दलबदल पर फैसला: बची सदस्यता, भाजपा के हुए छह विधायक, जानिए अब आगे क्या होगा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Feb 2019 7:54 AM

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चार साल बाद दलबदल पर आया फैसला. विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव ने माना : विलय वैध रांची : झाविमो छोड़ कर भाजपा में शामिल होनेवाले छह विधायकों की सदस्यता बच गयी है़ चार वर्षों तक विधायक नवीन जायसवाल, अमर बाउरी, रणधीर सिंह, जानकी यादव और आलोक चौरसिया के खिलाफ चले दलबदल के मामले को स्पीकर […]

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चार साल बाद दलबदल पर आया फैसला. विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव ने माना : विलय वैध
रांची : झाविमो छोड़ कर भाजपा में शामिल होनेवाले छह विधायकों की सदस्यता बच गयी है़ चार वर्षों तक विधायक नवीन जायसवाल, अमर बाउरी, रणधीर सिंह, जानकी यादव और आलोक चौरसिया के खिलाफ चले दलबदल के मामले को स्पीकर दिनेश उरांव ने खारिज कर दिया है़
भाजपा में इनके विलय को वैध माना है़ बुधवार को इस मामले में स्पीकर ने फैसला सुनाते हुए कहा : तथ्यों व संवैधानिक प्रावधानों पर विचार करते हुए इस निर्णय पर पहुंचा हूं कि 10वीं अनुसूची के चार (दो) में विलय की शर्तों को पूरा करते है़ं विलय की सहमति प्रदान करता हू़ं विलय को वैध पाता हू़ं स्पीकर ने पांच मिनट के फैसला सुनाते हुए चार बिंदुओं की चर्चा की़ स्पीकर ने झाविमो अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी व प्रदीप यादव के उस आवेदन को अमान्य कर दिया, जिसमें छह विधायकों पर दलबदल का मामला चलाने का अनुरोध किया गया था़
स्पीकर ने अपने फैसले में कहा : वादी पक्ष के बाबूलाल मरांडी और प्रदीप यादव की याचिका निष्पादित हो गयी और निर्णय की काॅपी वादी-प्रतिवादी को उपलब्ध कर दी जायेगी़
इधर झाविमो ने स्पीकर के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की घोषणा कर दी है़ झाविमो अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि इस मामले में चुप नहीं बैठेंगे़
जल्द ही हाईकोर्ट जायेंगे़ 25 फरवरी 2015 से शुरू हुई सुनवाई में वादी (बाबूलाल मरांडी व प्रदीप यादव) पक्ष की दलील थी कि विधायक पार्टी छोड़ कर गये है़ं पार्टी के पदाधिकारियों का विलय नहीं हुआ है़ इनकी ओर से पार्टी संविधान का हवाला दिया गया़
वहीं प्रतिवादी पक्ष (छह विधायक) के विधायकों की दलील थी कि हम सभी झाविमो छोड़ कर नहीं आये, बल्कि पूरी पार्टी का विलय हुआ है़ इन्हीं दो बिंदुओं पर सुनवाई चली़ दोनों ओर से गवाह पेश किये गये़ पिछले वर्ष 12 दिसंबर को स्पीकर दिनेश उरांव के न्यायाधिकरण ने सुनवाई पूरा करते हुए फैसला सुरक्षित रखा था़
क्या कहती है 10वीं अनुसूची की धारा 4(2)
संविधान की 10वीं अनुसूची की धारा-4 में दो उपधाराएं हैं. 10वीं अनुसूची की धारा-4 में यह निर्धारित किया गया है कि किन-किन परिस्थितियों में एक दल के विधायकों द्वारा अपने दल से अलग होनेे या दूसरे दल में शामिल होने से उनकी सदस्यता नहीं समाप्त होगी.
– धारा 4(1) में यह कहा गया है कि किसी राजनीतिक दल का दूसरे दल में पूरी तरह विलय हो जाता है, तो उस दल के विधायकों की सदस्यता समाप्त नहीं होगी.
– अगर किसी पार्टी के सभी विधायक अपने मूल दल से अलग होने की घोषणा कर दूसरे दल में शामिल हो जायें या अपनी कोई नयी पार्टी बना लें, तो उन विधायकों की सदस्यता समाप्त नहीं होगी.
– धारा 4(2) में यह कहा गया है कि अगर किसी राजनीतिक दल के दो तिहाई (2/3) विधायक अपने मूल दल से अलग हो कर नया समूह बना लें या किसी दूसरे राजनीतिक दल में शामिल हो जायें, तो उनकी सदस्यता समाप्त नहीं होगी.
विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव ने अनुसूची-10 की धारा 4(2) के तहत जेवीएम के छह विधायकों को बीजेपी में शामिल होने को विधि सम्मत करार देते हुए उनकी सदस्यता समाप्त करने से इनकार कर दिया है. अध्यक्ष द्वारा जेवीएम के छह विधायकों के सिलसिले में अनुसूची-10 की धारा 4(2) के तहत विधायकों के भारतीय जनता पार्टी में विलय को सही करार देने के बाद भी झारखंड विकास मोर्चा का अस्तित्व कायम है.
क्या कहते हैं याचिकाकर्ता
स्पीकर के फैसले के खिलाफ कोर्ट जायेगा झाविमो
स्पीकर ने पांच मिनट में फैसला सुनाया, कहा
सारे तथ्यों व संवैधानिक प्रावधानों के सम्यक विचार के बाद विलय की सहमति प्रदान करता हू़ं विलय की शर्तों को पूरा किया गया है़ वैध पाता हूं
विधायक नवीन जायसवाल, गणेश गंझू, अमर कुमार बाउरी, आलोक चौरसिया, रणधीर सिंह, जानकी यादव के पार्टी विरोधी गतिविधियों और कार्यों के कारण सदस्यता रद्द करने के अनुरोध को अमान्य करता हू़ं
वादी पक्ष के बाबूलाल मरांडी और प्रदीप यादव की याचिका को निष्पादित घोषित करता हू़ं
वादी व प्रतिवादी पक्ष को निर्णय की कॉपी उपलब्ध करा दी जाएगी़
इन दो बिंदुओं पर चली सुनवाई
1. झाविमो : झाविमो अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी और विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने अलग-अलग याचिका दायर कर स्पीकर दिनेश उरांव से दलबदल की 10वीं अनुसूची के तहत झाविमो से भाजपा जानेवाले विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी़
2. छह विधायक : झाविमो नहीं छोड़ा है, पूरी पार्टी का विलय हुआ है़ दो तिहाई से अधिक विधायक और पार्टी पदाधिकारी भाजपा में विलय कर गये है़ं
अब आगे क्या
बाबूलाल मरांडी व प्रदीप यादव हाईकोर्ट गये, तो संविधान
और दलबदल कानून की विवेचना होगी़
10वीं अनुसूची में कोर्ट नहीं, स्पीकर को ही फैसला लेना है़ कोर्ट का कोई भी निर्णय आये, तो आने वाले समय में ऐसी परिस्थिति में स्पीकर को ही फैसला करना है़
स्पीकर ने विलय को वैध माना, ऐसे में फैसले से राहत पाने वाले छह विधायक झाविमो के अस्तित्व पर सवाल उठाते हुए, चुनाव आयोग जा सकते है़ं
विशेषज्ञ बताते हैं कि 10वीं अनुसूची में यह भी प्रावधान है कि जनप्रतिनिधि सहित पार्टी के पदाधिकारियों को विलय हो जाये और एक भी सदस्य पुरानी पार्टी में रहना चाहता है, तो वह रह सकता है़ पुरानी पार्टी का अस्तित्व रहता है़
क्या कहते हैं याचिकाकर्ता
काला दिन, राजनीतिक दबाव में फैसला : बाबूलाल
झाविमो अध्यक्ष और याचिकाकर्ता बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि लोकतंत्र के लिए काला दिन है़ स्पीकर से ऐसे गलत निर्णय की उम्मीद नहीं थी़ अध्यक्ष को अगर ऐसा ही फैसला देना था, तब चार वर्षों तक मामले को क्यों लटकाए रखा़
दल-बदल के मामले में यह फैसला भारतीय संविधान की 10वीं अनुसूची के खिलाफ है़ श्री मरांडी ने कहा कि स्पीकर ने भाजपा और सरकार के राजनीतिक दबाव में ऐसा फैसला दिया है़ हम चुप बैठनेवाले नहीं है़ं जल्द ही उच्च न्यायालय जायेंगे.
पूरे देश में भाजपा लोकतांत्रिक मर्यादाओं का हनन कर रही है़ हमारे विधायकों को पद और पैसे का प्रलोभन देकर भाजपा में शामिल कराया गया है़
बदनाम हुआ झारखंड : प्रदीप
झाविमो विधायक दल के नेता व याचिकाकर्ता प्रदीप यादव ने कहा है कि स्पीकर का निर्णय संविधान की भावना के विपरित है़ संविधान को ताक पर रख कर निर्णय दिया गया है़ सरकार के दबाव में निर्णय कराया गया है़
अपना चेहरा बचाने के लिए सरकार ने ऐसा निर्णय कराया है़ पूरे देश में झारखंड की जगहंसाई हुई है़ पूरे देश में झारखंड बदनाम हुआ है़ लोकतंत्र की हत्या की गयी है़ संविधान की धज्जियां उड़ायी गयी है़ं
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