रांची : बुनियादी नागरिक अधिकारों से वंचित हो रहीं विस्थापित महिलाएं

Updated at : 15 Mar 2019 7:43 AM (IST)
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रांची : बुनियादी नागरिक अधिकारों से वंचित हो रहीं विस्थापित महिलाएं

ज्ञापन में नेटवर्क से जुड़ीं 50 महिला कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर हैं आदिवासी और महिलाओं से जुड़े मुद्दों से अवगत कराया गया रांची : इंडीजिनस वीमेन इंडिया नेटवर्क की ओर से देश के आदिवासियों और महिलाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा की अध्यक्ष मारिया फर्नांडाे को ज्ञापन सौंपा गया है. […]

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ज्ञापन में नेटवर्क से जुड़ीं 50 महिला कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर हैं
आदिवासी और महिलाओं से जुड़े मुद्दों से अवगत कराया गया
रांची : इंडीजिनस वीमेन इंडिया नेटवर्क की ओर से देश के आदिवासियों और महिलाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा की अध्यक्ष मारिया फर्नांडाे को ज्ञापन सौंपा गया है. ज्ञापन में मुख्य रूप से विस्थापन, ट्रैफिकिंग, वन भूमि में पट्टा को लेकर किये गये दावे, भाषा संस्कृति, डायन प्रथा आदि मुद्दों को उठाया गया है.
ज्ञापन में नेटवर्क से जुड़ीं डॉ वासवी किड़ो, मनोरमा एक्का, सोनी सोरी, एलिना होरो, ममता कुजूर, पुनिया खलखो, रोजालिया तिर्की सहित 50 महिला कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर हैं.
ज्ञापन में जिक्र किया गया है कि देश में करीब 10 करोड़ लोग विकास के नाम पर विस्थापित हुए हैं. इनमें 80 प्रतिशत आदिवासी/इंडिजिनस लोग हैं. इनमें भी आधी संख्या महिलाओं की है और ये महिलाएं अपने बुनियादी नागरिक अधिकारों से वंचित हो रही हैं.
उन्हें पीने का साफ पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के लिए दर-दर भटकना पड़ता है. ऐसी महिलाएं/लड़कियां ट्रैफिकिंग की शिकार हो रही हैं. भाषा संस्कृति पर भी असर पड़ रहा है. ज्ञापन में कहा गया है कि विस्थापितों के लिए राष्ट्रीय आयोग की मांग लंबे समय से की जा रही है, ताकि उनका पुनर्वास हो सके.
विस्थापन के बिना विकास की अवधारणा बने : ज्ञापन में इस बिंदु को भी उठाया गया है कि विस्थापन के बिना विकास की अवधारणा बने. इसके लिए विकास के नये मॉडल को अपनाने की जरूरत है. ज्ञापन में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने 13 फरवरी के आदेश में वन भूमि में रह रहे एक मिलियन आदिवासियों को हटाने को कहा है.
इस आदेश पर तत्कालीन रोक लगी है, पर वनभूमि में रहने वाले लोगों के दावों का निष्पादन होना अभी भी बाकी है. ज्ञापन में वन विभाग को समाप्त कर सामाजिक वानिकी अौर वन्य प्राणी संरक्षण विभाग की स्थापना की बात भी कही गयी है. डायन प्रथा को एक बड़ी समस्या बताते हुए राष्ट्रीय स्तर पर डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम बनाने की बात कही गयी है.
साथ ही आदिवासी महिलाअों में कुपोषण का जिक्र करते हुए इसके लिए ठोस उपाय करने की जरूरत बतायी गयी है. इसके लिए कहा गया है कि इंडिजिनस सिस्टम ऑफ मेडिसिन/ट्राइबल मेडिसिन/ एथनो मेडिसिन को आयुष में शामिल किया जाये. संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने संबंधी बिल को संसद में पारित कराने की बात भी कही गयी है.
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