झारखंड के 1.95 लाख से अधिक लोगों का वोट रद्दी, इन 3 गलतियों के कारण 'लोकतंत्र के महापर्व' पर लगा दाग

झारखंड के 1.95 लाख वोटरों के वोट रद्द, Symbolic Pic Image Credit- AI
Jharkhand Municipal Election 2026: झारखंड के 1.95 लोगों को वोट रद्द हो गये. अकेले रांची नगर निगम में 62000 मतदाताओं के वोट अमान्य करार दिये गये. बैलेट पेपर से वोटिंग बड़ी वजह बनीं या मतदाताओं की उलझन, यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
Jharkhand Municipal Election 2026, रांची (राजेश तिवारी, राजीव पांडेय): रांची में नगर निगम चुनाव के दौरान लोकतंत्र का उत्साह तो दिखा, लेकिन हजारों मतदाताओं की छोटी-छोटी तकनीकी चूक भारी पड़ गयी. करीब 4,45,922 लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, लेकिन इनमें से 62,330 वोट रद्द हो गये. यह कुल मतदान का 13.98 फीसदी है. मेयर पद के 36,527 और पार्षद पद के 25,803 मत अमान्य घोषित किये गये. राज्य भर के नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में कुल 1,95,109 से अधिक मत अमान्य घोषित या खारिज किये गये. कई निकायों में जीत-हार का अंतर अपेक्षाकृत कम रहा, ऐसे में रद्द मतों की संख्या राजनीतिक विश्लेषण का बड़ा आधार बन गयी है. निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार मत खारिज होने के मुख्य कारणों में एक से अधिक प्रत्याशियों के सामने मुहर लगाना, निर्धारित बॉक्स के बाहर निशान लगाना व खाली मतपत्र डालना है.
वर्ष 2013 में हुआ था वैलेट पेपर से मतदान
नगर निगम चुनाव में वर्ष 2013 में बैलेट पेपर से मतदान हुआ था. इसके 13 साल बाद वर्ष 2026 में बैलेट पेपर से मतदान हुआ है. सूत्रों का कहना है कि इवीएम से मतदान करने की लोगों की आदत हो गयी है. बैलेट पेपर की प्रक्रिया को लोग अब भूल चुके है, इसलिए इतने बड़े संख्या में वोट रद्द हुआ है. रांची नगर निगम चुनाव में रद्द मतों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो वार्ड संख्या 22 सबसे आगे रहा. यहां कुल 904 वोट रद्द हुए, जो सभी वार्डों में सर्वाधिक है. दूसरे स्थान पर वार्ड संख्या 23 रहा, जहां 858 मत अमान्य घोषित किये गये.
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वार्ड संख्या 36 में 836 वोट हुए रद्द
वार्ड संख्या 36 में 836 और वार्ड संख्या 50 में 784 वोट रद्द हुए. इसी तरह वार्ड संख्या 34 में 780 मत बेकार गये, जबकि वार्ड संख्या 16 में 731 वोट रद्द की श्रेणी में आ गये. नगर परिषदों में रामगढ़ नगर परिषद, साहिबगंज नगर परिषद, चक्रधरपुर नगर परिषद और फुसरो नगर परिषद में मुकाबला कड़ा रहा. कई परिषदों में अध्यक्ष पद पर जीत का अंतर दो से चार हजार मतों के बीच रहा, जबकि रद्द मतों की संख्या भी उल्लेखनीय रही. नगर पंचायतों में स्थिति और दिलचस्प रही. खूंटी नगर पंचायत, सरायकेला नगर पंचायत और जामताड़ा नगर पंचायत जैसे निकायों में अध्यक्ष पद पर जीत का अंतर कई जगहों पर एक हजार मतों से कम रहा. ऐसे में रद्द मत निर्णायक भूमिका में नजर आये. छोटी नगर पंचायतों में तो कुछ वार्डों में जीत का अंतर कुछ सौ मतों तक सीमित रहा.
मतदाताओं के उलझन की ये रहीं वजहें
बैलेट पेपर प्रणाली ने खड़ी की परेशानी
बैलेट पेपर प्रणाली ने कई मतदाताओं को उलझन में डाल दिया. मेयर और पार्षद पद के लिए अलग-अलग बैलेट पेपर दिये गये थे, लेकिन अनेक मतदाताओं को यह स्पष्ट नहीं था कि दोनों पदों के लिए मतदान करना आवश्यक है. बड़ी संख्या में लोगों ने केवल पार्षद पद के लिए वोट डाला और मेयर वाला बैलेट पेपर बिना मुहर लगाये बॉक्स में डाल दिया.
ठीक से मुहर अंकित नहीं हुआ, तो कई बार मुहर लगा दी
पहली बार मुहर लगाने पर हल्का निशान पड़ा, तो कई मतदाताओं ने कई बार मुहर लगा दी. इससे मुहर का निशान खाने से बाहर या दूसरे खानों में भी चली गयी और मत अमान्य घोषित हो गया. कुछ मामलों में मुहर निर्धारित स्थान के बाहर लगने से भी वोट रद्द हुए.
