नौकरी के नाम ठगी मामले पर बोले बीसीसीएल सीएमडी - बख्शे नहीं जाएंगे संलिप्त कर्मचारी

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 20 May 2026 6:01 PM

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बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल और इंदिरा देवी के दोनों बेटे और भतीजा को दिया गया नियुक्ति पत्र. फोटो: प्रभात खबर

Ranchi News: बीसीसीएल में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी मामले में सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा है कि गिरोह में शामिल किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा. फर्जी नियुक्ति पत्र, नकद लेन-देन और नौकरी के नाम पर ठगी को लेकर पुलिस जांच और विभागीय कार्रवाई तेज हो गई है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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डकरा से सुनील कुमार की रिपोर्ट

Ranchi News: बीसीसीएल में नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में अब कंपनी प्रबंधन भी सख्त नजर आ रहा है. बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने साफ कहा है कि यदि इस गिरोह में किसी बीसीसीएल कर्मी की संलिप्तता सामने आती है तो उसे किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने लोगों से अपील की है कि यदि किसी कर्मचारी की भूमिका की जानकारी हो तो उसे प्रबंधन तक पहुंचाएं. सीएमडी ने कहा कि उन्होंने इस मामले में प्रकाशित खबरों को पढ़ा है और पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई गई है. पुलिस अपना काम कर रही है, लेकिन यदि किसी बीसीसीएल कर्मी की संलिप्तता साबित होती है तो विभागीय स्तर पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी.

खबर छपने के बाद सक्रिय हुए गिरोह के सदस्य

इस मामले में एक नया मोड़ तब आया, जब प्रभात खबर में खबर प्रकाशित होने के बाद गिरोह से जुड़े लोग अचानक अपने-अपने उम्मीदवारों के संपर्क में आने लगे. बताया जा रहा है कि पिछले सात से आठ महीने से जिन लोगों ने उम्मीदवारों से संपर्क तोड़ रखा था, वे अब फोन कर स्थिति संभालने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि बातचीत पूरी तरह एकतरफा बताई जा रही है. पैसे लेने वाले लोग अपने हिसाब से मोबाइल पर बात कर फोन बंद कर दे रहे हैं. कई पीड़ितों का कहना है कि गिरोह के सदस्य अब मामले को शांत करने और समय लेने की कोशिश कर रहे हैं.

कैश लेने वालों पर बढ़ा दबाव

एक भुक्तभोगी ने बताया कि जिन लोगों ने नकद राशि ली थी, वे अब सबसे ज्यादा परेशान हैं. प्रभात खबर में लगातार नाम सामने आने के बाद गिरोह के लोग अपने उम्मीदवारों पर दबाव बना रहे हैं कि वे अखबार और उसकी वेबसाइट में खबर छपवाना बंद कराएं. पीड़ितों को यह भी कहा जा रहा है कि यदि मामला ज्यादा बढ़ा तो पैसे वापस नहीं मिलेंगे, क्योंकि अधिकांश लेन-देन नकद में हुआ है और उसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है. ऐसे में पुलिस भी कुछ नहीं कर पाएगी. हालांकि कई लोगों का मानना है कि गिरोह के सदस्य केवल समय बिताने और मामला ठंडा करने की रणनीति अपना रहे हैं. पीड़ितों को अब भी अपने पैसे वापस मिलने की उम्मीद कम नजर आ रही है.

अब नौकरी नहीं, पैसे लौटाने की बात

जो लोग अब तक बीसीसीएल में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर पैसे ले रहे थे, वे अब नौकरी की बात करने से बच रहे हैं. गिरोह से जुड़े लोग उम्मीदवारों को बता रहे हैं कि खबरें प्रकाशित होने के बाद “सेटिंग” खराब हो गई है और अब नौकरी नहीं हो पाएगी. सूत्रों के अनुसार, अब अधिकांश लोग पैसे वापस करने के लिए समय मांग रहे हैं. हालांकि पीड़ितों का कहना है कि अब तक किसी को पैसा वापस नहीं मिला है और केवल आश्वासन दिया जा रहा है.

जमीन और बैकलाग नौकरी का दिखाया सपना

पीड़ितों के अनुसार गिरोह के सदस्य लोगों को जमीन के बदले नौकरी, बैकलाग बहाली और झरिया रिहैबिलिटेशन योजना के नाम पर नौकरी दिलाने का सपना दिखाते थे. कई परिवारों ने अपने बच्चों के भविष्य की उम्मीद में लाखों रुपये तक दे दिए. बताया जा रहा है कि बेरोजगार युवाओं और उनके परिवारों को यह भरोसा दिलाया जाता था कि बीसीसीएल में अंदर तक उनकी पहुंच है और नौकरी आसानी से लग जाएगी. इसी भरोसे में लोग फंसते चले गए.

फर्जी नियुक्ति पत्र तक बांटे गए

मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि पैसे लेने के बाद गिरोह के लोग मेडिकल जांच, बायोमेट्रिक हस्ताक्षर और बीटीसी ट्रेनिंग तक कराने का नाटक करते थे. इसके बाद उम्मीदवारों को फर्जी नियुक्ति पत्र भी जारी किए गए. कई परिवारों ने अपने जीवनभर की जमा पूंजी बच्चों की नौकरी के भरोसे दे दी. अब वे लोग नियुक्ति मिलने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि धीरे-धीरे उन्हें ठगी का एहसास हो रहा है.

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पुलिस जांच और विभागीय कार्रवाई पर टिकी नजर

इस पूरे मामले में अब लोगों की नजर पुलिस जांच और बीसीसीएल प्रबंधन की कार्रवाई पर टिकी हुई है. पीड़ित चाहते हैं कि गिरोह में शामिल सभी लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए. सीएमडी के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि यदि किसी कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो कंपनी स्तर पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है. वहीं पीड़ित परिवार अब अपने पैसे वापस मिलने और दोषियों पर कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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