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दूध-फल पर ज्यादा खर्च करते हैं झारखंड के शहरी, ग्रामीण अंडा-मछली और मांस पर

Updated at : 13 May 2025 3:29 PM (IST)
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Monthly Per Capita Expenditure Jharkhand

गांव के लोग शहरी की तुलना में ज्यादा खाते हैं मांस, मछली और अंडा. फोटो : AI

Monthly Per Capita Expenditure Jharkhand: झारखंड सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण के मैक्रो इकॉनोमिक ओवरव्यू में बताया गया है कि गांवों में 13.9 प्रतिशत लोग अंडा, मछली और मीट खाते हैं, जबकि शहरों में यह आबादी 9.7 फीसदी ही है. पेय पदार्थों और पैकेज्ड फूड के उपभोग के मामले में शहर और गांव का अंतर बहुत बड़ा नहीं है. शहर में 21.2 प्रतिशत लोग पैक्ड फूड और अन्य पेय पदार्थों का इस्तेमाल करते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे 20.3 प्रतिशत लोग हैं.

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Monthly Per Capita Expenditure Jharkhand: झारखंड के शहरी क्षेत्र के लोग दूध और दूध से बने उत्पाद खाने में ग्रामीण क्षेत्र के लोग आगे हैं. फल खाने के मामले में भी शहरी नागरिकों ने ग्रामीणों को पीछे छोड़ दिया है. पेय पदार्थों और प्रोसेस्ड फूड आदि के सेवन में भी शहरी क्षेत्र के लोग ग्रामीणों से आगे हैं. वहीं, मांस, मछली और अंडा खाने के मामले में ग्रामीणों ने शहरी लोगों को पछाड़ दिया है. दूध, फल और मांसाहार के सेवन में शहरी और ग्रामीण आबादी में बड़ा अंतर देखा गया है. हलांकि, अनाज, सब्जी, पेय पदार्थों, प्रोसेस्ड फूड आदि की खपत में अंतर बहुत कम है.

गांव के 14.8 फीसदी लोग अनाज का इस्तेमाल करते हैं, शहर में 14.2 फीसदी

झारखंड सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण के मैक्रो इकॉनोमिक ओवरव्यू में यह जानकारी दी गयी है. इसमें बताया गया है कि वर्ष 2022-23 के आंकड़ों के आधार पर, ग्रामीण क्षेत्र में 14.8 फीसदी लोग अनाज का इस्तेमाल करते हैं, तो शहरी क्षेत्र में 14.2 फीसदी. ग्रामीण क्षेत्र में महज 11 प्रतिशत लोग दूध और दूध से बने उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं. शहरी क्षेत्र में ऐसे लोगों की संख्या 16.1 प्रतिशत है. दूध की तरह फल खाने में भी शहरी क्षेत्र के लोग आगे हैं. गांवों में 6.1 फीसदी लोग फल का सेवन करते हैं, तो शहरी क्षेत्र में 8.7 फीसदी.

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गांवों में 13.9 फीसदी खर्च मांसाहार पर, शहरों में 9.7 प्रतिशत

गांवों में 13.9 प्रतिशत लोग अंडा, मछली और मीट खाते हैं, जबकि शहरों में यह आबादी 9.7 फीसदी ही है. पेय पदार्थों और पैकेज्ड फूड के उपभोग के मामले में शहर और गांव का अंतर बहुत बड़ा नहीं है. दोनों का अंतर महज 0.9 प्रतिशत है. शहरी क्षेत्र में 21.2 प्रतिशत लोग पैक्ड फूड और अन्य पेय पदार्थों का इस्तेमाल करते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में इनका सेवन करने वाले 20.3 प्रतिशत हैं, जो बहुत कम नहीं है. सब्जी खाने के मामले में भी गांव के लोग आगे हैं. शहरों में 11.3 फीसदी लोग सब्जी खाते हैं, तो गांवों 12.5 फीसदी लोग सब्जी का सेवन करते हैं. इसी तरह अन्य खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल करने वाले गांवों में 21.3 प्रतिशत हैं, तो शहरों में 18.9 प्रतिशत.

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अनाज की खपत भी शहरों से ज्यादा गांवों में

आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के एमपीसीई (Monthly Per Capita Expenditure) के आंकड़े बताते हैं कि शहरों में प्रति व्यक्ति 9.59 किलोग्राम अनाज की खपत है, तो गांवों में 9.93 किलोग्राम प्रति माह. शहरों में 56.97 प्रतिशत लोग चावल, 42.97 फीसदी लोग गेहूं, 0.03 प्रतिशत लोग मोटा अनाज और 0.03 प्रतिशत अन्य अनाज का इस्तेमाल करते हैं. वहीं, गांवों में 68.36 प्रतिशत लोग चावल, 31.34 प्रतिशत लोग गेहूं, 0.25 प्रतिशत लोग मोटा अनाज और 0.04 प्रतिशत लोग अन्य अनाज का इस्तेमाल करते हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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