फूलझोर जंगल में है बाघ : वन विभाग

Updated at : 13 Jan 2020 10:03 AM (IST)
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फूलझोर जंगल में है बाघ : वन विभाग

गालूडीह : वन विभाग ने बंगाल सीमा से सटे घाटशिला प्रखंड की झाटीझरना पंचायत के फूलझोर (कायराडीह) के पास बोगदा पहाड़ पर बाघ के होने की पुष्टि की है. इस पहाड़ पर मैगनीज पत्थर खनन के कई सुरंग और गुफा हैं. उक्त सुरंगों के आसपास व डाइनमारी के पास बांदरचुआ पहाड़ की तलहटी में भी […]

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गालूडीह : वन विभाग ने बंगाल सीमा से सटे घाटशिला प्रखंड की झाटीझरना पंचायत के फूलझोर (कायराडीह) के पास बोगदा पहाड़ पर बाघ के होने की पुष्टि की है. इस पहाड़ पर मैगनीज पत्थर खनन के कई सुरंग और गुफा हैं. उक्त सुरंगों के आसपास व डाइनमारी के पास बांदरचुआ पहाड़ की तलहटी में भी बाघ के पंजे के निशान मिले हैं. कायराडीह के दास मुंडा के एक बैल के गायब होने व दूसरे बैल के जख्मी होने की भी वन विभाग ने जांच की.

जख्मी बैल की गर्दन के पास बाघ के पंजे के निशान मिले हैं. इसकी तसवीर लेकर वन विभाग ने डीएफओ कार्यालय भेजवाया है.
असमंजस में शिक्षक व कर्मचारी: पहाड़ की तलहटी के स्कूलों में कार्यरत सरकारी कर्मचारी और शिक्षक भी बाघ के होने की सूचना से चिंतित हैं. काशीडांगा निवासी पारा शिक्षक बंकिम चंद्र महतो और टेरापानी निवासी पारा शिक्षक कृतिवास महतो मिर्गीटांड़ प्रावि में कार्यरत हैं.
दोनों बाइक से जंगल और पहाड़ी रास्ते पार कर स्कूल जाते हैं. इन शिक्षकों ने कहा कि वन विभाग जंगलों में जाने से मना कर रहा है. ऐसे में हम लोग कैसे स्कूल जायेंगे. श्यामनेगी, भुमरू, झाटीझरना, बालीडीह आदि स्कूलों में पदस्थापित शिक्षक भी चिंतित हैं. उक्त स्कूलों के बच्चों में भी भय है. सोमवार को स्कूल खुलेगा, तो बच्चे और शिक्षक आते हैं या नहीं, यह पता चलेगा.
साल पत्ता नहीं ला पा रहे हैं ग्रामीण : मकर के वक्त पीठा बनाने के लिए साल पत्तों की मांग बाजार व हाट में होती है. ग्रामीण साल पत्ता तोड़कर बेचते हैं. परंतु बाघ के जंगल में होने की खबर से कोई जंगल नहीं जा रहा है.
वनरक्षियों की टीम फूलझोर पहुंची
घाटशिला के रेंजर के आदेश पर रविवार को वनरक्षियों की एक टीम फूलझोर गांव पहुंची. टीम ने माइक से प्रचार कर ग्रामीणों को अलर्ट किया. टीम ने फूलझोर, भुमरू, कायराडीह, श्यामनेगी, टेरापानी, काशीडांगा, डाइनमारी, बासाडेरा आदि गांव के लोगों को अकेले घने जंगलों में जाने से मना किया है. साथ ही सर्तकता बरतने को कहा है.
ग्रामीणों ने जंगल जाना छोड़ा
इधर झारखंड के फूलझोर, कायराडीह, श्यामनेगी, भुमरू, टेरापानी, काशीडांगा, मिर्गीटांड़, बासाडेरा, डाइनमारी आदि गांव के लोगों ने शनिवार से जंगल जाना छोड़ दिया है. इसी तरह पश्चिम बंगाल के जुगीडीह, पोचापानी, लुकापानी, बूढ़ीबाजार, आसनपानी आदि गांव के लोग दहशत में हैं. शाम के बाद घर से बाहर निकलने में परहेज कर रहे हैं. वे बैल-बकरियों को घर में रख रहे हैं. शाम ढलने के पूर्व अधिकांश पर्यटक बुरूडीह डैम से लौट गये.
ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम ने फूलझोर, कायराडीह, डाइनमारी से सटे पहाड़ों पर जांच की. कायराडीह और बांदरचुआ के पास पंजे के निशान मिले. कायराडीह के एक किसान दास मुंडा का एक बैल गायब है.
दूसरे बैल की गर्दन में जख्म मिले थे. विशेषज्ञ से जांच के बाद इस बात की पुष्टि हुई है कि इस जंगल में बाघ है. पुष्टि के बाद वन विभाग ने प्रचार कर ग्रामीणों को अलर्ट किया है. बाघ का लोकेशन फूलझोर से बांदरचुआ के बीच जंगल में मिला. जंगल में कैमरे लगाने व सर्च करने का आदेश ऊपर से नहीं मिला है.
दिनेश प्रसाद, रेंजर, घाटशिला
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