झारखंड के गांव और शहर में बढ़ रही प्रति व्यक्ति खर्च की खाई, सबसे गरीब लोग कितना करते हैं खर्च?

ग्रामीण क्षेत्र का बाजार. फोटो : AI
MPCE Jharkhand: झारखंड के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले सबसे गरीब 10 फीसदी लोग प्रति माह 2,215 रुपए खर्च करते हैं, जबकि इसके उलट शहर में रहने वाले सबसे अमीर 10 फीसदी लोगों का प्रति माह खर्च 8,315 रुपए है, जो सबसे गरीब के खर्च की तुलना में चार गुणा से अधिक है. मिडिल क्लास की बात करें, तो उनका प्रति माह खर्च 4,154 रुपए है. रिपोर्ट में कहा गया है कि शहरों में रहने वाली आधी से अधिक आबादी 4,154 रुपए या इससे कम खर्च करती है. अगर शीर्ष 20 प्रतिशत अमीर आबादी का प्रति माह खर्च 6,532 रुपए से 8,315 रुपए के बीच है.
Table of Contents
MPCE Jharkhand: झारखंड में गांव और शहर में प्रति व्यक्ति खर्च का अंतर बढ़ रहा है. वर्ष 2022-23 में गांव और शहर का अंतर 78 प्रतिशत था, जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 83 प्रतिशत हो गया है. सबसे अमीर लोगों के खर्च में और सबसे गरीब लोगों के खर्च में भी बड़ा अंतर है. झारखंड सरकार के आंकड़ों पर गौर करेंगे, तो वर्ष 2022-23 में ग्रामीण क्षेत्र में प्रति माह प्रति व्यक्ति खर्च 2,763 रुपए और शहरी क्षेत्र में 4,931 रुपए था. यह अंतर 78 प्रतिशत था. वर्ष 2023-24 के आंकड़ों पर गौर करेंगे, तो पायेंगे कि ग्रामीण क्षेत्र में प्रति वर्ष 2,946 रुपए और शहरी क्षेत्र में 5,393 रुपए रहा. यह दिखाता है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में खर्च का अंतर 83 फीसदी का है. यानी शहरी क्षेत्र के लोग 83 फीसदी अधिक खर्च करते हैं. यह दर्शाता है कि एक साल में ग्रामीणों और शहरी लोगों के रहन-सहन का गैप बढ़ा है.
क्या है एमपीसीई (मंथली पर कैपिटा एक्सपेंडिचर)?
झारखंड सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के मंथली पर कैपिटा एक्सपेंडिचर (MPCE) एंड कंजंप्शन इनइक्वालिटी इन झारखंड अर्थात ‘झारखंड में प्रति माह प्रति व्यक्ति खर्च और उपभोग में अंतर’ सेक्शन में यह जानकारी दी है. एमपीसीई किसी भी राज्य या देश के लोगों की आर्थिक स्थिति, उनके रहन-सहन का दर्पण है. यह लोगों के जीवन स्तर के बारे में दर्शाता है. आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति खर्च में वृद्धि हुई है.
सबसे गरीब 10 फीसदी लोगों का मासिक खर्च 2215 रुपए
सरकार के आंकड़े बताते हैं कि झारखंड के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले सबसे गरीब 10 फीसदी लोग प्रति माह 2,215 रुपए खर्च करते हैं, जबकि इसके उलट शहर में रहने वाले सबसे अमीर 10 फीसदी लोगों का प्रति माह खर्च 8,315 रुपए है, जो सबसे गरीब के खर्च की तुलना में चार गुणा से अधिक है. मिडिल क्लास की बात करें, तो उनका प्रति माह खर्च 4,154 रुपए है. रिपोर्ट में कहा गया है कि शहरों में रहने वाली आधी से अधिक आबादी 4,154 रुपए या इससे कम खर्च करती है. अगर शीर्ष 20 प्रतिशत अमीर आबादी का प्रति माह खर्च 6,532 रुपए से 8,315 रुपए के बीच है.
झारखंड की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
भोजन पर 48 फीसदी खर्च करते हैं ग्रामीण, शहरी का खर्च 42 फीसदी
ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोग अनाज और भोजन पर शहरी क्षेत्र के लोगों से ज्यादा खर्च करते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अनाज पर 7 फीसदी खर्च करते हैं. इनका 48 फीसदी खर्च भोजन पर होता है. अगर बात करें, शहरी क्षेत्र के लोगों के खर्च की, तो उनका 6 प्रतिशत खर्च अनाज पर और 42 फीसदी खर्च भोजन पर करते हैं. इस तरह देखेंगे, तो पायेंगे कि भोजन पर खर्च करने के मामले में शहरी क्षेत्र के लोग ग्रामीण क्षेत्र के लोगों से पीछे हैं.
इसे भी पढ़ें : सैलानियों का स्वर्ग बनता झारखंड, हर साल आ रहे 3.5 करोड़ पर्यटक, ये जगहें हैं खास
9.59 किलो अनाज खाते हैं शहरी, ग्रामीण 9.93 किलोग्राम
अनाज की खपत के मामले में भी शहरी क्षेत्र के लोग ग्रामीण क्षेत्र के लोगों से पीछे हैं. गांवों में रहने वाले लोग प्रति माह 9.93 किलोग्राम अनाज का उपभोग करते हैं, जबकि शहरी क्षेत्र के लोग 9.59 किलोग्राम अनाज का उपयोग करते हैं. ग्रामीणों का मुख्य भोजन चावल है. ग्रामीण 68.36 फीसदी चावल, 31.34 फीसदी गेहूं और 0.25 फीसदी खुरदुरे अनाज का इस्तेमाल करते हैं. शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोग 56.97 फीसदी चावलऔर 42.97 फीसदी गेहूं का इस्तेमाल करते हैं. शहरी लोग मात्र 0.03 फीसदी खुरदुरे अनाज का इस्तेमाल करते हैं.
इसे भी पढ़ें
LPG Price Today: 12 मई को आपको कितने में मिलेगा 14.2 किलो का एलपीजी सिलेंडर, यहां चेक करें रेट
झारखंड में डीजीपी के मुद्दे पर राजनीति गरमायी, बाबूलाल मरांडी और विनोद पांडेय में वार-पलटवार
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




