पतरातू के डाडीडीह तालाब में घाट होगा निर्माण, किया गया शिलान्यास
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 13 Apr 2026 6:00 PM
पतरातू डाडीडीह तालाब का शिलान्यास करतीं मुखिया निधि सिंह व अन्य. फोटो: प्रभात खबर
Patratu News: पतरातू के डाडीडीह तालाब में घाट निर्माण का शिलान्यास हुआ, लेकिन पंचायत में गहराते जल संकट ने चिंता बढ़ा दी है. चापाकल खराब हैं और पाइपलाइन से पानी नहीं मिल रहा. जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की है, नहीं तो आंदोलन की चेतावनी दी गई है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
पतरातू से अजय तिवारी की रिपोर्ट
Patratu News: पतरातू प्रखंड की ग्राम पंचायत कोतो स्थित डाडीडीह तालाब में घाट निर्माण कार्य का विधिवत शिलान्यास किया गया. यह कार्य 15वें वित्त आयोग मद से लगभग 8 लाख 8 हजार 310 रुपये की लागत से कराया जाएगा. जिला परिषद सदस्य राजा राम प्रजापति और मुखिया निधि सिंह ने संयुक्त रूप से पूजा-अर्चना कर निर्माण कार्य की शुरुआत की.
ग्रामीणों को मिलेगी बड़ी सहूलियत
घाट निर्माण से डाडीडीह गांव के ग्रामीणों को काफी सुविधा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. तालाब का उपयोग दैनिक जरूरतों, धार्मिक कार्यों और अन्य गतिविधियों के लिए होता है, ऐसे में घाट बनने से लोगों को सुरक्षित और व्यवस्थित स्थान मिलेगा. जनप्रतिनिधियों ने इसे गांव के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया.
जल संकट पर जनप्रतिनिधियों ने जताई चिंता
शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान पंचायत में गहराते जल संकट का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया. जिला परिषद सदस्य राजा राम प्रजापति ने कहा कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की 36 करोड़ रुपये की योजना पूरी तरह विफल साबित हो रही है. उन्होंने बताया कि पंचायत में केवल मुख्य पाइपलाइन बिछाई गई है और लगभग 35 घरों में कनेक्शन भी दिया गया है, लेकिन अब तक पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है.
उपायुक्त से हस्तक्षेप की मांग
राजा राम प्रजापति ने बढ़ती गर्मी को देखते हुए उपायुक्त से इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने की मांग की. उनका कहना था कि यदि जल्द ही जलापूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया, तो ग्रामीणों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपील की.
खराब चापाकलों ने बढ़ाई परेशानी
मुखिया निधि सिंह ने बताया कि पंचायत के अधिकांश चापाकल खराब पड़े हैं और उनमें पाइप बदलने की आवश्यकता है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द मरम्मत नहीं हुई, तो गर्मी के दिनों में जल संकट और गहरा जाएगा. उन्होंने साफ कहा कि समस्या का समाधान नहीं होने पर वे प्रखंड मुख्यालय में अनिश्चितकालीन धरना देंगी.
ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश
वरीय कांग्रेसी और समाजसेवी जयप्रकाश सिंह ‘ननकी’ ने बताया कि पानी की समस्या को लेकर पिछले सप्ताह सैकड़ों ग्रामीण प्रखंड मुख्यालय पहुंचे थे, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी.
विकास योजनाओं की भी मिली जानकारी
कार्यक्रम के दौरान पंचायत में प्रस्तावित अन्य विकास योजनाओं की जानकारी भी दी गई. बताया गया कि बिरहोर कॉलोनी में जल्द ही आंगनबाड़ी केंद्र का शिलान्यास किया जाएगा. इसके अलावा कटिया और डाडीडीह उच्च विद्यालय को प्लस टू में अपग्रेड करने तथा शाही टांड़ में जलमीनार निर्माण की योजना भी प्रस्तावित है.
जनप्रतिनिधि और ग्रामीण रहे उपस्थित
इस मौके पर पंचायत समिति सदस्य वीणा देवी, उपमुखिया उमा देवी, पूर्व मुखिया सीता राम महतो सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे. बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भागीदारी ने कार्यक्रम को सफल बनाया.
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विकास और समस्या के बीच संतुलन की जरूरत
घाट निर्माण जहां विकास की दिशा में एक सकारात्मक पहल है, वहीं जल संकट की समस्या ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस गंभीर समस्या का समाधान कब तक करता है, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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