जिला में संगठित तरीके से लूटी जा रही आदिवासियों की जमीन

आदिवासी समन्वय समिति के तत्वावधान में मंगलवार को डीसी कार्यालय के समक्ष धरना दिया गया.
खूंटी. आदिवासी समन्वय समिति के तत्वावधान में मंगलवार को डीसी कार्यालय के समक्ष धरना दिया गया. धरना में भ्रष्ट अधिकारियों तथा भू-माफियाओं के खिलाफ जम कर नारेबाजी की गयी. धरना को संबोधित करते हुए विभिन्न वक्ताओं ने आरोप लगाया कि जिले में संगठित तरीके से आदिवासी जमीनों की लूट हो रही है, जिस पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए. समिति के प्रतिनिधि मार्शल बारला ने कहा कि खूंटी, झारखंड का आदिवासी-मूलवासी बहुल जिला है, यह भारतीय संविधान की धारा 244(1) के तहत पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र तथा सीएनटी एक्ट 1908 के दायरे में आता है. उन्होंने कहा कि छोटानागपुर क्षेत्र को मुंडाओं ने बिरसा मुंडा के नेतृत्व में स्थापित किया था और यहां सदियों से पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था कायम है. बावजूद इसके हाल के वर्षों में कुछ माफियाओं और भ्रष्ट पदाधिकारियों की मिलीभगत से जमीन विवाद तेजी से बढ़े हैं. वक्ताओं ने छोटानागपुर भू-धृति अधिनियम 1869, सीएनटी एक्ट 1908, बिहार भूमि सुधार अधिनियम 1950-56 तथा पेसा कानून 1996 का उल्लेख करते हुए कहा कि इन कानूनों के बावजूद आदिवासी भूमि का अवैध हस्तांतरण जारी है. उन्होंने आरोप लगाया कि रिकॉर्ड में हेरफेर कर गैर-आदिवासियों के नाम जमीन दर्ज की जा रही है. समिति ने मांग की कि अवैध जमीन हस्तांतरण की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाये तथा ग्राम सभा के अधिकारों को सुनिश्चित किया जाये. वक्ताओं ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन और तेज किया जायेगा. धरना प्रदर्शन के पश्चात मांगों से डीसी को ज्ञापन सौंपा गया. धरना में दामू मुंडा, चंद्र प्रभात मुंडा,बिनसाय मुंडा, बहा लिंडा, सैमुअल पूर्ति, भोला पहन, चार्ल्स पहन, जॉनसन होरो, मांगू मुंडा, विंसेंट संगा आदि सहित सैकड़ो की संख्या में आदिवासी महिला पुरुष शामिल थे.
डीसी कार्यालय के समक्ष आदिवासी समन्वय समिति ने दिया धरना
माफिया व अधिकारी कर रहे हैं आदिवासी भूमि का अवैध हस्तांतरण
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