पेट्रोल-डीजल महंगा होने के बाद तेल कंपनियों को राहत, रोज का घाटा ₹1,000 करोड़ से घटकर ₹600 करोड़ हुआ

Published by : Abhishek Pandey Updated At : 25 May 2026 6:39 PM

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Oil Companies Loss : पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने के बाद सरकारी तेल कंपनियों को बड़ी राहत मिली है. उनका रोज का घाटा ₹1,000 करोड़ से घटकर ₹600 करोड़ पर आ गया है. जानिए पेट्रोलियम मंत्रालय का क्या कहना है.

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Oil Companies Loss : हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जो लगातार बढ़ोतरी हुई है, उससे भले ही आम जनता की जेब पर बोझ बढ़ा हो, लेकिन सरकारी तेल कंपनियों को इससे बहुत बड़ी राहत मिली है.

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव (Joint Secretary) सुजाता शर्मा ने सोमवार को बताया कि चार किस्तों में पेट्रोल-डीजल के दाम करीब ₹7.5 प्रति लीटर बढ़ने से सरकारी तेल कंपनियों का दैनिक घाटा काफी कम हो गया है. मंत्रालय के मुताबिक, अब इन कंपनियों का रोज का नुकसान घटकर लगभग ₹600 करोड़ प्रतिदिन रह गया है, जो पहले के मुकाबले काफी कम है.

दाम बढ़ने से पहले रोजाना हो रहा था ₹1,000 करोड़ का नुकसान

संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि 15 मई से जब तेल की कीमतों में बदलाव (मूल्य संशोधन) शुरू नहीं हुआ था, तब इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और घरेलू रसोई गैस (LPG) बेचने पर हर दिन करीब ₹1,000 करोड़ का भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ रहा था. दामों में हुई इस ताजा बढ़ोतरी के बाद अब यह घाटा हर दिन ₹600 करोड़ से थोड़ा कम रह गया है.

रसोई गैस (LPG) पर भी शामिल है घाटा

LPG पर सब्सिडी: सुजाता शर्मा ने साफ किया कि इस ₹600 करोड़ के दैनिक घाटे में घरेलू एलपीजी (रसोई गैस) की बिक्री पर होने वाला नुकसान भी शामिल है. चूंकि घरेलू रसोई गैस आज भी रियायती दरों (कम दाम) पर बेची जाती है, इसलिए इसकी असली लागत और रिटेल प्राइस (खुदरा बिक्री मूल्य) के बीच का जो भी अंतर होता है, उसे सरकार खुद वहन करती है.

क्यों पैदा हुआ था घाटे का यह संकट ?

नियम के मुताबिक, भारत में पेट्रोल और डीजल ‘बाजार आधारित मूल्य’ वाले उत्पाद हैं. यानी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) के दाम जैसे चलेंगे, भारत में भी कीमतें वैसी ही होनी चाहिए. लेकिन ईरान युद्ध के कारण जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 50 फीसदी से भी ज्यादा बढ़ गईं, तब भी भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने देश में खुदरा कीमतों को लंबे समय तक नहीं बदला था. राजनीतिक और चुनावी संवेदनशीलता के कारण कीमतों को रोककर रखा गया था, जिसकी वजह से कंपनियों का घाटा लगातार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचता चला गया. अब उसी घाटे की भरपाई के लिए कीमतों में यह फेरबदल किया जा रहा है.

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By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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