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Jamshedpur News: घास की खेती कर मालामाल हो रहे किसान, थाईलैंड से मंगाया सुपर नेपियर घास

Updated at : 13 Aug 2024 10:23 PM (IST)
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Jamshedpur News: घास की खेती कर मालामाल हो रहे किसान, थाईलैंड से मंगाया सुपर नेपियर घास

Jamshedpur News: घास उगाकर जिले के किसान अब लखपति बन रहे हैं. जिले में ऐसे कई किसान अपने खेतों में इस तरह के वैकल्पिक खेती पर फोकस कर रहे हैं. कम पानी में उगने वाली यह घास किसानों को अच्छा मुनाफा भी दे रही है.

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Jamshedpur News: घास उगाकर जिले के किसान अब लखपति बन रहे हैं. जिले में ऐसे कई किसान अपने खेतों में इस तरह के वैकल्पिक खेती पर फोकस कर रहे हैं. कम पानी में उगने वाली यह घास किसानों को अच्छा मुनाफा भी दे रही है. इन घासों को इस्तेमाल चारा और सजावट के रूप में किया जाता है. पटमदा और बोड़ाम के अलावा जमशेदपुर प्रखंड के गोड़गोड़ा और भिलाई पहाड़ी इलाके के किसानों ने इसकी खेती की है. इससे वे लोग मासिक एक लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं. इस तरह के घास की खेती करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है.

थाईलैंड से मंगाया सुपर नेपियर घास, अब कमा रहे हैं लाख

पटमदा के खेरुआ गांव के रहने वाले गोपेन कुंभकार ने थाईलैंड से सुपर नेपियर घास मंगाया. अपने घर के बाहर करीब 15 एकड़ में इसकी खेती शुरू की. नेपियर घास 15 फीट लंबी होती है. हर दो माह में इसकी कटाई की जाती है. यह घास लगने के बाद उक्त जमीन का जलस्तर बढ़िया रहता है. बताया जाता है कि गोपेन कुंभकार 8 लाख रुपये कर्ज में था, लेकिन दस माह में उसने अपना कर्ज चुकता कर लिया. उसने बताया कि 95 एकड़ जमीन लीज पर सरकार से ली है, जिस पर वह खेती कर रहे हैं. यह घास बहुत पौष्टिक होती है. इसे खिलाने से दुधारू पशुओं में दूध उत्पादन क्षमता बढ़ जाती है. यही वजह है कि इसकी डिमांड काफी है.

एक बीघा फसल में 40 हजार का मुनाफा

नरेश किस्कू की यह खेती भी किसानों के लिए बन गया उदाहरण जमशेदपुर प्रखंड के अंतर्गत आने वाले गोरगोरा के रहने वाले नरेश किस्कू ने एक खास किस्म की घास पैदा की. इस घास में न तो रोग कीट लगने का खतरा है और ना ही छुट्टा पशु इसे खाते हैं. सजावट के काम आने वाली यह घास दिल्ली, राजस्थान, पंजाब के आलिशान होटलों और विवाह मंडपों तक की शोभा बढ़ा रही है. इसकी खेती से एक बीघा फसल पर 40 हजार रुपये तक का मुनाफा मिल रहा है. मुराया घास की खेतीकर वे मालामाल हो चुके हैं. उसने बताया कि उसने ट्रेनिंग में जाना कि ऐसी भी खेती हो सकती है. लिहाजा, हमने इस तरह की खेती की, अब बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं.

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