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केलाघाघ में मिला नया ट्रैकिंग रूट

Updated at : 12 Dec 2025 10:01 PM (IST)
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केलाघाघ में मिला नया ट्रैकिंग रूट

उपायुक्त के नेतृत्व में अधिकारियों ने किया ट्रैकिंग, क्षेत्र को पर्यटन हब बनाने की तैयारी तेज

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सिमडेगा. पर्यटन को सशक्त बनाने व सैलानियों को आकर्षित करने के उद्देश्य से सिमडेगा जिला प्रशासन ने केलाघाघ पर्यटन क्षेत्र में नये ट्रैकिंग रूट की खोज की है. प्राकृतिक सुंदरता से घिरे इलाके में पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए उपायुक्त कंचन सिंह के नेतृत्व में शुक्रवार को एक विशेष ट्रैकिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया. ट्रैकिंग रूट केलाघाघ डैम से शुरू होकर बड़ाबरपानी पंचायत के चिमटीघाट गांव तक निर्धारित किया गया. गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने सभी पदाधिकारियों का पारंपरिक स्वागत किया और पुष्पगुच्छ भेंट किये. दल में पुलिस अधीक्षक एम. अर्शी, वन प्रमंडल पदाधिकारी शशांक शेखर सिंह, परियोजना निदेशक आइटीडीए सरोज तिर्की, अपर समाहर्ता श्री ज्ञानेंद्र समेत विभिन्न विभागों के कई वरीय अधिकारी व कर्मचारी शामिल थे. मौके पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाया गया, जिसमें ग्रामीणों का परीक्षण कर आवश्यक दवाइयां उपलब्ध करायी गयीं.

प्राकृतिक सुंदरता ने अधिकारियों को किया मंत्रमुग्ध

करीब 15 से 16 परिवारों वाले इस गांव तक की यात्रा में पहाड़, घने जंगल, नदी-नाले और डैम की अनोखी प्राकृतिक सुंदरता ने सभी अधिकारियों को मंत्रमुग्ध कर दिया. गांव पहुंच कर उपायुक्त ने पूरे क्षेत्र का भ्रमण किया और इसे पर्यटन विकास के लिए अत्यंत उपयुक्त बताया. उन्होंने निर्देश दिया कि ऐसा विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जाये, जिससे ट्रैकिंग करने वाले पर्यटक आसानी से गांव तक पहुंच सकें और यहां की प्राकृतिक व सांस्कृतिक विशेषताओं का अनुभव कर सकें. साथ ही पर्यटकों के ठहरने के लिए आवश्यक स्थानीय सुविधाओं के विकास पर जोर दिया गया.

बुजुर्गों के बीच कंबल बांटा, जाना हाल-चाल

उपायुक्त ने गांव में बुजुर्गों के बीच कंबल वितरण कर उनका हाल-चाल जाना और ग्रामीणों से जीवन-यापन की समस्याओं पर संवाद किया. उन्होंने कहा कि जिला मुख्यालय से मात्र पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह गांव अभी भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. पहाड़ और डैम के कारण ग्रामीण पगडंडियों व नौका के माध्यम से ही स्वास्थ्य सेवाओं, राशन और दैनिक जरूरतों के लिए शहर पहुंच पाते हैं. आपातकालीन स्थिति में मरीजों को नाव से नदी पार कराना अत्यंत कठिन व जोखिमपूर्ण है. उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए नये मार्ग की खोज और निर्माण को प्राथमिकता दी जाये, जिससे ग्रामीणों के आवागमन में सुगमता लायी जा सके. ट्रैकिंग के दौरान उपायुक्त और अन्य अधिकारियों ने स्थानीय झुनको टोली द्वारा निर्मित नाव में वोटिंग का अनुभव लिया और ग्रामीणों की समस्याओं को संवेदनशीलता से सुना.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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