SC में पेंडिंग 93000 केसों का जल्द होगा निपटारा: CJI सूर्यकांत ने बनाई 4 स्पेशल बेंच, अब तेजी से होगा लंबित मामलों पर सुनवाई

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CJI जस्टिस सूर्यकांत ( स्रोत- एएनआई )

CJI जस्टिस सूर्यकांत ( स्रोत- एएनआई )

CJI Justice Surya Kant : CJI जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में वर्षों से लंबित 93,000 से अधिक मामलों के जल्द निपटारे के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. उन्होंने सिविल और आपराधिक मामलों के लिए चार विशेष बेंचों का गठन किया है, जिनका मुख्य उद्देश्य पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाना है.

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CJI Justice Surya Kant : भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में वर्षों से लंबित मामलों के जल्द निपटारे के लिए अहम कदम उठाया है. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, उन्होंने बताया कि नए रोस्टर में तीन नहीं, बल्कि चार स्पेशल बेंच बनाई गई हैं. इनमें दो बेंच सिविल मामलों की सुनवाई करेंगी, जबकि दो बेंच आपराधिक (क्रिमिनल) मामलों पर विशेष रूप से काम करेंगी. इन बेंचों का मुख्य उद्देश्य पुराने मामलों का तेजी से निपटारा करना है.

सुप्रीम कोर्ट में तकरीबन 93,000 केस पेंडिंग

सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि नई व्यवस्था के तहत सिविल और क्रिमिनल मामलों को अलग-अलग विशेष बेंचों में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट तकरीबन 93,000 केस अभी भी पेंडिंग में हैं. इनमें कम से कम 35 से 40 प्रतिशत मामले सबसे पुराने हैं. सीजेआई ने कहा कि इससे सुनवाई की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी और वर्षों से लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जा सकेगा. अदालत का मानना है कि इससे न्याय मिलने में हो रही देरी को काफी हद तक कम किया जा सकेगा.

लंबित मामलों का बोझ घटाने पर रहेगा फोकस

सुप्रीम कोर्ट में बड़ी संख्या में पुराने मामलों के लंबित रहने को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है. नई चार स्पेशल बेंचों के गठन का उद्देश्य इसी बोझ को कम करना है. इन बेंचों में नियमित रूप से पुराने मामलों की सुनवाई होगी, ताकि वर्षों से न्याय का इंतजार कर रहे लोगों को जल्द राहत मिल सके.

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न्याय व्यवस्था को तेज और प्रभावी बनाने की कोशिश

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सीजेआई सूर्यकांत का यह फैसला न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और तेज बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. यदि यह व्यवस्था सफल रहती है, तो न केवल सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या घटेगी, बल्कि आम लोगों का न्यायपालिका पर भरोसा भी और मजबूत होगा. यह पहल देश की सर्वोच्च अदालत में समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम बदलाव मानी जा रही है.


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