झामुमो ने बैद्यनाथ राम को बनाया राज्यसभा उम्मीदवार, दूसरे प्रत्याशी की घोषणा बाकी
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 06 Jun 2026 2:03 PM
झामुमो के वरिष्ठ नेता बैद्यनाथ राम.
Rajya Sabha Election: झारखंड मुक्ति मोर्चा ने राज्यसभा चुनाव के लिए वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है. दूसरे प्रत्याशी के नाम पर अभी मंथन जारी है. शनिवार शाम तक दूसरे उम्मीदवार की घोषणा होने की संभावना जताई जा रही है. राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
रांची से आनंद मोहन की रिपोर्ट
Rajya Sabha Election: झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के बीच उम्मीदवारों के चयन को लेकर मंथन जारी है. इसी बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने शनिवार को अपने दो संभावित उम्मीदवारों में से एक नाम पर मुहर लगा दी है. पार्टी सूत्रों के अनुसार, झामुमो के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक बैद्यनाथ राम को राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाने का फैसला किया गया है. हालांकि दूसरे उम्मीदवार के नाम को लेकर अभी भी पार्टी स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है.
शनिवार शाम तक दूसरे नाम की घोषणा की संभावना
सूत्रों के मुताबिक झामुमो नेतृत्व दूसरे प्रत्याशी के नाम पर सहमति बनाने में जुटा हुआ है. संभावना जताई जा रही है कि शनिवार शाम तक दूसरे उम्मीदवार के नाम की भी आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी. राज्यसभा चुनाव को देखते हुए महागठबंधन के घटक दलों के बीच लगातार बैठकों और विचार-विमर्श का दौर जारी है.
तीन बार विधायक रह चुके हैं बैद्यनाथ राम
बैद्यनाथ राम झारखंड की राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा हैं. वह लातेहार विधानसभा क्षेत्र का तीन बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. लातेहार विधानसभा सीट से अब तक बैद्यनाथ राम तीन बार और प्रकाश राम दो बार विधायक चुने जा चुके हैं. दोनों नेताओं के बीच इस सीट पर कई बार सीधा मुकाबला देखने को मिला है. झारखंड राज्य गठन के बाद जब तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की सरकार गिर गई थी, तब लातेहार (अनुसूचित जाति) विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराया गया था. उस उपचुनाव में जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए बैद्यनाथ राम ने जीत हासिल की थी और पहली बार विधानसभा पहुंचे थे.
2019 में झामुमो के टिकट पर दर्ज की थी जीत
वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में बैद्यनाथ राम ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था. इस चुनाव में उन्हें कुल 76,507 वोट प्राप्त हुए थे. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी प्रकाश राम को हराकर जीत दर्ज की थी. इस जीत के साथ उन्होंने एक बार फिर लातेहार विधानसभा क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत साबित की थी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहने और विभिन्न चुनावों में लगातार मजबूत उपस्थिति बनाए रखने के कारण पार्टी नेतृत्व ने उन्हें राज्यसभा के लिए उपयुक्त उम्मीदवार माना है.
2014 में प्रकाश राम के खाते में गई थी सीट
वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में लातेहार सीट पर कुल 13 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था. इनमें 12 पुरुष प्रत्याशी शामिल थे. उस चुनाव में झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) के उम्मीदवार प्रकाश राम ने सबसे अधिक 71,189 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी. बाद में राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के साथ इस सीट पर मुकाबले का समीकरण भी बदलता गया.
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राज्यसभा चुनाव को लेकर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
राज्यसभा चुनाव की घोषणा के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. महागठबंधन और एनडीए दोनों ही अपने उम्मीदवारों के चयन को लेकर रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं. ऐसे में झामुमो द्वारा बैद्यनाथ राम के नाम पर सहमति बनाए जाने को पार्टी के महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसले के रूप में देखा जा रहा है. अब सबकी नजर दूसरे उम्मीदवार के नाम पर टिकी हुई है, जिसकी घोषणा जल्द होने की संभावना जताई जा रही है.
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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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