साहिबगंज का 'पॉवर गेम': अध्यक्ष तो चुन लिया, अब उपाध्यक्ष की कुर्सी के लिए बंद कमरों में 'सियासी सौदेबाजी'

साहिबगंज नगर परिषद में उपाध्यक्ष की कुर्सी के लिए सियासत तेज, Symbolic Pic Credit- AI
Jharkhand Municipal Election Result 2026: साहिबगंज नगर परिषद चुनाव के बाद उपाध्यक्ष की कुर्सी के लिए सियासी हलचल तेज हो गयी है. बंद कमरों की बैठकों और लुभावने प्रस्तावों के बीच, क्या जनादेश बचेगा या होगी सत्ता की सौदेबाजी? पढ़ें पूरी खबर.
Jharkhand Municipal Election Result 2026, साहिबगंज : नगर निकाय चुनाव-2026 के नतीजे आते ही साहिबगंज नगर परिषद की राजनीति खुलकर सामने आ गयी है. अध्यक्ष पद पर झामुमो समर्थित रामनाथ पासवान उर्फ छोटू पासवान की भारी जीत के बाद अब असली जंग उपाध्यक्ष की कुर्सी को लेकर शुरू हो चुकी है. मतगणना खत्म होते ही वार्ड पार्षदों के मोबाइल फोन देर रात तक बजते रहे, जो इस बात का संकेत है कि सत्ता की असली बाजी अब खेली जा रही है.
नये पार्षदों की एंट्री बदल डाले समीकरण
28 वार्डों में कई पुराने चेहरों की विदाई और नये पार्षदों की एंट्री ने समीकरण बदल दिए हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या उपाध्यक्ष का चयन जनादेश के आधार पर होगा या राजनीतिक जोड़-तोड़ के दम पर? अल्पसंख्यक समुदाय से उपाध्यक्ष बनाने की मांग तेज हो गयी है. तर्क दिया जा रहा है कि चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाने वाले मतदाताओं को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए. परंतु विरोधी दल इसे खुला वोट बैंक राजनीति करार दे रहे हैं. गठबंधन के भीतर भी अंदरूनी खींचतान सामने आ रही है.
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कांग्रेस समर्थित पार्षदों के नाम बढ़ाये जा रहे आगे
चर्चा है कि अध्यक्ष एक दल से होने के कारण उपाध्यक्ष सहयोगी दल को दिया जाय. कांग्रेस समर्थित पार्षदों के नाम आगे बढ़ाए जा रहे हैं. हालांकि, यह भी सच है कि अभी तक कोई औपचारिक सहमति नहीं बनी है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर गठबंधन धर्म के नाम पर दबाव बनाया गया तो असंतोष पनप सकता है. इधर तीसरा मोर्चा भी सक्रिय है.
पार्षदों को अपने खेमे में करने की कोशिश शुरू
आरोप है कि मतगणना हॉल से ही पार्षदों को अपने खेमे में करने की कोशिश शुरू हो गयी थी. बंद कमरों में बैठकों का दौर और लुभावने प्रस्ताव चर्चा का विषय बने हुए हैं. सवाल उठ रहा है कि क्या यह जनादेश का सम्मान है या सत्ता के लिए सियासी सौदेबाजी. सबसे बड़ा राजनीतिक प्रहार यही है कि चुनाव से पहले पारदर्शिता और विकास की बात करने वाले दल अब समीकरण साधने में लगे हैं. क्या उपाध्यक्ष का चयन योग्यता और अनुभव के आधार पर होगा?. केवल जातीय और सामुदायिक गणित पर फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन इतना तय है कि नगर परिषद की उपाध्यक्ष कुर्सी अब सियासी प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुकी है. आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि जनादेश की मर्यादा बचती है या फिर राजनीति का खेल भारी पड़ता है.
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लेखक के बारे में
By Sameer Oraon
इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.
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