कई मोबाइल टावरों का लेखा-जोखा नहीं

Updated at : 26 Aug 2017 4:13 AM (IST)
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कई मोबाइल टावरों का लेखा-जोखा नहीं

उदासीनता . कंपनियों पर नहीं है नगर पर्षद का लगाम, टैक्स वसूली की स्थिति खराब नगर परिषद के पास मात्र 30 टावरों का ही लेखा-जोखा है. जबकि 50-60 टावर लगाये गये हैं. ऐसे में राजस्व वसूली भी नहीं हो पा रही है. टावर लगाने के मामले में घालमेल की भी आशंका जतायी जा रही है. […]

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उदासीनता . कंपनियों पर नहीं है नगर पर्षद का लगाम, टैक्स वसूली की स्थिति खराब

नगर परिषद के पास मात्र 30 टावरों का ही लेखा-जोखा है. जबकि 50-60 टावर लगाये गये हैं. ऐसे में राजस्व वसूली भी नहीं हो पा रही है. टावर लगाने के मामले में घालमेल की भी आशंका जतायी जा रही है.
साहिबगंज : शहर में नियमों व मापदंडों की अनदेखी कर कई दूरसंचार कंपनियों ने मोबाइल टावर लगाये हैं. नगर पर्षद की माने तो जिले में मात्र 30 टावर ही लगाये गये हैं. जबकि हकीकत यह है कि जिले में लगभग 50-60 टावर लगाये गये हैं. जिसका कोई भी कागजात नगर पर्षद के पास उपलब्ध नहीं है. मात्र 30 टावरों का लेखा-जोखा नगर पर्षद के पास उपलब्ध है. वह भी कई टावर कंपनियों पर टैक्स का भी बकाया है. कई पर नोटिस जारी है.
रिडेएशन से खतरा : मोबाइल टावर से निकलने वाला रेडिएशन मानव व पशु दोनों के लिए नुकसानदेह है. पहले साहिबगंज में गंगा किनारे विदेशी पक्षियों के झुंड आते थे, लेकिन मोबाइल टावर की संख्या बढ़ने के साथ इसमें कमी आ गयी. पिछले वर्ष अचानक सैकड़ों पक्षी जहां-तहां मरे भी मिले थे. इस घटना के बाद स्थानीय डॉक्टरों व वैज्ञानिकों ने मोबाइल के टावरों से उत्पन्न होने वाली रेडिएशन को कारण बताया था.
इस वित्तीय वर्ष में मात्र 45 हजार की हुई.
राजस्व वसूली : साहिबगंज शहर में 30 टावर है. इसमें से मात्र अभी तक 45 हजार रुपये की ही राजस्व की वसूली हुई है. जिनमें से आठ टावर कंपनियों ने ही टैक्स भरा है. जबकि अन्य टावर कंपनियों का भुगतान अब तक नहीं हो सका है. नप प्रशासन की ओर से नोटिस जारी किया गया है.
यह है मोबाइल टावर लगाने संबंधी नियम
राज्य संचार मीनार व संबंधित नियमावली 2012 के नियम छह के अनुसार निगम क्षेत्र अंतर्गत स्थापित मोबाइल टावर से पंजीकरण शुल्क के रूप में 50 हजार रुपये प्रति टावर तथा वार्षिक नवीकरण शुल्क 15 हजार रुपये प्रति टावर प्रति वर्ष लेना है. इसके अलावा, एक ही टावर पर प्रत्येक अतिरिक्त एंटिना के लिए 60 फीसदी पंजीकरण शुल्क व नवीकरण शुल्क वसूलना है. पंजीकरण शुल्क आवेदन की स्वीकृति के तुरंत बाद देना है. अगर पंजीकरण शुल्क पंजीकरण के 30 दिन के भीतर प्राप्त नहीं होता है तो 1.5 फीसदी प्रति माह की दर से ब्याज लिया जायेगा. वार्षिक नवीकरण फीस प्रत्येक वित्त वर्ष के एक अप्रैल को देना है. अगर उस वित्त वर्ष का वार्षिक नवीकरण शुल्क 30 अप्रैल तक नहीं प्राप्त होता है तो 1.5 फीसदी प्रति माह की दर से ब्याज देना होगा. बगैर रजिस्ट्रेशन व नवीकरण शुल्क भुगतान किये तथा निगम की अनुमति बगैर संचार टावर स्थापित करना गैर कानूनी है. बकाया पंजीकरण व नवीकरण शुल्क वाले टावर को सील तब तक करना है, जब तक वह बकाया राशि ब्याज सहित जमा नहीं कर देता है.
क्या है पहल
नगर पर्षद को अप्रैल 2011 में मांग पत्र तैयार कर वसूली कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया था. कई बार रिमाइंडर भेजा गया, लेकिन कार्यालय में वसूली का आंकड़ा नहीं होने के कारण नहीं भेजा गया.
क्या है लापरवाही
नप कर्मियों ने टावर को लेकर संग्रहण पंजी नहीं बनायी. वसूली की स्थिति की कोई रजिस्टर नहीं है. पंजीकरण व नवनीकरण शुल्क पूरी तरह नहीं वसूला गया है. अभिलेख नहीं होने के कारण बकाया राशि सत्यता की जांच नहीं हो पायी.
टावरों का सर्वेक्षण कराया जा रहा है. नियम अनुकूल जो टावर होगा वही रहेगा बाकि सभी टावर हटाये जायेंगे.
अमित प्रकाश, एसडीओ सह नप पदाधिकारी
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