याद किये गये प्रसिद्ध समालोचक शिव बालक राय
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 10 Jan 2025 9:46 PM
प्रगति भवन में मनायी गयी 109वीं जयंती, साहित्य प्रेमियों ने उनके योगदान पर डाला प्रकाश
साहिबगंज. हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध समालोचक आचार्य शिव बालक राय की 109वीं जयंती शुक्रवार को प्रगति भवन में मनाई गयी. इसमें आचार्य जी के शिष्यों, सहकर्मियों एवं साहित्य प्रेमियों ने भाग लिया. सभा की अध्यक्षता डॉ रामजन्म मिश्र कुलाधिपति, विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ भागलपुर सह प्रधान संपादक प्रगति वार्ता ने की. आचार्य शिव बालक राय की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित की गयी. डॉ सच्चिदानंद, सचिव झारखंड राजभाषा साहित्य अकादमी ने कहा कि आचार्य शिव बालक राय हिंदी आलोचना के शिखर पुरुष रहे हैं जो हजारी प्रसाद द्विवेदी, पंडित रामचंद्र शुक्ल की परंपरा के वर्ण्य आलोचकों में है. उन्होंने आदि कवि महर्षि वाल्मीकि और लोकमंगल के महाकवि गोस्वामी तुलसीदास के साहित्य पर आलोचनात्मक दृष्टि से गंभीर विवेचन किया है. वाल्मीकि के कवि कर्म और गोस्वामी तुलसीदास की भक्ति एवं श्रीराम के लोक मर्यादा का बड़ा सुंदर विवेचन किया है. रामजन्म मिश्र ने कहा कि आचार्य राय के व्यक्तित्व में वाल्मीकि, व्यास और कालिदास का त्रयी संघात उनके जीवन का सौंदर्य लौकिक होते हुए भी वे लोकोत्तर, स्थित प्रज्ञ और महायोगी थे. व्यक्ति मरता है और उसका व्यक्तित्व अमर होता है. डॉ रामजन्म मिश्र ने आचार्य जी के साहित्य की चर्चा करते हुए कहा कि समालोचना की पुस्तक ””””दिनकर”””” (1950) में प्रकाशित होने के बाद आचार्य जी की गिनती प्रसिद्ध समालोचकों में होने लगी. उनकी अन्य रचनाओं में ””””साहित्य के सिद्धांत और कुरुक्षेत्र,(1954) ””””काव्य में सौंदर्य उदात्त तत्व ””””(1968), ””””कालिदास के सौंदर्य सिद्धांत और मेघदूत”””” (1964) ””””वाल्मीकि रामायण एक काव्य अनुशीलन”””” (1979), ””””मानस का रूप विज्ञान और मौलिकता”””” (1996), ””””भक्तिकाल का सौंदर्य शास्त्र”””” और प्रतीकवाद मुख्य कृतियां हैं. साहित्यकार अनिरुद्ध प्रभाष ने कहा कि आचार्य राय ज्ञान के प्रतिमान प्रतीक थे. सहजता, सरलता एवं भक्ति भाव से लबरेज संत आचार्य से पढ़ने का अवसर किसी वरदान से कम नहीं है. आचार्य शिव बालक के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए गौरव रामेश्वरम ने कहा कि आचार्य राय साहिबगंज महाविद्यालय में 5 दिसंबर 1955 से जून 1976 तक साहिबगंज कॉलेज के प्राचार्य रहे. आचार्य जी के कार्यकाल में साहिबगंज कॉलेज साहित्य गतिविधियों का केंद्र था. महाविद्यालय की गिनती प्रतिष्ठित कॉलेजों में होती थी. राष्ट्रकवि दिनकर भी साहिबगंज कॉलेज आए थे. दिनकर जी ने अपनी डायरी में इसकी चर्चा की है. मुरारी प्रसाद सिंह ने कहा कि आचार्य शिव बालक राय हमारे गांव के आदर्श पुरुष थे. गांव के विद्या संस्थान में अपने ग्राम बंधुओं की गोष्ठी में अपने ज्ञान का व्याख्यान करते शिक्षा के महत्व को समझते थे. रामायण रामचरितमानस के मर्म को समझते और वाल्मीकि जयंती का आयोजन करते थे. आचार्य जी से गांव रन्नूचक भागलपुर की प्रतिष्ठा ग्लोबल हो गययी है. कार्यक्रम में भोजपुरी साहित्य परिषद की सरिता तिवारी, हर्ष कुमार मिश्र, संताली साहित्यकार विमल मुर्मू, मार्था मूर्मु, नकुल मिश्र, अनुपमा मिश्रा, भारत यादव, अमृत प्रकाश, उपेंद्र कुमार राय, मनोज कुमार लोहार शामिल थे.
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