नीलगायों को महुआडांड़ में स्थानांतरित करना हास्यास्पद

पलामू व गढ़वा के नीलगायों को पकड़ कर पलामू टाइगर रिजर्व के महुआडांड़ प्रक्षेत्र में भेजने के पीसीसीएफ के द्वारा दिये गये निर्देश पर स्थानीय लोगों ने नाराजगी जाहिर की है.
तसवीर-19 लेट-5 नीलगाय बेतला. पलामू व गढ़वा के नीलगायों को पकड़ कर पलामू टाइगर रिजर्व के महुआडांड़ प्रक्षेत्र में भेजने के पीसीसीएफ के द्वारा दिये गये निर्देश पर स्थानीय लोगों ने नाराजगी जाहिर की है. लोगों का कहना है कि पलामू टाइगर रिजर्व का इलाका नीलगायों के लिए उपयुक्त नहीं है. यह घना जंगल है जिसके वातावरण में नीलगाय रहना पसंद नहीं करते हैं. वहीं अब नीलगायों को फसल चट करने की आदत बन चुकी है. ऐसे में यदि नीलगायों को इस इलाके में छोड़ा जाता है तो वह आसपास के निकटवर्ती गांव में घुसकर न केवल फसल को बर्बाद करेंगे बल्कि अन्य तरह से भी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा. वैसे भी पलामू टाइगर रिजर्व के निकटवर्ती गांव के लोग हाथी सहित अन्य जंगली जानवरों के द्वारा फसल बर्बाद किये जाने से परेशान हैं.नीलगाय से जंगल के अन्य जंगली जानवर भी असहज महसूस करेंगे. जिसके कारण यहां का शांत वातावरण में काफी बदलाव आयेगा जो पलामू टाइगर रिजर्व के लिए बेहतर नहीं होगा. ज्ञात हो कि नीलगाय से पलामू व गढ़वा के किसान परेशान हैं. ये खेती को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा रहे हैं. जिसके कारण किसानों ने खेती करना छोड़ दिया है. इसलिए बोमा तकनीक से ट्रेंकुलाइज कर महुआडांड़ क्षेत्र में स्थानांतरित करने का निर्देश पीसीसीएफ के द्वारा दिया गया है. पलामू टाइगर रिजर्व में नीलगायों की संख्या नहीं के बराबर है. इसका कारण यह बताया जाता है कि नीलगाय इस वातावरण में रहना पसंद नहीं करते हैं. यदि जबरन उन्हें यहां लाया जाता है तो निश्चित रूप से उन्हें यहां रहना नागवार गुजरेगा और वह आसपास के इलाके में चले जायेंगे. हास्यास्पद है निर्णय पुनर्विचार करें विभाग: डीएस श्रीवास्तव पर्यावरण विशेषज्ञ डॉक्टर डीएस श्रीवास्तव ने कहा कि पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके में नीलगायों को छोड़ने का निर्णय पूरी तरह से हास्यास्पद और चिंताजनक है. वन विभाग के पदाधिकारी को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए. वर्तमान समय में जिस क्षेत्र में नीलगाय हैं इस क्षेत्र में उनसे निपटने के के क्या उपाय हैं इस पर काम करना चाहिए.
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