इटखोरी में बदहाल 108 एम्बुलेंस, स्ट्रेचर पर रस्सी से बांधे जाते हैं मरीज

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :13 Apr 2026 5:06 PM (IST)
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Chatra News

इटखोरी अस्पताल में खड़ा जर्जर एंबुलेंस. फोटो: प्रभात खबर

Chatra News: इटखोरी में 108 एम्बुलेंस की बदहाल स्थिति सामने आई है, जहां ऑक्सीजन, हेडलाइट और अन्य जरूरी सुविधाएं वर्षों से खराब हैं. मरीजों को जोखिम में डालकर अस्पताल पहुंचाया जा रहा है. बार-बार शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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इटखोरी से विजय शर्मा की रिपोर्ट

Chatra News: झारखंड के चतरा जिले के इटखोरी प्रखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत एक बार फिर सामने आई है. यहां मरीजों की आपातकालीन सेवा के लिए उपलब्ध 108 एम्बुलेंस खुद ही आपात स्थिति में नजर आ रही है. एम्बुलेंस की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि इसे इस्तेमाल करना मरीजों की जान जोखिम में डालने जैसा है. हालत यह है कि एंबुलेंस के स्ट्रेचर पर मरीजों को रस्सी से बांधकर अस्पताल तक पहुंचाया जाता है.

खटारा हो चुकी एम्बुलेंस, सुविधाएं पूरी तरह ठप

स्थानीय लोगों और एम्बुलेंस कर्मियों के अनुसार, यह वाहन पूरी तरह जर्जर हो चुका है. एम्बुलेंस में पिछले एक साल से ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं है, जो किसी भी आपात स्थिति में सबसे जरूरी संसाधन होता है. इसके अलावा हेडलाइट खराब है, पंखा और एसी काम नहीं करते, और वाहन की सीढ़ी भी टूट चुकी है.

तकनीशियन ने बताई गंभीर स्थिति

एम्बुलेंस में नियुक्त तकनीशियन (ईएमटी) अमन कुमार यादव ने बताया कि यह एम्बुलेंस सिर्फ नाम के लिए है. उन्होंने कहा कि इस वाहन से मरीजों को ले जाना उनके जीवन के साथ खिलवाड़ करने जैसा है. एम्बुलेंस में मौजूद जीवन रक्षक उपकरण पूरी तरह निष्क्रिय हो चुके हैं और यह वाहन सिर्फ एक ढांचा बनकर रह गया है.

एंबुलेंस के टायर और हेडलाइट खराब

तकनीशियन ने बताया कि एम्बुलेंस के तीन टायर खराब हैं और हेडलाइट काम नहीं करती. ऐसे में रात के समय मरीजों को अस्पताल पहुंचाना बेहद मुश्किल हो जाता है. कई बार हजारीबाग रेफर के दौरान मोबाइल फोन की रोशनी का सहारा लेना पड़ता है. यह स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है.

एंबुलेंस का स्ट्रेचर

एम्बुलेंस का स्ट्रेचर भी टूट चुका है, जिससे मरीजों को सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है. कई बार मरीजों को स्ट्रेचर पर रस्सी से बांधकर अस्पताल ले जाना पड़ता है. इसके अलावा पीछे की सीढ़ी टूटने के कारण मरीजों को चढ़ाने और उतारने में भी भारी परेशानी होती है.

बार-बार शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई

एम्बुलेंस कर्मियों का कहना है कि इस समस्या की जानकारी कई बार विभाग के वरीय अधिकारियों को दी गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. ऐसे में मरीजों को भगवान भरोसे अस्पताल पहुंचाया जा रहा है.

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने दी सफाई

इस मामले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुमित जायसवाल ने कहा कि 108 एम्बुलेंस उनके अधीन नहीं आती है. यह सेवा राज्य स्तर से संचालित होती है और इसकी देखरेख की जिम्मेदारी राज्य मुख्यालय की है.

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स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने इटखोरी की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आपातकालीन सेवाओं की ऐसी स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि आम जनता की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है. अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस पर कब तक ठोस कदम उठाता है.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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