रांची : 11वीं में प्रोविजनल एडमिशन के नाम पर वसूलते हैं मनमाना पैसा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 24 Jun 2019 6:14 AM

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स्कूलों में स्थायी नामांकन नहीं लेने पर पैसा वापस लेने में अभिभावकों को होती है परेशानी रांची : सीबीएसइ स्कूल 10वीं का रिजल्ट जारी होने से पहले 11वीं में नामांकन प्रक्रिया शुरू कर देते हैं. रिजल्ट से पहले प्रोविजनल एडमिशन लेते हैं. रिजल्ट जारी होने पर अगर स्कूल द्वारा तय कट ऑफ मार्क्स के अनुरूप […]

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स्कूलों में स्थायी नामांकन नहीं लेने पर पैसा वापस लेने में अभिभावकों को होती है परेशानी
रांची : सीबीएसइ स्कूल 10वीं का रिजल्ट जारी होने से पहले 11वीं में नामांकन प्रक्रिया शुरू कर देते हैं. रिजल्ट से पहले प्रोविजनल एडमिशन लेते हैं.
रिजल्ट जारी होने पर अगर स्कूल द्वारा तय कट ऑफ मार्क्स के अनुरूप अंक नहीं आता है, तो स्कूल नामांकन रद्द कर देते हैं. इसमें भी स्कूल प्रोसेसिंग फीस के नाम पर अभिभावकों से मोटी रकम वसूल लेते हैं. प्रोविजनल एडमिशन के बाद अगर विद्यार्थी स्थायी नामांकन नहीं लेते हैं,तो स्कूल और अधिक राशि काट लेता है. प्रोविजनल एडमिशन को लेकर सीबीएसइ की कोई गाइडलाइन नहीं है.
स्कूल अपने नियम-कायदे के अनुरूप नामांकन लेते हैं. राशि वापस करने के भी स्कूलों ने अपने स्तर से ही नियम तय कर रखा है. एक ही बोर्ड से मान्यता प्राप्त दो विद्यालय में से एक विद्यालय पांच हजार रुपये काटता है, तो दूसरा 25 हजार. ऐसा भी नहीं है कि विद्यालय केवल 10वीं के कट ऑफ मार्क्स के आधार पर 11वीं में नामांकन लेते हैं.
नामांकन के लिए टेस्ट लिया जाता है. टेस्ट में सफल होने के बाद भी अगर तय कट ऑफ मार्क्स के अनुरूप विद्यार्थी को अंक प्राप्त नहीं होता है, तो नामांकन रद्द कर दिया जाता है.
सीबीएसइ ने नहीं बनायी है गाइडलाइन : सीबीएसइ के क्षेत्रीय को-ऑर्डिनेटर मनोहर लाल ने कहा कि रिफंड करने को लेकर सीबीएसइ का कोई सर्कुलर नहीं है. स्कूल अपनी गाइडलाइन के अनुसार यह व्यवस्था बनाये हुए हैं. निजी स्कूलों को चाहिए कि रिफंड को लेकर वह अभिभावकों को सारी जानकारीउपलब्ध करायें.
स्कूलों में क्या है रिफंड की व्यवस्था
जेवीएम श्यामली : जेवीएम श्यामली में लिस्ट में नाम होने व स्कूल द्वारा निर्धारित अंक मिलने के बावजूद नामांकन नहीं कराने पर पांच हजार रुपये प्रोसेसिंग चार्ज काटा जाता है और शेष राशि लौटा दी जाती है. वहीं लिस्ट में नाम होने व स्कूल द्वारा निर्धारित अंक नहीं मिलने पर पूरी राशि लौटायी जाती है. अगर कोई विद्यार्थी एडमिशन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद रिफंड का आवेदन देता है तो उसे सिर्फ कॉसन मनी 3000 रुपये लौटाया जाता है.
डीपीएस : डीपीएस में लिस्ट में नाम होने व स्कूल द्वारा निर्धारित अंक मिलने के बावजूद नामांकन नहीं कराने पर 5000 रुपये प्रोसेसिंग चार्ज काटा जाता है और शेष राशि लौटा दी जाती है. वहीं लिस्ट में नाम होने व स्कूल द्वारा निर्धारित अंक नहीं मिलने पर पूरी राशि लौटायी जाती है. अगर कोई विद्यार्थी एडमिशन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद रिफंड का आवेदन देता है, तो उसे सिर्फ कॉसन मनी 5000 रुपये लौटाया जाता है.
केराली स्कूल : केराली स्कूल में लिस्ट में नाम होने व स्कूल द्वारा निर्धारित अंक मिलने के बावजूद नामांकन नहीं कराने पर प्रोसेसिंग चार्ज काटा जाता है और शेष राशि लौटा दी जाती है. अगर कोई विद्यार्थी एडमिशन लेने के बाद रिफंड मांगता है, तो 25000 हजार रुपये काट कर शेष राशि लौटायी जाती है.
डीएवी हेहल : डीएवी हेहल में लिस्ट में नाम होने व स्कूल द्वारा निर्धारित अंक मिलने के बावजूद नामांकन नहीं कराने पर प्रोसेसिंग चार्ज काटा जाता है और शेष राशि लौटा दी जाती है. वहीं लिस्ट में नाम होने व स्कूल द्वारा निर्धारित अंक नहीं मिलने पर पूरी राशि लौटायी जाती है.
डीएवी कपिलदेव : डीएवी कपिलदेव ने जानकारी देने से इंकार किया. प्राचार्य ने कहा कि स्कूल प्रबंधन द्वारा बनाये गये नियम के तहत काम किया जाता है.
ब्रिजफाेर्ड स्कूल : ब्रिजफोर्ड स्कूल में लिस्ट में नाम होने और स्कूल द्वारा निर्धारित अंक मिलने के बावजूद नामांकन नहीं कराने पर सिर्फ कॉशन मनी वापस की जाती है. वहीं लिस्ट में नाम होने व स्कूल द्वारा निर्धारित अंक नहीं मिलने के बावजूद छात्रों का एडमिशन लिया जाता है.
अभिभावक मंच शिक्षा न्यायाधिकरण में केस दर्ज करायेगा
झारखंड अभिभावक मंच के अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि रिजल्ट के पहले 11वीं कक्षा के लिए जो परीक्षा ली जाती है, वह गलत है. इसमें एक तरीके से स्कूल प्रबंधन छात्रों एवं अभिभावकों का मानसिक एवं आर्थिक दोहन करते है. जब परीक्षा परिणाम आने पर ही नामांकन होना सुनिश्चित होना है, तो पूर्व में इस तरह से नामांकन लेना धोखा है.
प्रतिशत के अाधार पर ही पहले आओ-पहले पाओ के फार्मूले पर नामांकन लेते हैं तो यह छात्रों का भी अधिकार है कि वह अपने हिसाब से स्कूल का चयन करें. इस मामले को लेकर मंच शिक्षा न्यायाधिकरण में जाकर उन स्कूलों के विरुद्ध केस दर्ज करायेगा, जिससे इस तरह का धंधा बंद हो.
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