तंगहाली में जी रहे हैं टाना भगत
Updated at : 20 Sep 2019 3:16 AM (IST)
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सरकार ने टाना भगत प्राधिकार का गठन किया है, लेकिन अब तक नहीं मिला लाभ आज भी राष्ट्रीय ध्वज को पूजते हैं और गांधी को मानते हैं आदर्श लोहरदगा : महात्मा गांधी के अनुयायी कहे जानेवाले गांधी वादी टाना भगत आज गुमनामी व तंगहाली की जिंदगी जी रहे हैं. सादा जीवन जाने व उच्च विचार […]
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सरकार ने टाना भगत प्राधिकार का गठन किया है, लेकिन अब तक नहीं मिला लाभ
आज भी राष्ट्रीय ध्वज को पूजते हैं और गांधी को मानते हैं आदर्श
लोहरदगा : महात्मा गांधी के अनुयायी कहे जानेवाले गांधी वादी टाना भगत आज गुमनामी व तंगहाली की जिंदगी जी रहे हैं. सादा जीवन जाने व उच्च विचार रखने वाले ये लोग आज खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं. आत्म स्वाभिमान के धनी टाना भगत अभी भी डीसी व अंचल ऑफिस में आवेदन लेकर दिखायी देते हैं. उनकी मूल समस्या जमीन विवाद है.
उनकी जमीन को लोगों ने अवैध तरीके से हथिया लिये हैं. लेकिन कई लोगों के पास दस्तावेज नहीं है और सरकारी कार्यालयों में दलाली के आगे वे लोग टिक नहीं पाते हैं. सरकार ने टाना भगत प्राधिकार का गठन किया है, लेकिन अभी तक जिले के टाना भगतों को कोई लाभ नहीं मिला हैं. किस्को प्रखंड में टाना भगतों की संख्या 368 हैं. वे लोग 44 परिवार के सदस्य हैं.
उनके पास अभी भी रहने के लिए पक्का मकान नहीं है व गोल्डेन कार्ड नहीं बना है. प्रखंड में सबसे अधिक टाना भगत की संख्या खरकी पंचायत के सेमरडीह गांव में है. यहां पर टाना भगत के 28 परिवार रहते हैं. वहीं कोचा में पांच परिवार, बंजारी में दो परिवार व खरकी में दो परिवार रहते हैं. इसमें से सेमरडीह में मुन्ना टाना भगत, धर्म सहाय टाना भगत, आनंद टाना भगत, आनंद टाना भगत, बुढ़ेश्वर, आजाद, रोशन, चंदमनी, मंगल, सुरेश, पही, गोवर्धन, देवकी, बिरसा, बिरसू, महावीर, दुर्गा, कर्मवीर, सुखराम, विनोद, लक्ष्मण, सतनू, बुद्धदेव, नारायण, सीताराम टाना भगत व पंचायत के अन्य गांवों को मिला कर लगभग 37 परिवार के टाना भगत रहते हैं. इसमें मात्र एक परिवार कर्मवीर को ही आवास मिला है.
जबकि 27 परिवार को अभी तक आवास योजना के तहत आवास नहीं मिला है. गांव के बुढ़ेश्वर व विनोद टाना भगत के परिवार जर्जर घर में रहने को मजबूर हैं. उनलोगों का कहना है कि किसी तरह घर परिवार का भरण-पोषण चल रहा है. जर्जर आवास में रहने में परेशानी होती है. बारिश में घर में रहने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. उनलोगों का अभी तक गोल्डेन कार्ड भी नहीं बनाया गया है. टाना भगत आज भी राष्ट्रीय ध्वज की पूजा करते हैं और गांधी को अपना आदर्श मानते हैं. लेकिन गरीबी, तंगहाली व सरकारी उपेक्षा ने उन्हें निराश किया है.
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