साहिबगंज-मालदा एमइएमयू में कोच की कमी से यात्री परेशान
Published by : RAKESH KUMAR Updated At : 02 Jun 2026 8:25 PM
साहिबगंज (फाइल फोटो)
इलाज कराने मालदा जाने वाले मरीजों को होती है सबसे ज्यादा परेशानी
बरहरवा. साहिबगंज से मालदा टाउन जाने वाली एमइएमयू (63401) में यात्रियों के लिए महज पांच कोच होने से यात्रियों को रोजाना परेशानी सामना करना पड़ रहा है. बरहरवा जंक्शन से सुबह 7:28 बजे खुलने वाली ट्रेन में पैर रखने तक की जगह नहीं बचती है. पिछड़े जिले के साहिबगंज, राजमहल, उधवा, बोरियो, बरहेट, बरहरवा, पतना सहित पश्चिम बंगाल के फरक्का तक के क्षेत्र से हर दिन सैकड़ों मरीज इलाज के लिए मालदा के निजी व सरकारी मेडिकल कॉलेज जाते हैं. बरहरवा निवासी प्रदीप कुमार मंडल ने बताया कि फरक्का एक्सप्रेस के बाद शाम तक मालदा जाने के लिए यह एकमात्र लोकल ट्रेन है. जिसमें कुल छह कोच हैं, पर एक कोच का स्थान पायलेटिंग में चला जाता है. यात्रियों के लिए केवल 5 कोच ही बचती है. जिसमें यात्रियों को चढ़ना और बैठना तो दूर, कई बार भीड़ के कारण यात्रियों की ट्रेन छूट जाती है. बुजुर्ग और महिला यात्रियों को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है. कई बार धक्का-मुक्की में लोग प्लेटफॉर्म पर भी गिर जाते हैं. भीषण गर्मी और भीड़ में खड़े-खड़े चक्कर आ जाता है. महिला यात्री ने कहा कि ट्रेन में महिला कोच भी नहीं है, ट्रेन में यात्रियों के बीच चढ़ने को लेकर होने वाले धक्का-मुक्की में डर लगता है. एक दैनिक यात्री ने बताया कि वे उपहार (गिफ्ट) व पूजा सामग्री का व्यापार करते हैं. मालदा से सामान लाने के लिए रोजाना आना-जाना होता है. मालदा से वापसी में उनके पास खरीदे गये समान होते हैं. पर ट्रेन में अत्यधिक भीड़ रहने के कारण जगह नहीं होता है. भीड़ को देखते हुये कम से कम 12 कोच होना बहुत जरूरी है. क्या कहते है यात्री………….. फोटो- 00, अमन कुमार गुप्ता मालदा लोकल ट्रेन में पांच कोच रहने से यात्रियों को धक्का मुक्की कर ट्रेन में चढ़ना पड़ता है. सामान लाने के लिए मालदा जाने वाले डेली पैसेंजर और व्यवसायियों को भीड़ के कारण परेशानी होती है. फोटो- 00, रामनाथ विद्रोही प्रतिदिन हजारों यात्रियों का आना जाना होता है. ट्रेन में कोच कम होने से यात्रियों के अलावे मरीजों को भी खड़े खड़े जाना पड़ता है. रेलवे को इसपर ध्यान देते हुए कोच की संख्या 12 तक करनी चाहिए. रामनाथ विद्रोही क्या कहते हैं अधिकारी रेलवे लगातार यात्री सुविधा बढ़ाने को लेकर प्रयासरत हैं. अभी तक उक्त ट्रेन में कोच (डिब्बा) बढ़ाये जाने को लेकर कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है. अगर कोई आवेदन मिलता है तो इसपर विचार किया जायेगा. दशरथ मांझी, पीआरओ, मालदा
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