बंगाल में ‘महाभारत’ : ममता बनर्जी बनाम चुनाव आयोग, 24 घंटे के आरोप-प्रत्यारोप

ममता बनर्जी और ज्ञानेश कुमार.
Mahabharata in Bengal: पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग बनाम ममता बनर्जी की जंग दिसंबर 2025 से ही छिड़ी हुई है. तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी वोटर लिस्ट से मतदाताओं के नाम काटे जाने के बाद से भाजपा और चुनाव आयोग पर हमलावर हैं. पिछले 24 घंटे के दौरान ममता बनर्जी ने आयोग पर कई गंभीर आरोप लगाये, तो सीईसी ने संजीदगी से एक-एक आरोपों का जवाब दिया.
जरूरी बातें
Mahabharata in Bengal: विधानसभा चुनाव 2026 से पहले पश्चिम बंगाल एक अखाड़े में तब्दील हो गया है, जहां पिछले 15 सालों से सरकार चला रही तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी हर दिन चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर हमला बोल रहे हैं. इन दिनों चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार तृणमूल कांग्रेस के निशाने पर हैं. खासकर पिछले 24 घंटे के दौरान ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी से लेकर चंद्रिमा भट्टाचार्य और अन्य टीएमसी नेताओं ने सीईसी पर कई गंभीर आरोप लगाये.
इन मुद्दों पर ममता बनर्जी ने बोला हमला
बंगाल विधानसभा 2026 की तैयारियों की समीक्षा के लिए 2 दिन के दौरे पर कोलकाता आये चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार पर बंगाल की चीफ मिनिस्टर ममता बनर्जी ने लगातार हमला बोला. महज 24 घंटे के भीतर अधिकारियों के सम्मान, वोटर लिस्ट (SIR), चुनावी हिंसा और संवैधानिक मर्यादा के मुद्दे पर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने आयोग और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा, तो चुनाव आयोग ने मंगलवार को इन सभी बिंदुओं पर अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जवाब दिया.
अधिकारियों को सम्मान का मुद्दा
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने पश्चिम बंगाल के अफसरों को धमकी दी. ममता बनर्जी ने सोमवार को धर्मतला के मेट्रो चैनल पर धरनास्थल से कहा कि आयोग का यह दुस्साहस है, जिसे स्वीकार नहीं किया जायेगा. चुनाव आयोग ने मंगलवार को कहा कि आयोग का उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करना है. इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी.
वोटर लिस्ट को राजनीतिक हथियार बनाने का आरोप
वोटर लिस्ट और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के मुद्दे पर ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाना राजनीतिक हथियार है. लाखों लोगों को उनके अधिकार से वंचित किया जा रहा है. इस आरोप के जवाब में आयोग ने लोगों को आश्वस्त किया है कि किसी भी योग्य वोटर का नाम लिस्ट से नहीं हटाया जायेगा. साथ ही कहा कि कोई अवैध वोटर मतदाता सूची में नहीं रहेगा. आयोग ने कहा कि उसका उद्देश्य केवल विसंगतियों को दूर करना है.
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चुनावी हिंसा के आरोपों का जवाब 100 फीसदी वेबकास्टिंग
चुनावी हिंसा को भी ममता बनर्जी ने मुद्दा बनाया. कहा कि वोटर को भाजपा डरा-धमकाकर भाजपा सत्ता हासिल करना चाहती है. जनता इसका जवाब देगी. वोटर को डराने-धमकाने के मुद्दे पर चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार ने कहा कि 100 फीसदी बूथ पर वेबकास्टिंग होगी. बंगाल में इस बार स्वतंत्र और शांतिपूर्ण चुनाव कराना चुनाव आयोग की गारंटी है.
संवैधानिक मर्यादा की ECI को दिलायी याद, तो मिला जवाब
संवैधानिक मर्यादा की भी चुनाव आयोग को याद दिलायी गयी. वेस्ट बंगाल की चीफ मिनिस्टर ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि दिल्ली के अधिकारी पश्चिम बंगाल की नौकरशाही पर दबाव बना रहे हैं. इसके जवाब में ज्ञानेश कुमार ने कहा कि आयोग संवैधानिक दायरे में रहकर काम कर रहा है. सभी को समान अवसर देगा.
चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने वाली 3 बातें
इस पूरे टकराव में 3 मुख्य बातें उभरकर सामने आ रही हैं, जो चुनाव के नतीजों को प्रभावित कर सकती हैं.
- महिला वोटर और ‘पहचान’ का मुद्दा : ममता बनर्जी SIR की प्रक्रिया को ‘बंगाल की अस्मिता’ और ‘पहचान की लड़ाई’ से जोड़ रही हैं. बादुरिया की आत्महत्या जैसी घटनाओं को वे भावनात्मक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही हैं, ताकि महिला वोटर्स के बीच संदेश जाये कि उनकी सरकार ही उनकी रक्षक है.
- चुनाव आयोग का ‘टेक्नोलॉजी कार्ड’ : चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार ने 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग का दांव चलकर पश्चिम बंगाल पुलिस और प्रशासन की भूमिका को सीमित करने के संकेत दिये हैं. यह भाजपा की उस पुरानी मांग का जवाब है, जिसमें वे हर बूथ पर केंद्रीय बलों की तैनाती और कड़ी निगरानी की बात करते रहे हैं.
- सुप्रीम कोर्ट की ढाल : चुनाव आयोग अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर काम कर रहा है. कोर्ट द्वारा नियुक्त 250 न्यायिक अधिकारियों (जजों) की मौजूदगी ने ममता बनर्जी सरकार के ‘प्रशासनिक दबाव’ वाले आरोपों को कमजोर कर दिया है, क्योंकि अब फैसला अधिकारियों के नहीं, जजों के हाथ में है.
24 घंटे : ममता बनर्जी बनाम चुनाव आयोग
| मुद्दा | ममता बनर्जी का आरोप/पक्ष | चुनाव आयोग (CEC) का जवाब/स्टैंड |
|---|---|---|
| अधिकारियों का सम्मान | CEC ने हमारे अफसरों को धमकाया. यह उनका दुस्साहस है, जो स्वीकार्य नहीं है. | हमारा उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करना है. किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी. |
| वोटर लिस्ट (SIR) | नाम हटाना एक राजनीतिक हथियार है. लाखों लोगों को मताधिकार से वंचित किया जा रहा है. | किसी भी पात्र (Eligible) मतदाता का नाम नहीं हटेगा. हम केवल विसंगतियों को दूर कर रहे हैं. |
| चुनावी हिंसा | भाजपा डरा-धमकाकर सत्ता हासिल करना चाहती है, जनता इसका जवाब देगी. | 100% बूथों पर वेबकास्टिंग होगी. बंगाल में इस बार स्वतंत्र और शांतिपूर्ण मतदान हमारी गारंटी है. |
| संवैधानिक मर्यादा | दिल्ली के अधिकारी राज्य की नौकरशाही पर दबाव बना रहे हैं. | आयोग संवैधानिक दायरे में रहकर काम कर रहा है और सभी को समान अवसर (Level Playing Field) देगा. |
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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