युवा व पहली बार वोट करनेवालों को बैलेट पेपर की जानकारी नहीं
स्कूली पाठ्यक्रम में मतदान की पूरी प्रक्रिया इवीएम से संपन्न कराने की जानकारी दी जा रही है. युवा इवीएम से होने वाले मतदान के बारे में पढ़ रहे हैं. ऐसे में जब युवाओं को बैलेट पेपर से मतदान करने का मौका मिला, तो वह जानकारी के अभाव में चूक गये.
यह सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का परिणाम : भाजपा
नगर निकाय चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को हराने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर चक्रव्यूह रचा गया था. रांची नगर निगम चुनाव में भाजपा समर्थित मेयर प्रत्याशी रोशनी खलखो सहित अन्य उम्मीदवारों के लगभग 36 हजार वोटों का रद्द होना इसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है.
आदित्य साहू, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष
वोटरों को जागरूक किये जाने की जरूरत थी : कांग्रेस
लोकसभा व विधानसभा चुनाव इवीएम से हुए थे, लेकिन निकाय चुनाव बैलेट पेपर पर हुए. कई मतदाताओं ने मुहर तो लगायी, लेकिन उसे मोड़ने या सही खाने में लगाने में गलती कर दी. जिससे बड़ी संख्या में वोट रद्द हो गये. राजनीतिक दलों को भी वोटरों को मतदान प्रक्रिया को लेकर जागरूक करना चाहिए था.
केशव महतो कमलेश, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
बैलेट पेपर की वोटरों की प्रैक्टिस छूट गयी थी : झामुमो
नगर निकाय चुनाव और मतगणना पूरी तरह पारदर्शी ढंग से हुए. इवीएम में वोट करने की वजह से वोटरों की प्रैक्टिस छूट गयी थी. इस कारण बड़ी संख्या में वोट रद्द हुए हैं. इसके लिए राजनीतिक दलों की ओर से वोटरों को जागरूक करने के लिए जितनी कोशिश होनी चाहिए, वह नहीं हुई.
सुप्रियो भट्टाचार्य, झामुमो के केंद्रीय महासचिव
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रांची नगर निगम में पार्षद पद के लिए वार्डवार रद्द मतों की संख्या
वार्ड- रद्द मत
01-408
02-687
03-442
04-609
05-750
06-46
07-486
08-516
09-460
10-675
11-546
12-394
13-586
14-532
15-593
16-731
17-273
18-293
19-389
20-303
21-372
22-904
23-858
24-308
25-151
26-403
27-546
28-699
29-276
30-341
31-368
32-529
33-453
34-780
35-601
36-836
37-763
38-441
39-402
40-301
41-263
42-363
43-278
44-257
45-478
46-453
47-547
48-520
49-482
50-784
51-237
52-625
53-465
अन्य निकाय चुनावों में रद्द वोट
धनबाद नगर निगम : 22930
देवघर नगर निगम : 6114
चास नगर निगम : 5258
मेदिनीनगर नगर निगम : 4398
हजारीबाग नगर निगम : 6469
गिरिडीह नगर निगम : 6776
मानगो नगर निगम : 7969
आदित्यपुर नगर निगम : 5953
चिरकुंडा नगर परिषद : 1692
फुसरो नगर परिषद : 3069
गढ़वा नगर परिषद : 1406
विश्रामपुर नगर परिषद : 1767
गुमला नगर परिषद : 1925
सिमडेगा नगर परिषद : 1561
लोहरदगा नगर परिषद : 2193
चतरा नगर परिषद : 1675
झुमरीतिलैया नगर परिषद : 2732
रामगढ़ नगर परिषद : 4673
साहिबगंज नगर परिषद : 3496
दुमका नगर परिषद : 1554
मधुपुर नगर परिषद : 2129
पाकुड़ नगर परिषद :1793
मिहिजाम नगर परिषद :1721
गोड्डा नगर परिषद : 1439
जुगसलाई नगर परिषद : 1798
चक्रधरपुर नगर परिषद : 3430
चाईबासा नगर परिषद : 2957
कपाली नगर परिषद : 1955
श्रीवंशीधरनगर नगर पंचायत : 1355
मझिआंव नगर पंचायत : 416
हुसैनाबाद नगर पंचायत : 1035
छतरपुर नगर पंचायत : 927
हरिहरगंज नगर पंचायत : 1044
लातेहार नगर पंचायत : 1025
कोडरमा नगर पंचायत : 726
डोमचांच नगर पंचायत : 648
बरहरवा नगर पंचायत : 834
राजमहल नगर पंचायत : 374
बासुकिनाथ नगर पंचायत : 725
खूंटी नगर पंचायत : 1617
बुंडू नगर पंचायत : 998
जामताड़ा नगर पंचायत : 1343
महागामा नगर पंचायत: 1050
बड़कीसरैया नगर पंचायत : 619
धनवार नंगर पंचायत : 414
सरायकेला नगर पंचायत : 1469
( नोट : शनिवार की शाम तक नगर निकायों से प्राप्त जानकारी के आधार पर यह सूची बनी है. अंतिम आंकड़े जारी होने पर इसमें बदलाव संभव है.)
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लेखक के बारे में
By Sameer Oraon
इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.
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