किया जाता रहा है. उनका कहना है कि यहां समुदाय के लोगों के शव दफनाए जाते हैं और यह जमीन सामाजिक एवं धार्मिक आस्था से जुड़ी हुई है.
बुलडोजर से सफाई करने का विरोध
हो आदिवासी समाज के लोगों का आरोप है कि दूसरे पक्ष की ओर से बुलडोजर चलाकर जमीन की साफ-सफाई की जा रही थी. साथ ही उस जमीन को निजी संपत्ति बताते हुए वहां निर्माण की तैयारी की जा रही थी. इसे लेकर स्थानीय लोगों ने विरोध जताया. ग्रामीणों के अनुसार जब जमीन की सफाई का कार्य शुरू हुआ तो बड़ी संख्या में महिलाएं और ग्रामीण मौके पर पहुंच गए. उन्होंने निर्माण कार्य का विरोध करते हुए जमीन को श्मशान घाट की भूमि बताया. इस दौरान दोनों पक्षों के बीच बहस भी हुई, जिसके बाद मामला थाने तक पहुंच गया.
दूसरे पक्ष ने बताया पुश्तैनी जमीन
दूसरे पक्ष की ओर से मनोज वर्मा ने दावा किया कि विवादित भूमि कुल एक एकड़ 19 डिसमिल है और यह उनके पूर्वजों की पुश्तैनी जमीन है. उन्होंने कहा कि वर्ष 1976 में इस जमीन की विधिवत रजिस्ट्री कराई गई थी और तब से लगातार मालगुजारी टैक्स भी जमा किया जा रहा है. मनोज वर्मा के मुताबिक जमीन से जुड़े सभी वैध दस्तावेज, रजिस्ट्री कागजात और टैक्स रसीदें उनके पास मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि जमीन की बंदोबस्ती के लिए मापी कराई गई थी. इसके बाद जमीन की साफ-सफाई कर बाउंड्री वॉल निर्माण की तैयारी की जा रही थी.
ग्रामसभा के जरिए जमीन छीनने का आरोप
मनोज वर्मा ने आरोप लगाया कि हो आदिवासी समाज के लोगों ने बड़ाजामदा मुखिया दिगंबर चातोम्बा की अध्यक्षता में ग्रामसभा आयोजित कर उनकी जमीन छीनने का प्रयास किया है. उन्होंने कहा कि वे किसी भी परिस्थिति में अपनी पुश्तैनी जमीन नहीं छोड़ेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे और कानूनी तरीके से अपने अधिकार की लड़ाई लड़ेंगे. उनके अनुसार बिना किसी वैध दस्तावेज के जमीन पर दावा करना उचित नहीं है.
पुलिस ने दोनों पक्षों को दी शांति बनाए रखने की सलाह
मामले की जानकारी मिलने के बाद बड़ाजामदा थाना पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने बुलाकर उनकी बातें सुनीं. पुलिस ने प्राथमिक जांच के बाद इसे राजस्व विभाग से जुड़ा विवाद बताया. थाना पुलिस ने दोनों पक्षों को अंचल अधिकारी के समक्ष लिखित आवेदन देने की सलाह दी. साथ ही किसी भी प्रकार की मारपीट या तनावपूर्ण स्थिति नहीं बनाने की अपील की. पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि मामले का समाधान प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही किया जाएगा.
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इलाके में बनी हुई है चर्चा
घटना के बाद बड़ा जामदा क्षेत्र में जमीन विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है. स्थानीय लोग मामले को संवेदनशील मान रहे हैं क्योंकि यह एक ओर पुश्तैनी जमीन का दावा है तो दूसरी ओर आदिवासी समाज की धार्मिक और सामाजिक आस्था से जुड़ा मुद्दा बताया जा रहा है. फिलहाल पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाकर शांत कराया और वापस घर भेज दिया. अब सभी की नजर प्रशासन और राजस्व विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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