सात महीने से पाई-पाई को तरस रहे हजारीबाग के 447 सहायक आचार्य, नियुक्ति के बाद से नहीं मिल रहा वेतन

हजारीबाग का जिला एवं प्रशिक्षण संस्थान का दफ्तर. फोटो: प्रभात खबर
Hazaribagh News: हजारीबाग के 447 सहायक आचार्य सात महीने से वेतन नहीं मिलने से आर्थिक संकट झेल रहे हैं. नियुक्ति के बाद से भुगतान लंबित है. प्रमाण पत्र सत्यापन और जीपीएस खाता प्रक्रिया अधूरी होने से समस्या बढ़ी है. त्योहार भी फीके रहे, अब परिवार और बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.
हजारीबाग से आरिफ की रिपोर्ट
Hazaribagh News: झारखंड के हजारीबाग जिले के 447 सहायक आचार्य पिछले सात महीने से पाई-पाई के लिए तरस रहे हैं. इसका कारण यह है कि नियुक्ति के बाद से ही अभी तक इन सहायक आचार्यों को वेतन के पैसों का दर्शन नहीं हुआ है. इनकी नियुक्ति 2 सितंबर, 2025 को प्रारंभिक स्कूलों में कक्षा एक से आठवीं के लिए 447 सहायक आचार्यों की नियुक्ति की गई थी. तब से लेकर अब तक इन्हें सरकार की ओर से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है.
परब-त्योहार में दांत खटाखट
आलम यह है कि सरकार की ओर से वेतन नहीं दिए जाने की वजह से इन सहायक आचार्यों का दशहरा, दिवाली का त्योहार तो फीका गया ही, होली, ईद, सरहुल और रामनवमी में भी इनके परिवारों को पैसों के बिना दांत खटाखट चलाना पड़ा. क्योंकि, पैसों के अभाव में इनके यहां त्योहार नहीं मनाए गए. सबसे अधिक परेशानी शहरी क्षेत्र से सटे कटकमसांडी के सहायक आचार्यों को हुई. यहां के स्कूलों में सबसे अधिक 36 सहायक आचार्य नियुक्त किए गए हैं.
घर में राशन और बीमारों की दवा पर भी आफत
कुछ सहायक आचार्यों ने बताया मार्च महीना समाप्त हो रहा है. अप्रैल महीने से शिक्षा का नया सत्र शुरू हो रहा है. इसमें बच्चों की स्कूल फीस, किताबें, पोशाक के आलावा इधर ट्यूशन फीस की चिंता सता रही है. घर में राशन और बीमार लोगों की दवाई पहले से खत्म हो गया है. कर्ज लेने की नौबत आ गई है. इस ओर शिक्षा विभाग का कोई ध्यान नहीं रहने से बड़ी संख्या में सहायक आचार्य हलकान एवं परेशान हैं.
दो सितंबर को मिला था नियुक्ति पत्र
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रांची के प्रोजेक्ट भवन में राज्य स्तर पर दो सितंबर 2025 को सहायक आचार्यों को नियुक्ति पत्र सौंपा है. इसमें हजारीबाग जिले से अलग-अलग विषयों के 447 सहायक आचार्य शामिल हैं.
कहां फंसा है पेच
वेतन शुरू होने से पहले सहायक आचार्यों का जमा प्रमाण पत्रों का सत्यापन होना है. सात महीने बाद भी प्रमाण पत्रों के सत्यापन का काम अधूरा है. सहायक आचार्यों का जीपीएस खाता भी खुलना अनिवार्य है. इधर प्रमाण पत्रों के सत्यापन कार्य अधूरा रहने से सामान्य भविष्य निधि (जीपीएस) खाता खुलने का कार्य भी लंबित पड़ा हुआ है.
कहां कितने सहायक आचार्य
- कटकमसांडी: 36
- कटकमदाग: 45
- पदमा: 21
- बरही: 21
- सदर: 40
- टाटीझरिया: 28
- दारू: 24
- विष्णुगढ़: 35
- इचाक: 36
- केरेडारी: 10
- बड़कागांव: 38
- डाडी: 18
- चुरचू: 17
- चौपारण: 34
- बरकट्ठा: 33
- चलकुसा: 11
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क्या कहते हैं डीएसई
हजारीबाग जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) आकाश कुमार ने कहा सहायक आचार्यों की नियुक्ति बाद आगे की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए विभाग गंभीर है. वेतन भुगतान से पहले की सभी प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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