सहायक लिपिक Rs 5000 घूस लेते रंगे हाथ धराया

Updated at : 26 Jul 2018 7:05 AM (IST)
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सहायक लिपिक Rs 5000 घूस लेते रंगे हाथ धराया

जमशेदपुर : नीमडीह अंचल कार्यालय में पदस्थापित सहायक लिपिक (डीलिंग असिस्टेंट) रंजन कुमार दुबे और सीओ दफ्तर के बिचौलिया (दलाल) अर्जुन महतो को पांच हजार रुपये रिश्वत लेते बुधवार को एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) की टीम ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया. दोनों को सोनारी स्थित एसीबी थाना लाकर पूछताछ करने के बाद उन्हें जेल भेज […]

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जमशेदपुर : नीमडीह अंचल कार्यालय में पदस्थापित सहायक लिपिक (डीलिंग असिस्टेंट) रंजन कुमार दुबे और सीओ दफ्तर के बिचौलिया (दलाल) अर्जुन महतो को पांच हजार रुपये रिश्वत लेते बुधवार को एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) की टीम ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया. दोनों को सोनारी स्थित एसीबी थाना लाकर पूछताछ करने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया. छापेमारी का नेतृत्व एसीबी के डीएसपी अमर पांडेय ने किया.
जमीन का म्यूटेशन कराने के बदले मांगी थी रिश्वत. जानकारी के मुताबिक नीमडीह निवासी अशोक गोप लुपुंगडीह में अपने ससुर के नाम की चार डिसमिल जमीन का म्यूटेशन कराने के लिए सीओ कार्यालय का चक्कर लगा रहे थे. सहायक लिपिक रंजन कुमार दूबे म्यूटेशन करने में आनाकानी कर रहे थे. अशोक गोप के मुताबिक ऑफिस के बिचौलिया अर्जुन महतो ने दस हजार रुपये लेकर हाथों हाथ म्यूटेशन करा देने की बात कही थी.
दोनों के बीच अंतिम रूप से पांच हजार रुपये पर म्यूटेशन कराने का सौदा तय हुआ, लेकिन अशोक गोप ने रिश्वत देने के बजाय इसकी लिखित शिकायत एसीबी थाना में कर दी. शिकायत का अध्ययन करने के बाद पूरे मामले को एसीबी ने सही पाया. बुधवार को एसीबी डीएसपी अमर पांडेय के नेतृत्व में एक टीम ने नीमडीह सीओ दफ्तर में छापामारी के लिए रणनीति तैयार की.
इसके बाद अशोक गोप एसीबी के एक व्यक्ति के साथ म्यूटेशन कराने के लिए पांच हजार रुपये देने दलाल के पास पहुंचे. उस समय दलाल अंचल कार्यालय में ही था. दलाल ने जैसे ही पैसे लिये, एसीबी की टीम ने ऐन वक्त पर धर दबोचा. इसके बाद सहायक लिपिक को भी एसीबी की टीम ने धर दबोचा. केमिकल टेस्ट कराने के बाद उनको सोनारी स्थित एसीबी थाना लाया गया.
सीओ दफ्तर में हर काम के बदले देना पड़ता है घूस : अर्जुन. छापेमारी के बाद गिरफ्तार दलाल अर्जुन महतो ने पूछताछ में एसीबी की टीम के समक्ष खुलासा किया कि सीओ दफ्तर में बिना पैसे दिये कोई काम नहीं होता. सीधे-सादे ग्रामीण किसी काम को लेकर जैसे ही सीओ दफ्तर आते हैं उन्हें बिचौलिये घेर लेते हैं और काम कराने के एवज में पैसे लेते हैं.
बिचौलिये लिपिक से लेकर अफसरों तक पैसे पहुंचाते हैं. जो पैसे नहीं देता उसे कुछ न कुछ कानूनी प्रावधान का हवाला देकर लौटा दिया जाता है. कभी-कभी कागजात की कमी बताकर वापस भेज दिया जाता है. हर तरह के काम का रेट फिक्स है. चार डिसमिल जमीन का म्यूटेशन कराने के लिए 2500 रुपये से लेकर दस हजार रुपये की मांग की जाती है.
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