कुपोषण केंद्र में तीन माह में 30 बच्चों ने कुपोषण से पायी मुक्ति

Updated at : 27 Jun 2024 9:40 PM (IST)
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कुपोषण केंद्र में तीन माह में 30 बच्चों ने कुपोषण से पायी मुक्ति

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में बने कुपोषण उपचार केंद्र से विगत तीन माह में 30 बच्चों ने कुपोषण से मुक्ति पायी है.

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नारायणपुर. प्रखंड मुख्यालय के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में बने कुपोषण उपचार केंद्र से विगत तीन माह में 30 बच्चों ने कुपोषण से मुक्ति पायी है. विदित हो कि सरकार की मनसा है कि बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलायी जाय. इसके लिए कई प्रकार के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. कुपोषण उपचार केंद्र भी उसी कार्यक्रम का एक अंग है. कुपोषण उपचार केंद्र तक पहुंचना बहुत आसान है. आंगनबाड़ी सेविकाएं अपने पोषक क्षेत्र के कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर इसकी सूचना कुपोषण उपचार केंद्र को देती हैं. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम कुपोषित बच्चों से मुलाकात कर उन्हें कुपोषण उपचार केंद्र में लाने के लिए प्रेरित करती है. यहां लाकर कुपोषित बच्चों का नियमित रूप से उपचार, भोजन व देखभाल किया जाता है. नारायणपुर के कुपोषण उपचार केंद्र में 10 बेड हैं. कुपोषण उपचार केंद्र में कार्यरत एएनएम चिंता कुमारी ने बताया कि केंद्र में आने वाले बच्चों की पूरी तरह से ख्याल रखा जाता है. कुपोषित बच्चों को हर 2 घंटे में डाइट दी जाती है. हर 1 घंटे में जांच होती है. किसी प्रकार की परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सक से सलाह ली जाती है, जब कुपोषित बच्चों का वजन 15 प्रतिशत या उससे अधिक बढ़ जाता है तो उसे घर जाने दिया जाता है. कुपोषित बच्चे के साथ रहने वाली उसकी माता को प्रतिदिन 130 रुपये दिए जाते हैं. इसके अलावा उन्हें भोजन, नाश्ता आदि भी दिया जाता है. कुपोषण उपचार केंद्र में तीन महीने में 30 बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाई गयी है. इस महीने अभी तक आठ बच्चे कुपोषण उपचार केंद्र में उपचाररत हैं. केंद्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम है. बच्चों के भोजन बनाने के लिए प्रशिक्षित रसोइया है. मनोरंजन के लिए टेलीविजन एवं खेलकूद की सामग्री भी है. न्यूट्रीशन काउंसलर भी होती है. लेकिन इधर दो-तीन महीने से उनका हस्तांतरण हो गया है. कुपोषण उपचार केंद्र में कार्य करने वाली एएनएम व अन्य कर्मियों को नियमित रूप से प्रशिक्षण होता है. यह प्रशिक्षण रांची में होता है. कहते हैं एमओआइसी कुपोषण उपचार केंद्र में बच्चों की बहुत अच्छे तरीके से देखभाल होती है. मैं खुद प्रतिदिन बच्चों की जांच करता हूं. किसी प्रकार के अस्वस्थ होने पर उचित सलाह एवं दवा दी जाती है.क्षेत्र के लोगों से अपील है कि अपने आसपास के कुपोषित बच्चों को केंद्र भेजें. – डॉ अमरेंद्र कुमार सिंह, एमओआइसी

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