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जनजातीय संगठनों ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, कहा- राज्य में पांचवीं अनुसूची पूरी तरह लागू हो

Updated at : 08 Sep 2019 12:45 AM (IST)
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जनजातीय संगठनों ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, कहा- राज्य में पांचवीं अनुसूची पूरी तरह लागू हो

रांची : विभिन्न जनजातीय संगठनों ने राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन देकर उनसे निवेदन किया है कि पांचवीं अनुसूची व अन्य अधिनियम के जरिये जनजातियों को प्रदत्त अधिकार उन्हें दिये जायें. आदिवासी समन्वय समिति, भूमि बचाअो समन्वय मंच कोल्हान, आदिवासी बुद्धिजीवी मंच, अंतरराष्ट्रीय संताल परिषद तथा आदिवासी समाज के प्रबुद्ध जनों ने राज्यपाल को संबोधित […]

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रांची : विभिन्न जनजातीय संगठनों ने राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन देकर उनसे निवेदन किया है कि पांचवीं अनुसूची व अन्य अधिनियम के जरिये जनजातियों को प्रदत्त अधिकार उन्हें दिये जायें. आदिवासी समन्वय समिति, भूमि बचाअो समन्वय मंच कोल्हान, आदिवासी बुद्धिजीवी मंच, अंतरराष्ट्रीय संताल परिषद तथा आदिवासी समाज के प्रबुद्ध जनों ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन में कहा है कि आदिवासियों के सामाजिक, सांस्कृतिक व आर्थिक विकास सहित उनकी भाषाई सुरक्षा तथा उनके अस्तित्व व पहचान के लिए देश में कई कानूनी प्रावधान हैं.

पर दुर्भाग्य से जनजातीय लोग आज भी अपने अधिकारों से वंचित हैं. इन संगठनों ने पांचवीं अनुसूची के प्रावधान राज्य में पूरी तरह से लागू करने के अलावा अन्य मांगों से राज्यपाल को अवगत कराया है.
राज्यपाल से मिलनेवालों में बिहार विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष देवेंद्र नाथ चांपिया, पूर्व विधायक बहादुर उरांव, भूमि बचाअो समन्वय मंच के ब्रोंजो हांसदा, अंतरराष्ट्रीय संताल परिषद के नरेश मुर्मू, पूर्व शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव, आदिवासी बुद्धिजीवी मंच के प्रेमचंद मुर्मू, पूर्व विधायक नियेल तिर्की, पूर्व विधायक मंगल सिंह बोबोंगा, झारखंड आंदोलनकारी प्रभाकर तिर्की तथा आदिवासी समन्वय समिति के सुशील बारला शामिल थे.
संगठनों की प्रमुख मांग
पांचवीं अनुसूची के प्रावधान पूरी तरह लागू हों
अनुसूचित क्षेत्रों में गैर आदिवासी की घुसपैठ पर रोक लगे
अनुच्छेद 275 तथा टीएसपी सहित जनजातीय क्षेत्र के फंड का पूरा इस्तेमाल विकास के लिए हो
अनुसूचित क्षेत्र के भूमि बैंक को तत्काल रद्द किया जाये
सीएनटी एक्ट की धारा-46 में संशोधन किया जाये,ताकि आदिवासी किसी भी थाना क्षेत्र में जमीन क्रय कर सकें
राज्य के पेसा क्षेत्र के लिए अलग पंचायत कानून बने
तत्कालीन बिहार में भूमिहीनों को बंदोबस्त जमीन का अधिग्रहण न हो. इसे गैर मजरुआ जमीन घोषित करें
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