सरायकेला के पोड़ाडीह में प्रस्तावित एसपी ऑफिस का विरोध, ग्रामीणों ने उठाए सवाल

Updated at : 31 Mar 2026 7:21 PM (IST)
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Seraikela News

फोटो: बैठक के बाद विरोध प्रदर्शन करते लोग. फोटो: प्रभात खबर

Seraikela News: सरायकेला के पोड़ाडीह गांव में प्रस्तावित एसपी ऑफिस के निर्माण का ग्रामीणों ने विरोध किया. ग्रामीणों का कहना है कि बिना ग्रामसभा की अनुमति के निर्माण कार्य शुरू किया जा रहा है. इस जमीन का उपयोग गोचर भूमि और बच्चों के खेल मैदान के रूप में होता है, जिससे लोगों में नाराजगी है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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सरायकेला से प्रताप मिश्रा की रिपोर्ट

Seraikela News: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत बड़ाकांकड़ा पंचायत के पोड़ाडीह गांव में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. इस बैठक की अध्यक्षता गांधी सुरेन ने की, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए. बैठक का मुख्य मुद्दा पोड़ाडीह मौजा की सरकारी जमीन पर प्रस्तावित एसपी ऑफिस के निर्माण का विरोध था. ग्रामीणों ने एकजुट होकर इस फैसले पर अपनी नाराजगी जाहिर की.

ग्रामसभा की अनुमति के बिना निर्माण पर आपत्ति

ग्रामीणों का कहना है कि जिला प्रशासन की ओर से इस निर्माण कार्य से पहले ग्रामसभा की सहमति नहीं ली गई. बिना स्थानीय लोगों की अनुमति के सरकारी भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिसे ग्रामीण गलत ठहरा रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट कहा कि ग्रामसभा की मंजूरी के बिना किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य स्वीकार्य नहीं होगा.

गोचर भूमि और खेल मैदान खत्म होने की चिंता

ग्रामीणों ने बताया कि जिस जमीन पर एसपी ऑफिस बनाने की योजना है, वह गांव की एकमात्र खाली सरकारी जमीन है. इस जमीन का उपयोग गांव के बच्चे खेल के मैदान के रूप में करते हैं. साथ ही यह जमीन पशुओं के लिए गोचर भूमि के रूप में भी इस्तेमाल होती है. यदि यहां निर्माण हो जाता है, तो न केवल बच्चों के खेल का स्थान खत्म हो जाएगा, बल्कि पशुधन के लिए भी चराई की समस्या उत्पन्न हो जाएगी.

पहले से सीमित हो चुकी है जमीन

ग्रामीणों ने जानकारी दी कि कुल लगभग 4 एकड़ जमीन में से पहले ही एक हिस्से में महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान का भवन बनाया जा चुका है, जहां पहले केंद्रीय विद्यालय संचालित होता था. अब लगभग 3 एकड़ जमीन ही बची है, जिसका उपयोग ग्रामीण सार्वजनिक कार्यों और अन्य जरूरतों के लिए करते हैं. ऐसे में इस बचे हुए हिस्से पर भी निर्माण होने से गांव की समस्याएं और बढ़ जाएंगी.

पहले भी हो चुका है विरोध प्रदर्शन

यह पहला मौका नहीं है जब इस जमीन को लेकर विवाद सामने आया है. ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2021 में भी जिला प्रशासन द्वारा बिना ग्रामसभा की अनुमति के यहां होमगार्ड आवासीय कार्यालय बनाने की कोशिश की गई थी. उस समय भी ग्रामीणों ने जोरदार विरोध किया था और सरायकेला अंचलाधिकारी को आवेदन देकर निर्माण पर रोक लगाने की मांग की थी.

ग्रामीणों ने दोहराया विरोध, प्रशासन से की मांग

पांच साल बाद एक बार फिर उसी जमीन पर सरकारी भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने से ग्रामीणों में आक्रोश है. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जब तक ग्रामसभा की सहमति नहीं ली जाएगी, तब तक वे निर्माण कार्य का विरोध करते रहेंगे. इस विरोध प्रदर्शन में हीरालाल गोप, संजय सुरेन, टुकलू सुरेन, सुदर्शन सुरेन, सोमा सुरेन, राम हाईबुरु, वीरू सुरेन, चांदमनी सुरेन, जेमा सुरेन, सुसारी महतो और जानो महतो समेत कई ग्रामीण महिला-पुरुष मौजूद रहे.

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शांति पूर्ण तरीके से उठाई आवाज

ग्रामीणों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को रखा और प्रशासन से संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की. उनका कहना है कि विकास कार्य जरूरी है, लेकिन स्थानीय जरूरतों और लोगों की सहमति को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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