झारखंड में बनेगा एक और एयरपोर्ट, विकास को मिलेगी रफ्तार, 3 राज्यों को होगा फायदा

3 राज्यों के लिए गेमचेंजर साबित होगा धालभूमगढ़ एयरपोर्ट.
New Airport To Jharkhand: झारखंड को जल्द ही एक और एयरपोर्ट की सौगात मिलने वाली है. पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त ने पिछले दिनों एक समीक्षा बैठक में संबंधित विभागों (वन विभाग, राजस्व, अंचल, अनुमंडल और अन्य विभागों) को स्थानीय लोगों के साथ समन्वय बनाकर चरणबद्ध और समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने का निर्देश दिया. उपायुक्त ने कहा कि प्रभावित परिवारों को पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ उचित मुआवजा दें.
New Airport in Jharkhand: झारखंड को जल्द ही एक और एयरपोर्ट की सौगात मिलने वाली है. यह एयरपोर्ट पूर्वी सिंहभूम में बनेगा. इसका लाभ 3 राज्यों के लोगों को होगा. झारखंड की विकास को रफ्तार मिलेगी. परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण और वन विभाग से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लेने की प्रक्रिया तेज कर दी गयी है. पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त ने पिछले दिनों एक समीक्षा बैठक की, जिसमें धालभूमगढ़ एयरपोर्ट पर ध्यान केंद्रित करते हुए सुरदा, राखा, केंदाडीह माइंस, फुलडुंगरी रोड, एचसीएल अस्पताल के जीर्णोद्धार और अन्य योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की.
प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दें – डीसी
उपायुक्त ने संबंधित विभागों (वन विभाग, राजस्व, अंचल, अनुमंडल और अन्य विभागों) को स्थानीय लोगों के साथ समन्वय बनाकर चरणबद्ध और समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने का निर्देश दिया. उपायुक्त ने कहा कि प्रभावित परिवारों को पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ उचित मुआवजा दें.
धालभूमगढ़ में बनेगा इंटरनेशनल एयरपोर्ट
उपायुक्त ने बताया कि धालभूमगढ़ में जो एयरपोर्ट बनना है, वह इंटरनेशनल एयरपोर्ट होगा. इससे पूर्वी सिंहभूम जिले को नयी उड़ान मिलेगी. क्षेत्र का विकास तेज होगा. इस एयरपोर्ट का शिलान्यास 6 साल पहले 24 जनवरी 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास और केंद्रीय उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने किया था. पूर्वी सिंभूम का दूसरा एयरपोर्ट जमशेदपुर से 60 किलोमीटर दूर धालभूमगढ़ में बनेगा.
2020 में 72 सीटर विमान चलाने का था लक्ष्य
वर्ष 2020 तक इस एयरपोर्ट पर 72 सीटर विमानों को चलाने का लक्ष्य था. एयरपोर्ट के निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपए का बजट तय हुआ था. हालांकि, बाद में वन विभाग और एलीफैंट कॉरिडोर का पेच सामने आया और एयरपोर्ट का निर्माण रुक गया. अब उपायुक्त ने वन विभाग से जल्द से जल्द अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी लेने का निर्देश संबंधित विभागों के अधिकारियों को दिया है, ताकि एयरपोर्ट का निर्माण तेजी से हो सके.
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79000 पेड़ और 99 हेक्टेयर भूमि के पेच में फंसा एयरपोर्ट
पूर्वी सिंहभूम के धालभूमगढ़ एयरपोर्ट की राह में 79,000 पेड़ और 99 हेक्टेयर भूमि का रोड़ा है. जुलाई 2024 में झारखंड वन एवं पर्यावरण विभाग ने 99.256 हेक्टेयर वन भूमि देने की मंजूरी तो दे दी, लेकिन उसके साथ एक शर्त जोड़ दी थी. कहा था कि उसे 99.256 हेक्टेयर भूमि के बदले उतनी ही भूमि उपलब्ध करायी जाये.
पर्यावरण मंत्रालय ने 19 बिंदुओं पर मांगा था स्पष्टीकरण
सितंबर 2024 में केंद्रीय वन पर्यावरण मंत्रालय ने विभाग से 19 बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा. इसमें 79,332 पेड़ काटने के पर्यावरणीय प्रभाव और स्थानीय लोगों को लाभ जैसे मुद्दे शामिल थे. उपायुक्त ने कहा कि इस विषय का जल्द से जल्द हल किया जाये. ग्राम सभा की प्रक्रिया पूरी करें और भूमि चिह्नित करें. साथ ही प्रतिपूरक वनरोपण के लिए उपयुक्त स्थान की तलाश भी करें. वन प्रमंडल पदाधिकारी सबा आलम अंसारी को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गयी.
धालभूमगढ़ एयरपोर्ट के क्या होंगे फायदे?
धालभूमगढ़ एयरपोर्ट सिर्फ जमशेदपुर ही नहीं, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों के लिए अहम साबित होगा. यह एयरपोर्ट जमशेदपुर से करीब 60 किलोमीटर और धालभूमगढ़ रेलवे स्टेशन से 5 किमी की दूरी पर है. इस एयरपोर्ट का निर्माण पूरा हो जाने से टाटा स्टील, टाटा मोटर्स जैसी बड़ी कंपनियों और छोटे-मध्यम उद्यमों को लाभ होगा. रांची और कोलकाता पर निर्भरता कम होगी. पहले चरण में 240 एकड़ में 1,745 मीटर का रन-वे, टर्मिनल बिल्डिंग, एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर और फायर स्टेशन बनेगा, जो एटीआर-72 जैसे विमानों के लिए उपयुक्त होगा. दूसरे चरण में 545 एकड़ और जमीन लेकर रन-वे को 4,400 मीटर तक विस्तारित किया जायेगा.
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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