45 डिग्री तापमान में भी रहेंगे कूल-कूल, दिल्ली-NCR के ट्रैफिक पुलिसकर्मी पहनेंगे एसी हेलमेट

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Delhi Traffic Police AC Helmet

एसी हेलमेट पहना हुआ एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी, फोटो- एएनआई

Delhi Traffic Police AC Helmet: दिल्ली-एनसीआर में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ओर से ट्रैफिक कर्मियों को राहत देने के लिए हाईटेक एसी हेलमेट का ट्रायल शुरू किया है. यह खास कूलिंग हेलमेट सिर के आसपास का तापमान 8 से 12 डिग्री तक कम करने में मदद करेगा.

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Delhi Traffic Police AC Helmet: दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने राजधानी में पड़ रही भीषण गर्मी को देखते हुए अपने कर्मियों के लिए खास पहल शुरू की है. दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने के बीच पुलिस ने व्यस्त चौराहों पर तैनात ट्रैफिक कर्मियों को सौर ऊर्जा और बैटरी से चलने वाले कूलिंग हेलमेट यानी एसी हेलमेट देने की योजना बनाई है. हालांकि अभी इसे प्रायोगिक तौर पर ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को दिया गया है.

प्रमुख चौराहों पर शुरू हुआ ट्रायल

इस नई पहल के तहत तीन मूर्ति गोलचक्कर समेत कई व्यस्त ट्रैफिक प्वाइंट्स पर तैनात कर्मियों को विशेष कूलिंग हेलमेट और पोर्टेबल पंखे दिए गए हैं. साथ ही जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत पानी और ओआरएस भी उपलब्ध कराया जा रहा है.

8 से 12 डिग्री तक कम करेगा तापमान

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह नया हेलमेट बैटरी से चलने वाले तापमान नियंत्रण तंत्र से लैस है. तकनीकी जानकारी के अनुसार यह सिर के आसपास का तापमान बाहरी वातावरण की तुलना में 8 से 12 डिग्री सेल्सियस तक कम कर सकता है.

लू और डिहाइड्रेशन से बचाने की कोशिश

पुलिस का कहना है कि भीषण गर्मी में लंबे समय तक ड्यूटी करने वाले कर्मियों के लिए सिर शरीर का सबसे संवेदनशील हिस्सा होता है. वर्दी और सुरक्षा उपकरणों के कारण हवा का प्रवाह भी सीमित हो जाता है. ऐसे में ये कूलिंग हेलमेट लू और निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) के खतरे को कम करने में मदद करेंगे.

पोर्टेबल पंखे और टेबल वेंटिलेटर भी दिए गए

हेलमेट के अलावा, ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को बैटरी से चलने वाले हैंड फैन, कॉलर फैन और पोर्टेबल टेबल वेंटिलेटर भी दिए गए हैं, ताकि ट्रैफिक बूथ और गोलचक्करों पर उन्हें गर्मी से राहत मिल सके.

पानी, ORS और टिन शेड की भी व्यवस्था

प्रायोगिक कार्यक्रम के तहत ट्रैफिक प्वाइंट्स पर ठंडा पीने का पानी और ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्ट (ORS) मुहैया कराया जा रहा है. इसके अलावा, धूप और धूल भरी आंधी से बचाव के लिए कई जगहों पर अस्थायी टिन के शेड भी लगाए गए हैं.

पूरे शहर में लागू होगी योजना

अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल यह योजना ट्रायल आधार पर लागू की गई है. इसके नतीजों और प्रभावशीलता की समीक्षा के बाद इसे पूरे शहर में लागू करने पर फैसला लिया जाएगा.

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प्रीतीश सहाय

लेखक के बारे में

By प्रीतीश सहाय

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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