पिठोरिया में मंडा पूजा का शुभारंभ, 14 दिनों तक चलेगा आस्था का महापर्व
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 20 May 2026 6:34 PM
पिठोरिया की मंडा पूजा में शामिल श्रद्धालु. फोटो: प्रभात खबर
Ranchi News: रांची के पिठोरिया में 14 दिनों तक चलने वाले पारंपरिक मंडा पूजा महापर्व का शुभारंभ हो गया है. भगवान शिव की आराधना से जुड़े इस 200 साल पुराने पर्व में दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. सांस्कृतिक कार्यक्रम और झूलन आयोजन को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
पिठोरिया से सुजीत कुमार केशरी की रिपोर्ट
Ranchi News: झारखंड के रांची जिले के पिठोरिया में लोकआस्था और भगवान शिव की आराधना का प्रमुख पर्व मंडा पूजा बुधवार से शुरू हो गया. 14 दिनों तक चलने वाले इस पारंपरिक महापर्व को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह और भक्ति का माहौल बना हुआ है. गांव से लेकर आसपास के इलाकों तक श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है. यह पर्व ग्रामीण संस्कृति, परंपरा और लोकविश्वास का प्रतीक माना जाता है. हर वर्ष बड़ी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाए जाने वाले मंडा पूजा में हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं. पूजा के शुभारंभ के साथ ही पिठोरिया का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया है.
विधि-विधान से हुई कुलदेवी की पूजा
पर्व के तीसरे दिन पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पुजारी पाहन द्वारा कुलदेवी की पूजा-अर्चना की गई. पूजा के दौरान क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की गई. परंपरा के अनुसार इस अवसर पर मुर्गा की बलि भी दी गई. पूजा में बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु शामिल हुए. लोगों ने देवाधिदेव महादेव से परिवार और समाज की खुशहाली की प्रार्थना की. पारंपरिक वेशभूषा और धार्मिक अनुष्ठानों ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया.
28 और 29 मई को होंगे विशेष आयोजन
मंडा पूजा समिति की ओर से बताया गया कि इस वर्ष भी पर्व के दौरान कई सांस्कृतिक और पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. 28 मई को पूलकुंदी कार्यक्रम का आयोजन होगा, जिसमें सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी. इसके बाद 29 मई को पारंपरिक झूलन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. दोनों आयोजनों को लेकर समिति द्वारा व्यापक तैयारियां की जा रही हैं. आयोजन स्थल की सजावट, सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं.
दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु
पिठोरिया का मंडा पूजा केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के कई क्षेत्रों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. कांके, ठाकुरगांव, बुढ़मू, रातू समेत कई थाना क्षेत्रों से हजारों लोग मंडा पूजा देखने आते हैं. ग्रामीणों के अनुसार यह पर्व लोगों को अपनी संस्कृति और परंपरा से जोड़ने का काम करता है. हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है. मेले जैसा माहौल रहने के कारण स्थानीय व्यापारियों और दुकानदारों में भी उत्साह देखा जा रहा है.
200 साल पुराना है मंडा पूजा का इतिहास
पिठोरिया के लोहड़िया टोला में मंडा पूजा का इतिहास करीब 200 वर्ष पुराना बताया जाता है. स्थानीय लोगों के अनुसार नागवंशी महाराजा दृपनाथ शाहदेव द्वारा जयमंगल सिंह को पिठोरिया का फ्रंटियर गार्ड बनाए जाने के बाद इस पूजा की शुरुआत हुई थी. तब से लेकर आज तक यह पूजा लगातार आयोजित होती आ रही है. वर्षों पुरानी यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और नियमों के साथ निभाई जा रही है. मंडा पूजा को क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान भी माना जाता है.
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समिति युद्धस्तर पर कर रही तैयारी
मंडा पूजा समिति के अध्यक्ष जितेंद्र साहू, महामंत्री राम प्रसाद गोप और कोषाध्यक्ष विक्की अहीर की अगुवाई में आयोजन की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों के बीच अलग-अलग जिम्मेदारियां बांट दी गई हैं. समिति के अध्यक्ष जितेंद्र साहू ने बताया कि पर्व को शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में संपन्न कराना समिति की प्राथमिकता है. इसके लिए प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से सभी जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं. पूरे पिठोरिया क्षेत्र में इन दिनों मंडा पूजा को लेकर भक्ति, उत्साह और पारंपरिक संस्कृति की अनूठी झलक देखने को मिल रही है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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