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हर दिन जारी हो सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट, नाम काटने के कारण बताये इलेक्शन कमीशन : टीएमसी

Updated at : 10 Mar 2026 6:35 AM (IST)
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TMC To ECI west bengal news

चुनाव आयोग की सर्वदलीय बैठक में तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल.

TMC To ECI: पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने ममता बनर्जी के धरना के बीच इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया को एसआईआर की प्रक्रिया की खामियों के बारे में बताया है. उसमें सुधार करने के लिए कहा है और कई मांगें भी रखीं हैं. टीएमसी ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के क्या-क्या कहा है, यहां पढ़ें.

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TMC To ECI: ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाये हैं. पार्टी का दावा है कि पिछले 4 महीनों में प्रक्रियागत खामियों, ड्राफ्ट रोल में गड़बड़ी और अंतिम मतदाता सूची में विसंगतियों के कारण लाखों मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हुआ है. पार्टी ने कहा है कि 63 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम काट दिये गये हैं, जबकि लगभग 60 लाख मामले अभी भी लंबित हैं.

17 बिंदुओं पर टीएमसी ने जतायी है आपत्तियां

  • अधिकारों का अवैध हस्तांतरण : ईआरओ (ERO) की कानूनी शक्तियों को जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को देना नियमों के खिलाफ है.
  • माइक्रो-ऑब्जर्वर्स का हस्तक्षेप : माइक्रो-ऑब्जर्वर्स को ईआरओ के फैसलों को बदलने का अवैध अधिकार दिया गया.
  • ईआरओ की शक्तियों पर रोक : पोर्टल पर ‘एक्शन’ का विकल्प बंद कर दिया गया, जिससे ईआरओ दस्तावेजों की जांच नहीं कर सके.
  • अनौपचारिक संचार : महत्वपूर्ण निर्देश व्हाट्सएप और मौखिक रूप से दिये गये, जो पारदर्शिता के विरुद्ध है.
  • अपारदर्शी पोर्टल बदलाव : पोर्टल पर श्रेणियों के नाम बिना बताये बदल दिये गये, जिससे हेरफेर की आशंका बढ़ी.
  • मान्य दस्तावेजों को नकारना : ईसीआई (ECI) के दिशा-निर्देशों के बावजूद सरकारी दस्तावेजों को अस्वीकार करने के मौखिक आदेश दिये गये.
  • अदालती आदेशों का उल्लंघन : आवास योजना (PMAY) जैसे कोर्ट द्वारा मान्य दस्तावेजों को भी स्वीकार नहीं किया गया.
  • लॉगिन आईडी का दुरुपयोग : अधिकारियों की लॉगिन आईडी का दूर बैठे अन्य स्थानों से गलत इस्तेमाल किया गया.
  • तकनीकी खामियां : ईसीआई-नेट (ECINet) पोर्टल पर तकनीकी गड़बड़ी के कारण दस्तावेज धुंधले या गायब हो गये.
  • अव्यावहारिक समयसीमा : हजारों दस्तावेजों की जांच के लिए केवल 5 दिन का समय दिया गया.
  • निजी एजेंसी का उपयोग : सर्वे के लिए निजी एजेंसी का इस्तेमाल डेटा गोपनीयता और तटस्थता पर सवाल उठाता है.
  • बिना प्रक्रिया के नाम काटना : अनुपस्थित या मृत बताकर बिना सत्यापन के बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाये गये.
  • नामों की त्रुटि पर उत्पीड़न : उपनाम या स्पेलिंग की मामूली गलतियों के लिए लाखों लोगों को नोटिस भेजकर परेशान किया गया.
  • आधार कार्ड पर दोहरे मापदंड : आधार को पहचान के रूप में स्वीकार करने के लिए बंगाल के लिए अलग और कठिन नियम बनाये गये.
  • सांख्यिकीय विसंगति : प्राप्त आपत्तियों (Form-7) से 13 गुना अधिक नाम (63 लाख+) काट दिये गये.
  • लिंगानुपात में गिरावट : मतदाता सूची में महिलाओं का अनुपात अचानक कम होना (968 से 956) गड़बड़ी का संकेत है.
  • जनप्रतिनिधियों पर प्रभाव : राज्य के कैबिनेट मंत्री और कई विधायकों के नाम भी जांच के दायरे में डाल दिये गये या काट दिये गये.

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चुनाव आयोग से AITC की प्रमुख मांगें

  • ईआरओ (EROs) को उनकी पूरी कानूनी शक्तियां तुरंत वापस दी जायें.
  • व्हाट्सएप और मौखिक रूप से दिये गये सभी अनौपचारिक निर्देश रद्द हों.
  • 63 लाख से अधिक नाम काटने का स्पष्ट कारण और विवरण दिया जाये.
  • रिमोट लॉगिन और पोर्टल विफलताओं की स्वतंत्र ऑडिट (जांच) करायी जाये.
  • रोजाना सप्लीमेंट्री लिस्ट सार्वजनिक की जाये और नाम को अस्वीकार करने यानी डिलीट करने का लिखित कारण दिया जाये.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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