स्पा और ऑर्केस्ट्रा के नाम पर ‘बचपन’ की नीलामी! सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा- क्या 10 साल की बच्चियां मसाज पार्लर और डांस बार के लिए हैं?

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Supreme Court Notice on Child Labor in Spa West Bengal Bihar Crime News

Supreme Court Notice On Child Labor In Spa West Bengal Bihar Crime News

Supreme Court Notice on Child Labor in Spa: सुप्रीम कोर्ट ने स्पा, मसाज पार्लर और ऑर्केस्ट्रा में बच्चों के शोषण पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. बिहार और बंगाल से 200 से अधिक नाबालिगों को रेस्क्यू किये जाने के बाद कोर्ट ने इसे गंभीर स्थिति बताया है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

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Supreme Court Notice on Child Labor in Spa: देश के ‘ग्लैमर’ वर्ल्ड की अंधेरी गलियों में मासूम बच्चियों के शारीरिक और मानसिक शोषण पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया. कोर्ट ने केंद्र सरकार, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और मानवाधिकार आयोग को नोटिस जारी किया है.

बच्चों को अश्लीलता के दलदल में धकेलना बर्दाश्त नहीं : सुप्रीम कोर्ट

ऑर्केस्ट्रा, मसाज पार्लर, स्पा और डांस बार जैसे क्षेत्रों में बच्चों के काम करने पर पूरी तरह रोक लगाने की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) और मानवाधिकार आयोग (NHRC) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्थिति को ‘अत्यंत गंभीर’ बताते हुए कहा कि बच्चों को अश्लीलता के दलदल में धकेलना कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा.

10 साल की उम्र और 10,000 रुपए में सौदा!

बाल अधिकार समूह जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन अलायंस (JRCA) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फुलका ने अदालत में चौंकाने वाले खुलासे किये. उन्होंने बताया कि कैसे गरीबी का फायदा उठाकर मासूमों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है.

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झूठे वादे, इंसानी मंडी और अश्लीलता का दबाव

गरीब समुदायों की बच्चियों को फिल्मों में रोल दिलाने या डांस ट्रेनिंग के बहाने बहलाया-फुसलाया जाता है. कई बच्चियों को महज 10,000 से 50,000 रुपए में बेच दिया जाता है. फिर कर्ज के चंगुल में फंसाकर जबरन उनसे मजदूरी करायी जाती है. मासूमों को नशे में धुत लोगों के सामने अश्लील कपड़े पहनकर प्रस्तुति देने के लिए मजबूर किया जाता है.

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बिहार और बंगाल बने ‘सप्लाई चेन’ के केंद्र?

सर्वोच्च अदालत में जो आंकड़े पेश किये गये, उसने राज्यों की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2025 से मई 2026 के बीच चलाये गये बचाव अभियानों में चौंकाने वाली हकीकत सामने आयी. अकेले बिहार और पश्चिम बंगाल की नृत्य मंडलियों और ऑर्केस्ट्रा से 212 नाबालिगों को रेस्क्यू किया गया. दिल्ली और राजस्थान में मसाज पार्लर और स्पा से 12 नाबालिगों को बचाया गया. इनमें कुछ की उम्र महज 12 साल थी.

कानून की खामी का उठाया जा रहा फायदा

फिलहाल मसाज पार्लर और स्पा विनियमन (Regulation) की श्रेणी में आते हैं, न कि पूर्ण प्रतिबंध (Prohibition) की श्रेणी में. इसी का फायदा उठाकर 14-18 वर्ष के किशोरों को वहां काम पर रखा जा रहा है.

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सुप्रीम कोर्ट से मांग- खतरनाक व्यवसाय की सूची में हों शामिल

याचिका में मांग की गयी है कि केंद्र सरकार बाल और किशोर श्रम अधिनियम, 1986 की अनुसूची के ‘भाग-क’ में संशोधन करे. ऑर्केस्ट्रा, डांस बार, नौटंकी, स्पा और सैलून को ‘खतरनाक व्यवसायों’ की सूची में डाला जाये, ताकि 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी बच्चे को वहां रखने पर जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान हो सके. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि ये क्षेत्र देशभर में नाबालिग लड़कियों की संगठित तस्करी और यौन शोषण के ‘गुप्त ठिकाने’ बन गये हैं.

Supreme Court Notice on Child Labor in Spa: अगला कदम क्या?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय श्रम मंत्रालय और विधि मंत्रालय को नोटिस जारी कर पूछा है कि इन क्षेत्रों को अब तक पूरी तरह प्रतिबंधित क्यों नहीं किया गया है. इस मामले की अगली सुनवाई केंद्र के जवाब के बाद होगी, लेकिन इस हस्तक्षेप ने देश में चल रहे अवैध स्पा और ऑर्केस्ट्रा संचालकों की नींद उड़ा दी है.

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मिथिलेश झा

लेखक के बारे में

By मिथिलेश झा

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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