रांची : 350 बसों को फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं 550 पुरानी बसों के परिचालन पर रोक

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Aug 2018 12:22 AM

विज्ञापन

परिवहन विभाग का नियम बना रोड़ा पहले नियम नहीं बने थे, तो एमवीआइ व बस संचालकों की सहमति से जारी कर दिया जाता था फिटनेस सर्टिफिकेट रांची : परिवहन विभाग के नियम से ट्रांसपोर्टरों के समक्ष परेशानी खड़ी हो गयी है. जानकार बताते हैं कि एक तरफ विभाग शर्ताें को पूरा नहीं करने के कारण […]

विज्ञापन
परिवहन विभाग का नियम बना रोड़ा
पहले नियम नहीं बने थे, तो एमवीआइ व बस संचालकों की सहमति से जारी कर दिया जाता था फिटनेस सर्टिफिकेट
रांची : परिवहन विभाग के नियम से ट्रांसपोर्टरों के समक्ष परेशानी खड़ी हो गयी है. जानकार बताते हैं कि एक तरफ विभाग शर्ताें को पूरा नहीं करने के कारण करीब 550 पुरानी बसों को फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं दे रहा है.
वहीं लगभग 350 नयी बसों को भी नये नियम का हवाला देकर फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं दे रहा. इनमें स्‍लीपर बसों के अलावा सामान्‍य यात्री बसें भी शामिल हैं. दिसंबर तक और भी बसों की फिटनेस अवधि समाप्त होगी. इन बसों का भी फिटनेस सर्टिफिकेट दोबारा जारी नहीं होने पर बसों की संख्या में और कमी आ सकती है. इस बाबत पूछे जाने पर विभागीय अधिकारी कहते हैं कि पिछले दिनों हुई बैठक में बस संचालकों की यह बातें सामने आयी है. इसके हर पहलू पर विचार किया जा रहा है.
नियम बनने से बढ़ी परेशानी
पूर्व में स्‍लीपर बसों के लिए परिवहन विभाग की ओर से स्पष्ट गाइड लाइन नहीं था. बस संचालकों व एमवीआइ की आपसी सहमति से फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता था. लेकिन पांच जुलाई 2018 को परिवहन विभाग की ओर से बस ट्रांसपोर्ट के लिए नयी गजट जारी की गयी. इसमें तय नियम ने बस संचालकों की परेशानी बढ़ा दी है.
नये मापदंड के अनुरूप नयी बसें नहीं हो सकतीं तैयार
स्लीपर बस तैयार करने का एकमात्र लाइसेंस भारत सरकार द्वारा जयपुर के दामोदर बॉडी बिल्डर को दिया गया है. हमारे राज्य में जो बसें चल रही हैं या जो नयी बसें तैयार हुई हैं, वह पूर्व के परिवहन सचिव के मौखिक आदेश के तहत बनायी गयी हैं.
मुख्यमंत्री महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत राज्य में 500 एसी बसों को तैयार कर जनता के लिए दी गयी है. लेकिन इसका ऑनर बुक एसी की जगह साधारण बस का दिया गया है. एक बॉडी निर्माता देश के सभी राज्यों में चलने वाली बसों का निर्माण कैसे करेगा. दूसरे राज्यों में स्थानीय स्तर पर तैयार बॉडी को ही राज्य सरकारों द्वारा अप्रूव कर फिटनेस सर्टिफिकेट दिया जा रहा है. जबकि झारखंड में ऐसा नहीं किया जा रहा है.
बस ट्रांसपोर्ट के लिए देनी होगी जानकारी
परिवहन विभाग की ओर से दो जुलाई को सभी जिलों के डीटीओ और एमवीआइ को निर्देश जारी किया गया था. इसमें 13 अप्रैल 2018 को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना गजट संख्‍या 240 का पालन सुनिश्चित कराने को कहा गया था. गजट के अनुसार बस की बॉडी निर्माण से जुड़ी सभी तरह की जानकारी वाहन.एनआइसी.इन/मेकरमोडल की साइट पर अपलोड करनी होगी. इसके बाद केंद्र सरकार बस की बॉडी डिजाइन और नियमों के पालन को अप्रूव करेगा.
बस का ढांचा, चेचिस, चेचिस के निर्माता, इंजन नंबर, व्‍हील बेस, चेचिस का भार, लंबाई, चौड़ाई, ऊंचाई, फ्रंट ओवरहेड, रियर ओवरहेड, सर्विस, इसका प्रकार का विवरण, इंजन मेक और मॉडल, इंजन की स्थिति, ईंधन का प्रकार, दरवाजों की संख्‍या, प्रकार, खिड़कियों के प्रकार व संख्‍या, खिड़कियों की स्थिति, गार्ड रेलिंग, आपातकालीन निकास की स्थिति जैसी कई जानकारी देना अनिवार्य है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola