बकोरिया मुठभेड़ मामले में सीबीआइ ने रेजी डुंगडुंग व हेमंत टोप्‍पो से पूछताछ की,

Updated at : 08 Feb 2019 8:03 AM (IST)
विज्ञापन
बकोरिया मुठभेड़ मामले में सीबीआइ ने रेजी डुंगडुंग व हेमंत टोप्‍पो से पूछताछ की,

प्रणव रांची : पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र के बकोरिया में आठ जून 2015 को हुए कथित पुलिस-नक्सली मुठभेड़ की जांच दिल्ली सीबीआइ ने तेज कर दी है. इस कड़ी में सीआइडी के तत्कालीन एडीजी रहे रेजी डुंगडुंग अौर पलामू के डीआइजी रहे हेमंत टोप्पो से सीबीआइ की टीम ने गुरुवार को काली बाबू स्ट्रीट […]

विज्ञापन
प्रणव
रांची : पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र के बकोरिया में आठ जून 2015 को हुए कथित पुलिस-नक्सली मुठभेड़ की जांच दिल्ली सीबीआइ ने तेज कर दी है.
इस कड़ी में सीआइडी के तत्कालीन एडीजी रहे रेजी डुंगडुंग अौर पलामू के डीआइजी रहे हेमंत टोप्पो से सीबीआइ की टीम ने गुरुवार को काली बाबू स्ट्रीट स्थित आर्थिक शाखा में पूछताछ की. दोनों अधिकारियों से अलग-अलग पूछताछ की गयी. जानकारी के मुताबिक हेमंत टोप्पो ने सीबीआइ को बताया कि वे घटना के दिन नेतरहाट से पलामू लौटे थे. रात में सो रहे थे. रात के एक बजे के करीब लगातार तीन बार डीजीपी डीके पांडेय का उन्हें फोन आया, लेकिन उन्हें पता नहीं चला.
फिर आवास में तैनात कर्मी ने आकर बताया कि डीजीपी साहब बात करना चाह रहे हैं. फिर उन्होंने डीजीपी से फोन पर बात की. डीजीपी ने कहा : देख लो, मुठभेड़ हुई है.
मुठभेड़ पलामू में हो सकती है या लातेहार में. इसके बाद लातेहार एसपी अजय लिंडा को फोन किया, तो उन्होंने बताया कि उन्हें अपने क्षेत्र में हुए किसी तरह के मुठभेड़ की जानकारी नहीं है. फिर मैंने पलामू एसपी रहे कन्हैया मयूर पटेल को फोन किया. उसने कहा : मुझे भी जानकारी नहीं थी. डीजीपी साहब ने फोन कर जानकारी दी है.
मैं आइजी ए नटराजन साहब को लेकर मौके पर जा रहा हूं. फिर मैंने सतबरवा के थानेदार को फोन किया. उसने भी कहा कि दूर में गोली चलने जैसी अावाज सुनाई पड़ी है. सुबह में जब बकोरिया पहुंचा, ताे वहां पहले से लातेहार और पलामू के एसपी मौजूद थे. बातचीत के क्रम में दाेनाें कह रहे थे कि इस तरह से मुठभेड़ नहीं हो सकती है.
हेमंत टोप्पो ने सीबीआइ से कहा : मैंने भी देखा कि एक साथ 12 शवों को सजा कर रखा गया था. सभी काे कमर से ऊपर और गर्दन से नीचे गोलियां लगी थीं. इसमें से तीन-चार मृतक नाबालिग लग रहे थे.
आसपास घूमने पर कहीं पर भी खून का धब्बा नजर नहीं आया. जमीन और पेड़-पौधे देख कर भी मुठभेड़ के संकेत नहीं मिले. घटना के अगले दिन डीजीपी सुबह करीब 11 बजे अन्य अफसरों के साथ पलामू आये. इस दौरान जवानों ने जिंदाबाद के नारे लगाये. डीजीपी ने उस समय पुरस्कार के तौर पर तीन लाख रुपये बांटे.
इनमें से एक लाख रुपये पलामू एसपी कन्हैया मयूर पटेल को, एक लाख कमांडेंट और एक लाख कोबरा बटालियन को दिये. करीब तीन बजे सीआरपीएफ के तत्कालीन डीजी भी आये. मुश्किल से एक मिनट रहे और फिर मौके से चले गये. पूरे घटनाक्रम पर मैं नजर रखा हुआ था. मुझे कुछ गड़बड़ लगा, तो मैंने डीजीपी, सीआइडी एडीजी और पलामू के आइजी को अपनी बातों से अवगत कराया. उनसे कहा कि मुठभेड़ सही प्रतीत नहीं हो रही है.
हेमंत टाेप्पाे ने सीबीआइ से कहा : एक बजे रात में डीजीपी ने फोन पर मुठभेड़की दी जानकारी, एसपी को नहीं था पता, सजा कर रखे गये थे 12 शव
रेजी डुंगडुंग से भी ली जानकारी
सीबीआइ के अफसरों ने इसी मामले में सीआइडी के तत्कालीन एडीजी रहे रेजी डुंगडुंग से भी जानकारी ली. उन्हें जितनी सूचना मिली थी, उससे सीबीआइ के अफसरों को रू-ब-रू कराया. यह भी बताया कि घटना के कुछ दिनों बाद ही उनका तबादला हो गया था.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola