दो करोड़ से बना एकमात्र सरकारी कोल्ड स्टोर का उद्घाटन नहीं, लाखों के उपकरण खराब

Author : Pritish Sahay Published by : Prabhat Khabar Updated At : 13 Jun 2020 1:13 AM

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रामगढ़ जिले में कोल्ड स्टोर की काफी कमी है. जिला के गोला, चितरपुर, दुलमी व मांडू प्रखंड सब्जी उत्पादन का हब माना जाता है. कोल्ड स्टोर नहीं रहने से किसान सब्जियों को रख नहीं पाते हैं. फलस्वरूप किसानों को काफी कम मूल्य पर सब्जियों को बेचना पड़ता है.

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सुरेंद्र कुमार/शंकर पोद्दार, चितरपुर : चितरपुर प्रखंड का एक मात्र सरकारी कोल्ड स्टोर उद्घाटन की बाट जोह रहा है. यहां किसानों की सब्जियों को रखने का सपना भी अधूरा रह गया है. जानकारी के अनुसार, कल्याण विभाग ने इस कोल्ड स्टोर का शिलान्यास 24 दिसंबर 2006 में कराया था. इसका निर्माण कार्य नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड ने दो करोड़ 20 लाख रुपये की लागत से किया था.

वर्ष 2016 में कंस्ट्रक्शन ने कोल्ड स्टोर को हैंड ओवर कर दिया. हैंड ओवर के चार वर्ष बीतने के बाद भी अब तक कोल्ड स्टोर का उद्घाटन नहीं हो पाया है. यहां लाखों रुपये की लागत से लगे उपकरण भी खराब हो गये हैं.

कोल्ड स्टोर के अंदर लगाये गये लकड़ी के उपकरण खराब हो रहे हैं. कई उपकरण गायब हो गये हैं. अगर यह कोल्ड स्टोर खुलता, तो इस क्षेत्र के किसान इसका लाभ लेते. गोला, चितरपुर व दुलमी प्रखंड क्षेत्र में व्यापक रूप से आलू व अन्य सब्जियों की खेती की जाती है. कोल्ड स्टोर की कमी के कारण किसानों को काफी परेशानी हो रही है.

निजी कोल्ड स्टोर में किसान रखते हैं आलू

गोला व चितरपुर में एक-एक निजी कोल्ड स्टोर है. यहां किसान अपने आलू को रखते हैं. गोला के कमता स्थित पद्मावती कोल्ड स्टोर में प्रति क्विंटल आलू रखने के लिए 208 रुपये और चितरपुर के मारंगमरचा स्थित मां छिन्नमस्तिका कोल्ड स्टोर में प्रति क्विंटल आलू रखने के लिए 217 रुपये किसानों से लिये जाते हैं. किसानों का कहना है कि अगर मारंगमरचा में बने सरकारी कोल्ड स्टोर खुलता, तो यहां अनुदानित दर पर आलू रखा जाता. इससे इस क्षेत्र के किसानों को लाभ मिलता.

जिले में छह कोल्ड स्टोर हैं, लेिकन तीन ही चालू हैं

चितरपुर के मारंगमरचा में मां छिन्नमस्तिका कोल्ड स्टोर, गोला के कमता में पद्मावती कोल्ड स्टोर व कुजू में राधाकृष्ण कोल्ड स्टोरेज हैं. तीनों कोल्ड स्टोर निजी हैं. यहां इस क्षेत्र के किसान अपनी सब्जियों को रखते हैं. गोला के हरिहर साहू कोल्ड स्टोर, गोला कोल्ड स्टोर व रांची रोड स्थित पाटनी कोल्ड स्टोर बंद हो गया है.

दस फीसदी आलू भी कोल्ड स्टोर में नहीं रख पाते हैं

क्षेत्र के किसानों का कहना है कि रामगढ़ जिला में लगभग पांच लाख क्विंटल से अधिक आलू की खेती होती है. दस फीसदी आलू भी कोल्ड स्टोर में नहीं रख पाते हैं. गोला के कमता स्थित पद्मावती कोल्ड स्टोर में एक लाख 20 हजार पैकेट, मारंगमरचा स्थित मां छिन्नमस्तिका कोल्ड स्टोर में एक लाख पैकेट और कुजू के राधाकृष्ण कोल्ड स्टोर में 50 हजार पैकेट आलू रखने की क्षमता है.

सब्जियों को रखने के लिए कोल्ड स्टोर होना चाहिए : किसान

व्यवसायी सह किसान लखींद्र कुशवाहा का कहना है कि गोला में व्यापक रूप से खेती होती है. यहां सिर्फ आलू ही नहीं, अन्य सब्जियों को रखने का भी स्टोर होना चाहिए. किसान रचिया महतो का कहना है कि रामगढ़ जिला में कोल्ड स्टोर की काफी कमी है. आलू का जब उत्पादन होता है, उस समय हमलोग सस्ती दर पर बेच देते हैं. बाद में आलू का दाम बढ़ जाता है. अगर आलू को कोल्ड स्टोर में रखेंगे, तो मुनाफा अधिक होगा.

जांच करायी जायेगी : जिला कल्याण पदाधिकारी

रामगढ़ जिला कल्याण पदाधिकारी रामेश्वर चौधरी ने कहा कि कोल्ड स्टोर की जानकारी हमें नहीं है. यह मेरे आने से पहले का मामला है. लॉकडाउन के कारण फिलहाल सभी कर्मचारी दूसरे स्थानों पर कार्य कर रहे हैं. इनके वापस आते ही इस कोल्ड स्टोर की जांच करायी जायेगी.

विभागीय समीक्षा के बाद होगी पहल : कृषि मंत्री

चितरपुर. झारखंड के कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि कोल्ड स्टोर का अब तक उद्घाटन क्यों नहीं हो पाया है. इसकी रिपोर्ट मंगायी जायेगी. रिपोर्ट आने के बाद विभागीय स्तर पर समीक्षा की जायेगी. इसके बाद इसे शुरू कराने के लिए पहल की जायेगी. मंत्री श्री पत्रलेख ने कहा कि रामगढ़ जिला में कृषि की काफी उपज होती है. इसे देखते हुए कई कोल्ड स्टोर खुलवाने की योजना है.

Posted by : Pritish Sahay

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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