रांची : दहेज हत्या के मामले में आजीवन कारवास की सजा पाये पांच बरी
Updated at : 14 Jan 2020 9:11 AM (IST)
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रांची : झारखंड हाइकोर्ट में दहेज हत्या मामले आजीवन कारावास की सजा पाये सजायाफ्ताअों की अोर से दायर अपील याचिका पर सुनवाई हुई. जस्टिस एस चंद्रशेखर व जस्टिस रत्नाकर भेंगरा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दाैरान सभी पक्षों को सुनने के बाद अपील स्वीकार कर लिया. साथ ही अपीलकर्ताअों (सजायाफ्ताअों) को मामले से […]
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रांची : झारखंड हाइकोर्ट में दहेज हत्या मामले आजीवन कारावास की सजा पाये सजायाफ्ताअों की अोर से दायर अपील याचिका पर सुनवाई हुई. जस्टिस एस चंद्रशेखर व जस्टिस रत्नाकर भेंगरा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दाैरान सभी पक्षों को सुनने के बाद अपील स्वीकार कर लिया. साथ ही अपीलकर्ताअों (सजायाफ्ताअों) को मामले से बाइज्जत बरी कर दिया. बरी होनेवालों में अरुण सिंह,
छेदी सिंह, रीता सिंह व पूरन सिंह शामिल हैं. एक अन्य सजायाफ्ता शांति देवी का निधन हो गया है. उन्हें भी बरी किया गया है.
इससे पूर्व प्रार्थियों की अोर से अधिवक्ता हेमंत कुमार सिकरवार ने खंडपीठ को बताया कि दो जून 1990 में हजारीबाग के इचाक के बरवा गांव निवासी सुमन देवी व आठ माह के बच्चे टिंकू का शव कुंआ से बरामद हुआ था. सुमन के चाचा अवधेश सिंह द्वारा घटना की प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. मामले में प्रत्यक्षदर्शी मृतका की बहन प्रभा, उसकी मां व सूचक चाचा अवधेश सिंह निचली अदालत में गवाही के दौरान अपने पूर्व के बयान से मुकर गये थे.
पुलिस ने सुमन के पिता व सगे भाई को गवाह भी नहीं बनाया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोट का निशान भी नहीं मिला था. वैसी स्थिति में हत्या का मामला नहीं बनता है. उल्लेखनीय है कि हजारीबाग की निचली अदालत ने वर्ष 2002 में आरोपियों को दोषी पाने के बाद आजीवन कारावास की सजा सुनायी थी. इसे हाइकोर्ट में अपील याचिका दायर कर चुनाैती दी गयी थी.
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