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संस्कृत से हम संस्कृति, दर्शन और जीवन मूल्यों से जुड़ते हैं : प्राचार्य

Updated at : 08 Aug 2025 10:10 PM (IST)
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संस्कृत से हम संस्कृति, दर्शन और जीवन मूल्यों से जुड़ते हैं : प्राचार्य

सिमडेगा महाविद्यालय में संस्कृत दिवस समारोह आयोजित

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सिमडेगा. सिमडेगा महाविद्यालय में शुक्रवार को संस्कृत दिवस समारोह आयोजित किया गया. मुख्य अतिथि के रूप में प्राचार्य प्रो देवराज प्रसाद उपस्थित थे. अध्यक्षता संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ जितेश पासवान ने की. कार्यक्रम का आरंभ वैदिक मंत्रोच्चारण व दीप प्रज्वलन के साथ हुआ. इसके बाद वैदिक मंत्रों के साथ मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया, जिससे संपूर्ण वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ. समारोह में विद्यार्थियों ने श्लोक वाचन, संस्कृत गीत, भजन, भाषण, नाट्य प्रस्तुति व प्रश्नोत्तरी जैसी विविध प्रस्तुतियां पेश की गयीं. संस्कृत नाटक कालीदास विशेष आकर्षण का केंद्र रहा. अंजना डुंगडुंग ने संस्कृत दिवस व संस्कृत के महत्ता पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम में शंखनाद, रक्षा सूत्र बंधन, संकटास्तुति एवं एक भोजपुरी भजन ओमदास द्वारा प्रस्तुत किया गया. प्रथम समसत्र के छात्रों ने गायत्री मंत्र प्रस्तुत किया. रानी व राधिका ने संस्कृत गीत पर नृत्य प्रस्तुत किये. एकल नृत्य अंजीरा ने किया. दुर्गा कुमारी ने भी मंत्र पाठ किया. शिव स्तुति और महामृत्युंजय मंत्र रानी व राधिका ने प्रस्तुत किया. मोनिका व आसिमा ने भी नृत्य प्रस्तुत किया. कार्यक्रम में पूर्ववर्ती छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया. पूर्ववर्ती छात्रों में आकाश कुमार, रिया कुमारी, रुक्मणि कुमारी, नोमिता और रिलेन सुरिन समेत पूर्ववर्ती छात्र-छात्राओं को श्रीमद्भगवत गीता उपहार स्वरूप दिया गया. उन्होंने अपने उदगार व्यक्त किये. मुख्य अतिथि प्रो देवराज प्रसाद ने संस्कृत के गौरवशाली इतिहास, वैज्ञानिक स्वरूप एवं वर्तमान में इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कृत भारतीयता का मूल है. इसके माध्यम से हम अपनी संस्कृति, दर्शन और जीवन मूल्यों से जुड़ते हैं. संस्कृत भाषा केवल प्राचीन भारत की धरोहर नहीं है, बल्कि आज भी इसकी प्रासंगिकता उतनी ही महत्वपूर्ण है. यह भाषा हमें हमारी जड़ों से जोड़ती है और जीवन मूल्यों को मजबूती प्रदान करती है. विभागाध्यक्ष डॉ जितेश पासवान ने संस्कृत भाषा के विविध आयामों को रेखांकित करते हुए इसके आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में समावेशन की आवश्यकता पर बल दिया. कहा कि संस्कृत न केवल धर्म और दर्शन की भाषा है, बल्कि यह न्याय, गणित, खगोल, व्याकरण, साहित्य और भाषा विज्ञान का आधार भी है. समारोह में प्राध्यापक डॉ तिरियो एक्का, डॉ ब्रजेश प्रियदर्शी, प्रो विद्याशंकर कुमार, डॉ रोशन शांति नंदन टेटे, डॉ अनमोल लाल, प्रो रीमा सुप्रिया कुजूर, डॉ अतेंद्र कुमार, प्रो बिशेश्वर मुंडा, प्रो संजय कुमार, प्रो अनूप रंजन टोप्पो, प्रो मुरली मनोहर बंडो, प्रो राजेंद्र बड़ाइक, प्रो प्रदीप लोहरा, प्रो संज्योति लकड़ा, प्रो चेतन सिंह मुण्डा, डॉ स्मिता कुमारी, डॉ रिंकी कुमारी, प्रो बूटन महली आदि उपस्थित थे. धन्यवाद ज्ञापन डॉ जितेश पासवान व मंच संचालन दुर्गा कुमारी और रानी कुमारी ने किया.

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