सरायकेला के मॉडल महाविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली 2020 पर सेमिनार

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 20 May 2026 8:36 PM

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सरायकेला-खरसावां के मॉडल महाविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली 2020 के विषय में सेमिनार में उपस्थित अतिथि फोटो: प्रभात खबर

Seraikela News: सरायकेला के मॉडल महाविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर सेमिनार आयोजित हुआ. वक्ताओं ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, कौशल आधारित शिक्षा और भारतीय शिक्षा पद्धति की विशेषताओं पर विस्तार से चर्चा की. कार्यक्रम में शिक्षकों, छात्रों और शिक्षा विशेषज्ञों ने भाग लिया. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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सरायकेला से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट

Seraikela News: सरायकेला-खरसावां स्थित मॉडल महाविद्यालय परिसर में बुधवार को ‘राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली 2020’ विषय पर एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विनय कुमार सिंह ने की. सेमिनार में शिक्षा नीति, भारतीय शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विस्तार से चर्चा हुई. कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलित कर किया गया. इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षक, गैर-शैक्षणिक कर्मचारी, छात्र-छात्राएं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे.

एनईपी 2020 छात्रों के सर्वांगीण विकास की नीति

सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में पहुंचे कोल्हान यूनिवर्सिटी के सिंडिकेट सदस्य एवं एनआईटी जमशेदपुर के मेटलर्जी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ रणजीत प्रसाद ने ‘एनईपी 2020 : विद्यार्थियों का सम्पूर्ण व्यक्तित्व विकास’ विषय पर व्याख्यान दिया. उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य केवल छात्रों को किताबी ज्ञान देना नहीं है, बल्कि उनके मानसिक, व्यावहारिक और सर्वांगीण व्यक्तित्व को विकसित करना है. उन्होंने 1968 और 1986 की पूर्ववर्ती शिक्षा नीतियों की उपलब्धियों और उनकी सीमाओं पर भी विस्तार से चर्चा की. डॉ रणजीत प्रसाद ने कहा कि एनईपी 2020 के तहत छात्रों को अपनी रुचि के अनुसार विषय चुनने की अभूतपूर्व स्वतंत्रता दी गई है. इससे छात्रों की छिपी प्रतिभा सामने आएगी और उन्हें अपने करियर के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे.

कौशल आधारित शिक्षा अपनाने पर दिया जोर

मुख्य वक्ता ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि आज के दौर में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है. विद्यार्थियों को रोजगारपरक और कौशल आधारित शिक्षा अपनानी होगी. उन्होंने छात्रों को तकनीकी दक्षता, नवाचार और व्यावहारिक शिक्षा पर ध्यान देने की सलाह दी. उनके अनुसार नई शिक्षा नीति युवाओं को आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर बोले सोनू ठाकुर

कोल्हान यूनिवर्सिटी के सिंडिकेट सदस्य सोनू ठाकुर ने भारत की प्राचीन और गौरवशाली शिक्षा पद्धति पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि भारत की गुरुकुल प्रणाली केवल पुस्तक आधारित शिक्षा नहीं थी, बल्कि विद्यार्थियों के बौद्धिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास का केंद्र थी. उन्होंने कहा कि गुरुकुलों में विद्यार्थियों को निःशुल्क और जीवनोपयोगी शिक्षा दी जाती थी, जिससे उनका समग्र विकास होता था. उन्होंने आधुनिक शिक्षा व्यवस्था और पारंपरिक शिक्षा प्रणाली के अंतर को भी समझाया.

मैकाले की शिक्षा नीति पर उठाए सवाल

सोनू ठाकुर ने ब्रिटिश काल की शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि लॉर्ड मैकाले का उद्देश्य भारत को वैचारिक रूप से गुलाम बनाना था. उन्होंने आरोप लगाया कि मैकाले की शिक्षा नीति के जरिए भारतीयों को अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं से दूर करने का प्रयास किया गया. उन्होंने कहा कि गुरुकुल प्रणाली को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर कर एक ऐसी औपनिवेशिक शिक्षा व्यवस्था लागू की गई, जिसका उद्देश्य केवल क्लर्क तैयार करना था. उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय शिक्षा पद्धति के श्रेष्ठ मूल्यों को अपनाने की अपील की.

कॉलेज छात्रों के भविष्य निर्माण के लिए प्रतिबद्ध : प्राचार्य

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ विनय कुमार सिंह ने कहा कि संस्थान छात्रों की शैक्षणिक और व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रहा है. उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप कॉलेज पठन-पाठन को अधिक सुलभ, व्यावहारिक और रोजगारपरक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि संस्थान का उद्देश्य केवल पारंपरिक शिक्षा देना नहीं, बल्कि छात्रों को आधुनिक कौशल से लैस कर आत्मनिर्भर बनाना है. ताकि वे वैश्विक चुनौतियों का मजबूती से सामना कर सकें.

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राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन

सेमिनार में शिक्षक डॉ बीसी मुखी, अमित कुमार नाथ, नंद किशोर प्रसाद, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री दुर्गा बोदरा, सदस्य आलोक दास, वकील बारीक समेत बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे. अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ. सेमिनार को छात्रों और शिक्षकों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया गया.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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