बाक्स में ) राजेश के सरपरस्त ही बने हैं जान के दुश्मन

Published at :25 Oct 2015 8:30 PM (IST)
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बाक्स में ) राजेश के सरपरस्त ही बने हैं जान के दुश्मन

बाक्स में ) राजेश के सरपरस्त ही बने हैं जान के दुश्मन -पहले सुशील गुट के लिए करता था काम-जानलेवा हमले के बाद पांडेय गिरोह का बन गया हिमायती-अब सुशील गुट बन गया है उसकी जान का दुश्मनभुरकुंडा.सुशील श्रीवास्तव गुट आज सयाल पोड़ा गेट निवासी जिस राजेश राम के जान का दुश्मन बना हुआ है. […]

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बाक्स में ) राजेश के सरपरस्त ही बने हैं जान के दुश्मन -पहले सुशील गुट के लिए करता था काम-जानलेवा हमले के बाद पांडेय गिरोह का बन गया हिमायती-अब सुशील गुट बन गया है उसकी जान का दुश्मनभुरकुंडा.सुशील श्रीवास्तव गुट आज सयाल पोड़ा गेट निवासी जिस राजेश राम के जान का दुश्मन बना हुआ है. एक समय यही राजेश इस क्षेत्र में सुशील गुट का सबसे करीबी व खास माना जाता था. राजेश की गिनती कोयलांचल क्षेत्र में सुशील के पैर जमानेवालों में होती है. राजेश की पहचान 12-13 वर्ष पूर्व टुनटुन सिंह, सकरूल्लाह व रवींद्र सिंह के बलबूते कोयलांचल में हुई थी. टुनटुन व सकरूल्लाह के जोड़ी की दबंगता पांडेय गिरोह को हमेशा खटकता रहता था. यही कारण रहा कि एक के बाद एक पांडेय गिरोह ने योजनाबद्ध तरीके से सभी को मार दिया. करीब आठ वर्ष पूर्व पांडेय गुट द्वारा सकरूल्लाह की दिनदहाड़े की गयी हत्या के बाद राजेश ने अपनी सक्रियता कम कर दी और अंडरग्राउंड रहने लगा. इसी बीच वह रामगढ़ के दो वरीय पुलिस अधिकारियों के संपर्क में आया. चंद दिनों में ही राजेश अपराधियों खास कर पांडेय गिरोह की गतिविधियों की जानकारी देकर दोनों पुलिस अधिकारियों का विश्वासपात्र बन गया. आसानी से पैसा आया, तो सुशील गुट से तोड़ लिया नाता.पुलिसिया व्यवस्था की बदौलत आसानी से पैसा आया, तो राजेश ने सुशील गुट से अपना पुराना नाता तोड़ लिया. पुलिस अधिकारियों ने इस बात का भी फायदा उठाया और सुशील गुट के कई राज भी उससे लिये. जिस पर कार्रवाई कर सुशील गुट को भी पुलिस ने कोयलांचल में कमजोर कर दिया. वरीय पुलिस अधिकारियों से नजदीकी के कारण उस वक्त रामगढ़ जिले के हर थाने में राजेश की तूती बोलने लगी थी.रामगढ़ के टायर मोड़ में हुआ था जानलेवा हमला. राजेश की इस कार्यशैली से पांडेय गिरोह सख्त नाराज था और उसे मारने की योजना बना डाली. पुलिस से नजदीकी के कारण वह पांडेय गिरोह के कोप से लगातार बचता रहा. तभी उक्त दोनों पुलिस अधिकारियों का बारी-बारी रामगढ़ से तबादला हो गया. पांडेय गिरोह को तो मानो बस इसी पल का इंतजार था. आज से करीब चार वर्ष पूर्व मौका देख अकेला पड़े राजेश राम पर पांडेय गिरोह के कारिंदे ने रामगढ़ के टायर मोड़ पर जानलेवा हमला कर दिया. राजेश की किस्मत अच्छी थी, गोली उसके गर्दन को छिलते हुए निकल गयी. उसकी जान तो बच गयी, लेकिन वो इस घटना के बाद सहम गया.हमले के बाद पांडेय गिरोह से बढ़ी नजदीकी.बदलते घटनाक्रम ने राजेश की पांडेय गुट से नजदीकियां बढ़ा दी. वह आगे चल कर किशोर पांडेय का खास बन गया. पांडेय गिरोह को भी उस वक्त कोयलांचल में अपनी तेजी से गिरती पैठ को बनाये रखने के लिए राजेश जैसे लाइजनर की जरूरत थी. राजेश के पांडेय गिरोह में काम करने की हामी के बाद आसानी से समझौता हो गया. तब से राजेश इस क्षेत्र में पांडेय गिरोह के लिए काम करने लगा. राजेश की पैठ क्षेत्र में पूर्व से ही थी, इसलिए उसे जमने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई. लेकिन उसके जैसे-जैसे पैर जमे, सुशील गुट के पैर क्षेत्र से उखड़ने लगे. लिहाजा सुशील गुट उससे नाराज हो गया. लेकिन सुशील से अच्छे रिश्ते व उसके गुट के कुछ पुराने साथियों में पैठ के कारण इस गुट की ओर से उसे जान का खतरा नहीं हुआ. लेकिन जब सुशील श्रीवास्तव मारा गया तो यह बंदिश टूट गयी. राजेश पर सुशील गुट की निगाह टेढ़ी हो गयी और वे उसके जान के दुश्मन बन गये. 21 अक्तूबर को सीसीएल सौंदा में हुआ हमला उसी पुराने गुनाहों की कड़ी है, जिसमें राजेश तो बच गया लेकिन उसका शागिर्द ब्रजेश मारा गया.

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