टोल प्लाजा पर FASTag काम नहीं कर रहा? NHAI ने बताया क्या करना चाहिए

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fastag not working at toll plaza

फास्टैग टोल प्लाजा (Photo: NETC)

अगर आपका FASTag टोल प्लाजा पर सही से काम नहीं कर रहा है, तो वजह सिर्फ सिस्टम नहीं बल्कि टैग की हालत भी हो सकती है. धूप, धूल या समय के साथ यह खराब हो सकता है. ऐसे में समय रहते बैंक से नया FASTag लेना ही बेहतर तरीका है.

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अगर आपका FASTag एक्टिव होने के बावजूद टोल प्लाजा पर बार-बार गाड़ी रुक रही है, तो जरूरी नहीं कि गलती टोल सिस्टम की ही हो. कई बार असली वजह आपका FASTag भी हो सकता है. हाल ही में NHAI ने लोगों को चेतावनी देते हुए बताया है कि खराब या घिस चुके FASTag की वजह से स्कैनिंग में दिक्कत आती है. इसकी वजह से टोल प्लाजा पर लंबी लाइनें लग जाती हैं. NHAI के मुताबिक, तेज धूप और डेली की वजह से FASTag समय के साथ डैमेज हो सकता है. ऐसे में टोल पर लगे स्कैनर उसे सही तरीके से पढ़ नहीं पाते, और फिर बेवजह देरी का सामना करना पड़ता है.

FASTag खराब क्यों हो जाता है?

  • बार-बार विंडशील्ड साफ करना: अगर आप गाड़ी के शीशे को ज्यादा रगड़कर साफ करते हैं या तेज केमिकल वाले क्लीनर इस्तेमाल करते हैं, तो FASTag के अंदर लगी RFID चिप खराब हो सकती है.
  • धूप, धूल और बारिश का असर: लंबे समय तक तेज गर्मी, धूल-मिट्टी और बारिश झेलने से FASTag की पकड़ कमजोर पड़ जाती है और उसके अंदर के पार्ट्स भी खराब होने लगते हैं.
  • पुराना FASTag: हर FASTag की एक लाइफ होती है. कई साल यूज करने के बाद यह धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है और सही तरीके से काम करना बंद कर सकता है.

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FASTag कब बदलना चाहिए?

अगर आपका FASTag FASTag पांच साल से ज्यादा पुराना हो चुका है, तो उसे रिप्लेस कर देना बेहतर रहेगा. खराब या पुराना FASTag सफर को बेवजह परेशान कर सकता है. कई बार अकाउंट में बैलेंस होने के बावजूद भी टोल पर रुकावट पैदा हो जाती है. इसलिए स्मूद और टेंशन-फ्री ट्रैवल के लिए समय रहते FASTag बदल लेना चाहिए.

गाड़ी मालिकों को क्या करना चाहिए?

  • NHAI का कहना है कि ऐसे सिचुएशन में आपको तुरंत अपने बैंक से कॉन्टैक्ट करके नया FASTag मंगवा लेना चाहिए.
  • एक खराब या डैमेज FASTag सिर्फ टोल प्लाजा पर परेशानी ही नहीं बढ़ाता, बल्कि आपकी यात्रा का समय भी खराब कर सकता है. ऊपर से टोल लेन में लंबी लाइन और बार-बार रुकने की दिक्कत अलग होती है.
  • अब जब देशभर के हाईवे पर धीरे-धीरे बैरियर-लेस टोल्लिंग और MLFF जैसे नए सिस्टम लागू हो रहे हैं, तब सही तरीके से काम करने वाला FASTag पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है.

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Ankit Anand

लेखक के बारे में

By Ankit Anand

शॉर्ट बायो

अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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